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Balrampur News: अरबों रुपये नहीं बुझा सके सूखे नलों की प्यास

Fri, 20 Feb 2026 10:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Feb 2026 10:30 PM IST
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Billions of rupees could not quench the thirst of dry taps
बलरामपुर के धनकरपुर हाटी गांव में पानी टंकी के लिए चिह्नित स्थल ।-संवाद
पचपेड़वा। गर्मी की आहट के साथ ही पचपेड़वा ब्लॉक के गांवों में पानी की चिंता फिर गहराने लगी है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर गांवों में अब तक नल सूखे पड़े हैं।
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हार्ड एरिया माने जाने वाले इस क्षेत्र में हर साल गर्मी के मौसम में जलस्तर तेजी से नीचे चला जाता है। हैंडपंप सूखने लगते हैं और लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2020 में योजना शुरू की गई थी, जिसे 2024 तक पूरा करना था। पचपेड़वा विकासखंड की 129 ग्राम पंचायतों के 33,075 घरों तक पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन कई गांवों में पानी टंकी की केवल नींव भरकर काम रोक दिया गया।
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ग्राम पंचायत धनकरपुर हाटी में टंकी के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित हुई, सीमांकन भी हुआ, पर पांच साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। कई गांवों की गलियों में पाइप डालने के बाद सड़क की मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी पटरियां ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई हैं।
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जिले की 630 ग्राम पंचायतों के 884 गांवों को योजना से जोड़ने की व्यापक कार्ययोजना बनी थी। अब तक 7.82 अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन गांवों में जलापूर्ति शुरू न होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।


गलियां जर्जर, सूखे पड़े नल
ग्रामवासी धरखन का कहना है कि पाइप डालने के लिए सड़क खोदकर छोड़ दी गई। सड़क भी टूटी, पानी भी नहीं मिला। गोवर्धन का कहना है कि गर्मी में हैंडपंप जवाब दे देते हैं, तब दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता है। अर्जुन यादव का कहना है कि हमने सोचा था नल से पानी मिलेगा, लेकिन अब भी हालात पहले जैसे हैं। काम अधूरा छोड़ दिया गया है।
तकनीकी दिक्कतों से हुई देरी
कुछ स्थानों पर भूमि संबंधी व तकनीकी दिक्कतों से देरी हुई है। शेष कार्य प्राथमिकता से पूरा कराया जा रहा है और जल्द जलापूर्ति शुरू करने का प्रयास है।
-संदीप सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
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