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Balrampur News: लोकगीतों पर झूमे बच्चे, संस्कृत में सीखे अभिवादन के शब्द
Sun, 17 May 2026 10:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 17 May 2026 10:53 PM IST
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फोटो-19-बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा में नृत्य करते बच्चे ।-स्रोत : विभाग
बलरामपुर। भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के तहत परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को भाषा, कला और संस्कृति से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा, उच्च प्राथमिक विद्यालय देवीपाटन और उच्च प्राथमिक विद्यालय इमिलिया में विविध गतिविधियों का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा में कला एवं संस्कृति से जुड़ाव के लिए सामूहिक ज्ञान, मातृभाषा में संवाद और नृत्य मुद्राओं पर आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों ने नृत्य कला का आकर्षक प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया। लोकगीत झूले-झूले पालना और बालगीत तितली रानी पर बच्चों की प्रस्तुति खूब सराही गई। अंशिका गुप्ता, आराध्या पटेल, दिशा, सरोजिनी, अंश गुप्ता, समर, सुभाष और निर्मला समेत अन्य बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रधानाध्यापक बृजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि मातृभाषा में संवाद और लोककला बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना और भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि विकसित करना है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय देवीपाटन में शिक्षिका दीप्ति अग्रवाल के निर्देशन में बच्चों को संस्कृत भाषा में अभिवादन करना सिखाया गया। बच्चों ने नमस्ते, सुप्रभातम और स्वागतम जैसे शब्द रुचिपूर्वक सीखे। साथ ही आम, केला और सेब समेत विभिन्न फलों के संस्कृत नाम भी बताए गए। बच्चों ने फलों के सुंदर चित्र बनाकर उनके संस्कृत नाम लिखे।
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प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा में कला एवं संस्कृति से जुड़ाव के लिए सामूहिक ज्ञान, मातृभाषा में संवाद और नृत्य मुद्राओं पर आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों ने नृत्य कला का आकर्षक प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया। लोकगीत झूले-झूले पालना और बालगीत तितली रानी पर बच्चों की प्रस्तुति खूब सराही गई। अंशिका गुप्ता, आराध्या पटेल, दिशा, सरोजिनी, अंश गुप्ता, समर, सुभाष और निर्मला समेत अन्य बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रधानाध्यापक बृजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि मातृभाषा में संवाद और लोककला बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना और भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि विकसित करना है।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय देवीपाटन में शिक्षिका दीप्ति अग्रवाल के निर्देशन में बच्चों को संस्कृत भाषा में अभिवादन करना सिखाया गया। बच्चों ने नमस्ते, सुप्रभातम और स्वागतम जैसे शब्द रुचिपूर्वक सीखे। साथ ही आम, केला और सेब समेत विभिन्न फलों के संस्कृत नाम भी बताए गए। बच्चों ने फलों के सुंदर चित्र बनाकर उनके संस्कृत नाम लिखे।
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