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पानी घटने के साथ बढ़ रहीं दुश्वारियां
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ोटो-14-बलरामपुर के उतरौला नगर में भरा बाढ़ का पानी।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे तो आ गया, लेकिन बाढ़ के चलते उतरौला क्षेत्र के 40 से अधिक गांव अभी भी टापू बने हुए हैं। उतरौला नगर के कई मोहल्लों में अभी भी पानी भरा हुआ है। बाढ़ का पानी खिसकने के बाद घरों में भरा कीचड़ लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। बाढ़ के चलते अभी भी उतरौला के करीब 100 गांवों की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।
पिछले करीब दस दिनों से राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के पानी ने जिले को तबाह कर दिया है। बाढ़ की विभीषिका में अब तक 380 गांव घिरे हुए थे। 214 गांव टापू बने हुए थे। बीते दो दिनों से राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे तो आ गया है, लेकिन उतरौला में बाढ़ का कहर अभी भी जारी है। लालनगर, बिरदा बनिया भारी, मोहनजोत, मटियरिया कर्मा, केवटली, पालापुर, महुंआधनी व सुरहिया देवर सहित 40 से अधिक गांव में बाढ़ पीड़ित भोजन व पानी के संकट से जूझ रहे हैं। प्रशासन को गांव में फंसे लोगों को भोजन पहुंचाने में पसीना छूट रहा है। राहत सामग्री लेकर टीम के गांव पहुंचने पर भी एक साथ टूट पड़ते हैं। उतरौला नगर के कांशीराम कॉलोनी, आर्यनगर व सुभाषनगर में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को जलभराव के बीच से होकर आवागमन करना पड़ता है।
बंद स्कूलों को आज खोलना है चुनौती
बाढ़ के चलते जिले के 300 अधिक स्कूल जलमग्न हो गए थे। अभी भी 100 से अधिक स्कूलों में पानी भरा हुआ है। इसमें बलरामपुर व उतरौला नगर क्षेत्र के कई परिषदीय विद्यालय भी शामिल हैं। बीएसए कल्पना देवी ने सोमवार से स्कूल खोलने का निर्देश जारी किया है। जलभराव वाले स्कूलों में पठन-पाठन शुरू हो पाना काफी मुश्किल लग रहा है। जिन स्कूलों का पानी निकल गया है उनकी सफाई शिक्षकों के लिए चुनौती बनी हुई है। रविवार को शिक्षक व विद्यालय प्रबंधन समिति के लोग ने स्कूल की सफाई की। कुछ स्कूलों में दवा का छिड़काव भी कराया गया।
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पिछले करीब दस दिनों से राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के पानी ने जिले को तबाह कर दिया है। बाढ़ की विभीषिका में अब तक 380 गांव घिरे हुए थे। 214 गांव टापू बने हुए थे। बीते दो दिनों से राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे तो आ गया है, लेकिन उतरौला में बाढ़ का कहर अभी भी जारी है। लालनगर, बिरदा बनिया भारी, मोहनजोत, मटियरिया कर्मा, केवटली, पालापुर, महुंआधनी व सुरहिया देवर सहित 40 से अधिक गांव में बाढ़ पीड़ित भोजन व पानी के संकट से जूझ रहे हैं। प्रशासन को गांव में फंसे लोगों को भोजन पहुंचाने में पसीना छूट रहा है। राहत सामग्री लेकर टीम के गांव पहुंचने पर भी एक साथ टूट पड़ते हैं। उतरौला नगर के कांशीराम कॉलोनी, आर्यनगर व सुभाषनगर में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को जलभराव के बीच से होकर आवागमन करना पड़ता है।
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बंद स्कूलों को आज खोलना है चुनौती
बाढ़ के चलते जिले के 300 अधिक स्कूल जलमग्न हो गए थे। अभी भी 100 से अधिक स्कूलों में पानी भरा हुआ है। इसमें बलरामपुर व उतरौला नगर क्षेत्र के कई परिषदीय विद्यालय भी शामिल हैं। बीएसए कल्पना देवी ने सोमवार से स्कूल खोलने का निर्देश जारी किया है। जलभराव वाले स्कूलों में पठन-पाठन शुरू हो पाना काफी मुश्किल लग रहा है। जिन स्कूलों का पानी निकल गया है उनकी सफाई शिक्षकों के लिए चुनौती बनी हुई है। रविवार को शिक्षक व विद्यालय प्रबंधन समिति के लोग ने स्कूल की सफाई की। कुछ स्कूलों में दवा का छिड़काव भी कराया गया।
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