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उर्स के चौथे दिन हुआ जवाबी कव्वाली का आयोजन
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बलरामपुर। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बाबा हुरमत शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर चल रहे पांच दिवसीय सालाना उर्स के चौथे दिन शनिवार की रात आस्ताने पर जवाबी कव्वाली का आयोजन किया गया। देवा शरीफ से आए कव्वालों ने कलाम पेशकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नगर के मोहल्ला गदुरहवा स्थित बाबा हुरमत शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने पर देवा शरीफ से आए कव्वाल अफ्फान वारसी और कव्वाल आफताब हुसैन के बीच जवाबी मुकाबला हुआ। कव्वाल अफ्फान वारसी ने कलाम ‘काफिरे इश्क ने क्या से क्या कर दिया, तेरे गम से मुझ फुर्सत न हुई न होगी...’ सुनाया। जवाब में आफताब हुसैन ने ‘अल्लाह ने बख्शे हैं हमें दो-दो सहारे, ख्वाजा भी हमारे, वारिस भी हमारे...’।
कव्वालों के कलाम को सुनने के लिए अकीदतमंदों का जमावड़ा पूरी रात लगा रहा। आस्ताना कमेटी के सचिव हकीम निसार वारिस ने बताया कि कमेटी के सदर डॉ. तारिक़ अफजल सिद्दीकी, अब्बास सिद्दीकी, मोहमद हसन कुरेशी, शमी खान व सब्बीर शाह ने दोनों कव्वालों तथा अतिथियों को माला-साफा पहनाकर उनका स्वागत किया।
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नगर के मोहल्ला गदुरहवा स्थित बाबा हुरमत शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने पर देवा शरीफ से आए कव्वाल अफ्फान वारसी और कव्वाल आफताब हुसैन के बीच जवाबी मुकाबला हुआ। कव्वाल अफ्फान वारसी ने कलाम ‘काफिरे इश्क ने क्या से क्या कर दिया, तेरे गम से मुझ फुर्सत न हुई न होगी...’ सुनाया। जवाब में आफताब हुसैन ने ‘अल्लाह ने बख्शे हैं हमें दो-दो सहारे, ख्वाजा भी हमारे, वारिस भी हमारे...’।
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कव्वालों के कलाम को सुनने के लिए अकीदतमंदों का जमावड़ा पूरी रात लगा रहा। आस्ताना कमेटी के सचिव हकीम निसार वारिस ने बताया कि कमेटी के सदर डॉ. तारिक़ अफजल सिद्दीकी, अब्बास सिद्दीकी, मोहमद हसन कुरेशी, शमी खान व सब्बीर शाह ने दोनों कव्वालों तथा अतिथियों को माला-साफा पहनाकर उनका स्वागत किया।
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