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Balrampur News: कुटीर उद्योगों से सजेगा सीमा क्षेत्र, थारू संस्कृति को मिलेगा नया जीवन

Wed, 08 Oct 2025 09:19 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Oct 2025 09:19 PM IST
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Cottage industries will enhance the border region, giving new life to Tharu culture.
बलरामपुर के जरवा में बना थारू समाज का संग्राहलय ।-संवाद
बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा से सटे जरवा क्षेत्र में कुटीर उद्योगों और सीमाई व्यापार को प्रोत्साहन देने की पहल होने लगी है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। थारू समाज की संस्कृति और परंपराएं भी पुनर्जीवित होंगी। इमलिया कोडर में बने थारू संग्रहालय में भी रौनक बढ़ी है। सभी को उम्मीद है कि कोयलाबास बॉर्डर से भंसार सीमा की वृद्धि से तरक्की होगी और पूरे क्षेत्र में तेजी से बदलाव होगा।
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''तरक्की का द्वार'''' अभियान से थारू समाज की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। थारू महिला लक्ष्मी देवी का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर लघु उद्योग स्थापित किए जाएं तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। इस पहल से पलायन रुकेगा और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। वह कहती हैं कि थारू महिलाएं पहले से ही हस्तशिल्प, बांस शिल्प और मिट्टी के बर्तनों को तैयार करने में निपुण हैं।
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इसी क्रम में एसएसबी ने नागरिक कल्याण कार्यक्रम से महिलाओं को प्रशिक्षित करने की योजना भी तैयार की है। साध्वी थारू ने बताया कि हमारे समाज की आजीविका का बड़ा हिस्सा मजदूरी पर निर्भर है। अगर सरकार कुटीर उद्योगों को सहयोग दे और कस्टम चौकी से व्यापार की राह सुगम बने, तो हम अपने उत्पाद नेपाल सहित अन्य बाजारों में बेच सकते हैं। इससे न सिर्फ आमदनी बढ़ेगी, बल्कि हमारी कला को भी पहचान मिलेगी।
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व्यापारी राघव राम थारू कहते हैं कि एक समय था जब जरवा बाजार सीमाई व्यापार का केंद्र था। अब फिर से वही रौनक लौटाने की कोशिश शुरू हुई है। पलटूराम थारू ने बताया कि थारू समाज की बेहतरी के लिए कई बार मुख्यमंत्री को पत्र भेजे गए हैं। सुझाव दिया गया है कि कुटीर उद्योगों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर थारू परिवारों को मजबूत बनाया जाए। अब तरक्की का द्वार अभियान से उम्मीद है कि अच्छे दिन आएंगे।
जरवा कस्टम चौकी से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से आर्थिक समृद्धि आएगी। थारू संस्कृति, लोककला और परंपरा का संरक्षण भी होगा। सीमा क्षेत्र की यही तरक्की आने वाले समय में थारू समाज के आत्मविश्वास और सम्मान का प्रतीक बनेगी।

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जिले में थारू समाज की स्थिति पर एक नजर
दक्षिणी नेपाल के तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में थारू जनजाति रहती है। विशुनपुर विश्राम स्थित थारू विकास परियोजना की रिपोर्ट के अनुसार जिले के गैसड़ी और पचपेड़वा ब्लॉक में इनकी सर्वाधिक आबादी है। 2011 की जनगणना के अनुसार पंचपेड़वा ब्लॉक के 33 गांवों की कुल थारू आबादी 19, 097 थी। गैंसड़ी ब्लॉक के 19 गांवों की आबादी 5510 रही। सदर ब्लॉक के 11 गांवों में 101, हरैया सतघरवा ब्लॉक के आठ गांवों में 37, तुलसीपुर ब्लॉक के तीन गांवों 10, गैड़ासबुज़ुर्ग ब्लॉक के मात्र मंगईपुर गांव में एक, उतरौला ब्लॉक के दो गांवों में चार तथा श्रीदत्तगंज ब्लॉक के गोमड़ी में एक थारू परिवार है। इस प्रकार 2011 की जनगणना से बलरामपुर जिले में थारू जनजाति की कुल आबादी 24, 761 दर्ज की गई है।
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थारू संस्कृति की खासियत
-थारू जनजाति भारत-नेपाल सीमा के तराई क्षेत्र में निवास करता है।

-पारंपरिक जीवनशैली, लोकगीत, नृत्य और हस्तशिल्प इसकी पहचान है।
-महिलाएं आकर्षक कढ़ाई और मिट्टी के बर्तनों के निर्माण में निपुण हैं।
-लोकगीत और त्योहार प्रकृति और श्रम के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
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