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800 ग्राम पंचायतों में तलाशी जाएगी सांस्कृतिक धरोहर
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फोटो-7-बलरामपुर के जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यशाला में मौजूद ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर प्रती?
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। जिले की 800 ग्राम पंचायतों में सांस्कृतिक धरोहार की तलाश होगी। गांव की सांस्कृतिक धरोहर की सूचना को मोबाइल में भी कैद किया जाएगा। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय और सीएससी के मध्य गांवों में धरोहर की तलाश करने के लिए अनुबंध किया गया है। सभी गांवों की सांस्कृतिक सूचना विशेष मोबाइल एप के माध्यम से संकलित करने का काम कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों के माध्यम से होगा। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर के 800 सीएसी उद्यमियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह जानकारी एडीएम राम अभिलाष ने दी। वह जिला पंचायत सभागार में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर काम करने वाले ग्राम स्तर के 480 उद्यमियों की दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हिस्सेदारी कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि गांव की सांस्कृतिक धरोहर को तलाश करने का कार्य देश में पहली बार शुरू किया गया है। इसे मेरा गांव मेरी धरोहर नाम दिया गया है। ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर प्रतीक नरेश ने कहा कि सर्वे के दौरान सीएससी के उद्यमियों को गांव के खास सांस्कृतिक पहचान को मोबाइल में कैद करना है। गांव के प्रसिद्घ स्थान, किवदंती, व्यक्ति विशेष, पकवान, विशेष आभूषण व कपड़े आदि की जानकारी साझा की जाएगी। सीएससी के जिला प्रबंधक अमित सिंह ने कहा कि जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में काम करने वाले कॉमन सर्विस सेंटर के उद्यमियों को अपने-अपने गांव में सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करनी है। पहले चरण में 480 उद्यमियों को डेटा जुटाने के संबंध में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। बाकी बचे 320 उद्यमियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
कॉमन सर्विस सेंटर के जिला समन्वयक अरुण प्रकाश वर्मा ने सभी उद्यमियों को सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करने के बारे में प्रशिक्षण दिया। सर्वे के दौरान उद्यमियों को मोबाइल से फोटो व वीडियो के माध्यम से मेरा गांव मेरी धरोहर को संकलित करने का तरीका बताया गया। सरकार के प्रयास से अब गांवों के सांस्स्कृतिक धरोहर की एक क्लिक से जानकारी हो सकेगी।
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उन्होंने बताया कि गांव की सांस्कृतिक धरोहर को तलाश करने का कार्य देश में पहली बार शुरू किया गया है। इसे मेरा गांव मेरी धरोहर नाम दिया गया है। ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर प्रतीक नरेश ने कहा कि सर्वे के दौरान सीएससी के उद्यमियों को गांव के खास सांस्कृतिक पहचान को मोबाइल में कैद करना है। गांव के प्रसिद्घ स्थान, किवदंती, व्यक्ति विशेष, पकवान, विशेष आभूषण व कपड़े आदि की जानकारी साझा की जाएगी। सीएससी के जिला प्रबंधक अमित सिंह ने कहा कि जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में काम करने वाले कॉमन सर्विस सेंटर के उद्यमियों को अपने-अपने गांव में सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करनी है। पहले चरण में 480 उद्यमियों को डेटा जुटाने के संबंध में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। बाकी बचे 320 उद्यमियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
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कॉमन सर्विस सेंटर के जिला समन्वयक अरुण प्रकाश वर्मा ने सभी उद्यमियों को सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करने के बारे में प्रशिक्षण दिया। सर्वे के दौरान उद्यमियों को मोबाइल से फोटो व वीडियो के माध्यम से मेरा गांव मेरी धरोहर को संकलित करने का तरीका बताया गया। सरकार के प्रयास से अब गांवों के सांस्स्कृतिक धरोहर की एक क्लिक से जानकारी हो सकेगी।
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