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दुष्कर्म के आरोपी को 15 वर्ष का कठोर कारावास
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बलरामपुर। एफटीसी प्रथम ने दुराचार के एक दोषी को 15 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोषी को एक लाख रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
बुधवार को जानकारी देते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रणधीर सिंह ने बताया कि नगर कोतवाली में आठ जुलाई 2019 को एक व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र दिया था कि उसने पूजा-पाठ के लिए फूलचंद्र द्विवेदी निवासी ताजपुर कोतवाली देहात जनपद गोंडा को घर पर बुलाया था। रात को पूजा कराने के बहाने फूलचंद्र ने मेरी बेटी को तंत्र मंत्र करके बेहोश कर दिया तथा दुराचार किया। बेटी ने होश आने पर घटना की जानकारी दी। पुलिस ने दुराचार का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य होने पर विवेचक ने फूलचंद्र द्विवेदी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेश पर फूलचंद्र को जेल भेज दिया गया। विवेचक ने फूलचंद्र को प्रथम दृष्टया दुराचार का आरोपी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय पर प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने 9 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने फर्जी फंसाए जाने की दलील देते हुए फूलचंद्र को निर्दोष बताया। सरकारी अधिवक्ता ने पूजा पाठ के नाम पर बहलाकर दुराचार करने को एक जघन्य अपराध व आस्था से खिलवाड़ करने की दलील देते हुए कठोर सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विनोद कुमार पंचम ने फूलचंद्र द्विवेदी को दुराचार का दोषी मानते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास व एक लाख रुपए का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी फूलचंद्र को एक वर्ष का अधिक कारावास भुगतना पड़ेगा। अर्थदंड की आधी राशि न्यायाधीश ने पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया।
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बुधवार को जानकारी देते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रणधीर सिंह ने बताया कि नगर कोतवाली में आठ जुलाई 2019 को एक व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र दिया था कि उसने पूजा-पाठ के लिए फूलचंद्र द्विवेदी निवासी ताजपुर कोतवाली देहात जनपद गोंडा को घर पर बुलाया था। रात को पूजा कराने के बहाने फूलचंद्र ने मेरी बेटी को तंत्र मंत्र करके बेहोश कर दिया तथा दुराचार किया। बेटी ने होश आने पर घटना की जानकारी दी। पुलिस ने दुराचार का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य होने पर विवेचक ने फूलचंद्र द्विवेदी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेश पर फूलचंद्र को जेल भेज दिया गया। विवेचक ने फूलचंद्र को प्रथम दृष्टया दुराचार का आरोपी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय पर प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने 9 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने फर्जी फंसाए जाने की दलील देते हुए फूलचंद्र को निर्दोष बताया। सरकारी अधिवक्ता ने पूजा पाठ के नाम पर बहलाकर दुराचार करने को एक जघन्य अपराध व आस्था से खिलवाड़ करने की दलील देते हुए कठोर सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विनोद कुमार पंचम ने फूलचंद्र द्विवेदी को दुराचार का दोषी मानते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास व एक लाख रुपए का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी फूलचंद्र को एक वर्ष का अधिक कारावास भुगतना पड़ेगा। अर्थदंड की आधी राशि न्यायाधीश ने पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया।
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