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तालाबों में नहीं पानी, भरवाने में भी आनाकानी

Thu, 21 Apr 2022 10:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2022 10:57 PM IST
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balrampur
बलरामपुर। तालाबों को लबालब भरवाने के सरकार के आदेश पर अधिकारियों की आनाकानी भारी पड़ रही है। हालात ये हैं कि ग्रामीण अंचल के तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है। तालाबों के सूखने से जंगली जानवर, मवेशी व पक्षी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पानी की तलाश में जंगली जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। आबादी की तरफ आने वाले जंगली जानवर हिरन आदि को कुत्तों का शिकार बनना पड़ रहा है।
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गांवों के पुुराने तालाब धीरे-धीरे काफी पट गए हैं। ऐसे में उनकी गहराई काफी कम हो गई है। इससे बारिश के दिनों में भरा पानी जल्दी सूख जाता है। मनरेगा से खुुदवाए जाने वाले तालाब भी नाममात्र के गहरे होने के कारण बरसात के बाद अधिक दिनों तक उनमें पानी नहीं रहता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले तालाब 10 से 25 फिट तक गहरे होते थे।
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बारिश के दिनों में ये तालाब लबालब भर जाते थे। इतनी गहराई होने की वजह से तालाब सूखते नहीं थे। अब जो तालाब खुदवाए जा रहे हैं उनकी गहराई नाममात्र की रहती है। इस वजह से तालाब सूख रहे हैं। पिछले एक दशक में मनरेगा के तहत जिले में करीब 850 आदर्श तालाबों का निर्माण करोड़ों रुपये खर्च कर कराया गया है।
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प्रचंड गर्मी में हैंडपंप खराब होने से जहां लोग पानी के लिए भटक रहे हैं वहीं सूखे पड़े तालाब और पोखरे मवेशियों की परेशानी का कारण बने हैं। किसी भी तालाब में पानी नहीं भरा गया है। किसान और पशुपालक परेशान हैं कि खुद के पीने के पानी का इंतजाम करें या मवेशियों को देखें। कभी घरों के बाहर मवेशियों के लिए बनाई गई पानी की नांद अब सूखी पड़ी हैं।
गांव गलियों से पानी नहीं मिलता तो मवेशी तालाब की ओर जाते हैं लेकिन वहां भी पानी न देख उन्हें लौटना पड़ता है। तालाब, पोखर और पहाड़ी नाले सभी सूख गए हैं। ऐसे में मवेशी प्यास से भटक रहे हैं। प्रशासन भी तालाबों में पानी भरवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। गैसड़ी, पचपेड़वा, तुलसीपुर, ललिया, मथुरा, हरैया सतघरवा, श्रीदत्तगंज, उतरौला, पेहर बाजार व रेहरा बाजार आदि जगहों पर तालाब सूखे पड़े हैं।
गांवों के तालाबों के संरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की होती है। तालाब मनरेगा से खुदा हो या लघु सिंचाई विभाग ने खुदवाया हो, मगर तालाबों में पानी भराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों व वीडीओ की होती है। इसके बाद भी ग्राम प्रधान बजट का रोना रोते हैं। ग्राम प्रधानों का कहना है कि ऊपर से अभी तक तालाब में पानी भरवाने का कोई निर्देश नहीं मिला है।
नगर में तालाबों की भरमार है मगर किसी पर अतिक्रमण तो कहीं झाड़-झंखाड़ है। कुछ तालाब गंदगी से पटे हैं। नगर के मोतीसागर तालाब पर चारों तरफ से घर बनाकर अतिक्रमण कर लिया गया है। पजौवा तालाब में गंदगी व अतिक्रमण के चलते पानी पीने योग नहीं बचा है। मवेशियों के पहुंचने का कोई रास्ता भी नहीं है। इसी तरह नगर के कई अन्य तालाब जहां कभी मवेशी पानी पीते थे और लोग कपड़े धोने के इस्तेमाल में भी लाते थे, वे तालाब अब गंदगी से पटे हैं। कुछ तालाबों में काई जमी है। जिस कारण मवेशी भी उधर नहीं जाते हैं।

एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों को भरवाने का निर्देश संबंधित उपजिलाधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी को दिया गया है। आवश्यकतानुसार तालाबों में शीघ्र पानी भरवाया जाएगा।
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