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बलरामपुर की मसूर दाल का नेपाल में होगा निर्यात

Sat, 07 Nov 2020 09:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2020 09:44 PM IST
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Balrampur's Masoor Dal will be exported in Nepal
बलरामपुर। जिले में तैयार मसूर की दाल अब नेपाल में निर्यात की जाएगी। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत दाल का उत्पादन कर नेपाल में इसका निर्यात किया जाएगा। इससे जिले के कारोबारियों को लाभ कमाने का शानदार मौका मिलेगा।
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किसानों को भी दाल का अधिक उत्पादन करने से लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के डीसी डीआईसी अमित त्रिपाठी ने जूम एप के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके सीडीओ अमनदीप डुली को जिले में दाल उत्पादन को बढ़ावा देने का जिम्मा सौंपा है। सीडीओ ने जिले के संबंधित विभागों के अफसरों को दाल का निर्यात बढ़ाने के लिए मुहिम में जुटने का निर्देश दिया है।
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जूम एप की बैठक को संबोधित करते हुए डीसी डीआईसी ने कहा कि भारत दुनिया का दाल उत्पादन कर 12 प्रतिशत एक्सपोर्टर है। बलरामपुर जिले में दाल मिलें स्थापित करके पड़ोसी देश नेपाल में निर्यात किया जाए जिससे यहां के लोगों की आय में बढ़ोत्तरी हो।
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ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना के तहत जिले में दाल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रेरित करें। सीडीओ ने जिले में दाल उत्पादन के बारे में डीसी डीआईसी को पूरी जानकारी दी। शीघ्र ही संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करके दाल उत्पादन व निर्यात के संबंध में सीडीओ ने रणनीति तैयार करने का भरोसा दिलाया।
जूम एप की बैठक में ही डीडीएम नाबार्ड अरुण कुमार से सीडीओ ने दाल उत्पादन व निर्यात करने के संबंध में सुझाव लिया। डीडीएम नाबार्ड ने बताया कि थारु जनजाति के किसान हल्दी का उत्पादन करते हैं। सीड प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उप कृषि निदेशक डॉ. प्रभाकर सिंह व जिला कृषि अधिकारी मनजीत कुमार ने जूम एप की बैठक में दाल उत्पादन के संबंध में जानकारी दी।

कहा कि जिले में दलहन में मसूर का अधिक उत्पादन होता है। गैसड़ी ब्लॉक में सबसे अधिक मसूर की खेती होती है। दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास किया जा रहा है। एमईडीआई प्रयागराज व डीसी डीआईसी से जूम एप के माध्यम से बलरामपुर में एक्सपोर्ट व इम्पोर्ट के कार्य को बढ़ावा देने पर विचार विमर्श किया गया। एक्सपोर्ट व इम्पोर्ट को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ भविष्य में बैठक करने की रणनीति भी तैयार की गई।
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