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बारिश न होने से पिछड़ रही धान की रोपाई
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बलरामपुर। बारिश न होने से धान के रोपाई में पिछड़ रही है। समय से धान की रोपाई करने को लेकर अन्नदाताओं को चिंता सताने लगी है। पानी की जगह खेतों में धूल उड़ रही है। बीते कई दिनों से जिले में बारिश न होने से खेतों में पानी का संकट गहराने लगा है। सिंचाई के साधनों की कमी और डीजल की बढ़ती कीमतों से अन्नदाता परेशान हैं। असिंचित इलाकों में अन्नदाताओं ने प्रशासन से सिंचाई का इंतजाम कराने की मांग की है जिससे समय पर धान की रोपाई कर सकें।
अन्नदाता मानसून आने की राह देख रहे हैं। बारिश न होने से किसानों को धान की रोपाई करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्नदाता शिवकुमार, बलदेव, शिव प्रसाद, गिरजाशंकर, रामकुमार, समयदीन, रामजनक, प्रसादे, कल्लू, बहोरे व जगदंबा आदि ने बताया कि असिंचित इलाके में खेती सिर्फ भगवान भरोसे है। बीते कई दिनों से बरसात न होने से असिंचित क्षेत्र वाले खेतों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। सिंचित इलाकों में सिंचाई के साधन कम होने और डीजल की बढ़ी कीमतों से अन्नदाताओं को खेतों में पानी की इंतजाम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में तमाम नलकूप विद्युत व यांत्रिक कारणों के चलते खराब पड़े हैं। हार्ड एरिया में सिंचाई के साधन भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। बरसात न होने और सिंचाई के साधनों की कमी के चलते धान की रोपाई में देरी होने लगी है। सिंचित इलाकों के अन्नदाताओं ने प्रशासन से सिंचाई के साधनों को दुरुस्त कराने और डीजल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की मांग की है। जिले में तीन लाख से अधिक किसान धान की खेती करते हैं। जिल में करीब 90 हजार हेक्टअर क्षेत्रफल में धान के विभिन्न प्रजातियों की खेती की जाती है। जिले के लोग धान की खेती पर निर्भर हैं। धान की पैदावार प्रभावित होने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। समय पर बारिश न होने से अन्य फसलों जैसे मक्का, ज्वार, बाजारा, अरहर व उड़द आदि के बोआई में भी देरी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अंकित तिवारी ने बताया कि जिले में शीघ्र ही मानसून के सक्रिय होने की संभावना है।
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अन्नदाता मानसून आने की राह देख रहे हैं। बारिश न होने से किसानों को धान की रोपाई करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्नदाता शिवकुमार, बलदेव, शिव प्रसाद, गिरजाशंकर, रामकुमार, समयदीन, रामजनक, प्रसादे, कल्लू, बहोरे व जगदंबा आदि ने बताया कि असिंचित इलाके में खेती सिर्फ भगवान भरोसे है। बीते कई दिनों से बरसात न होने से असिंचित क्षेत्र वाले खेतों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। सिंचित इलाकों में सिंचाई के साधन कम होने और डीजल की बढ़ी कीमतों से अन्नदाताओं को खेतों में पानी की इंतजाम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में तमाम नलकूप विद्युत व यांत्रिक कारणों के चलते खराब पड़े हैं। हार्ड एरिया में सिंचाई के साधन भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। बरसात न होने और सिंचाई के साधनों की कमी के चलते धान की रोपाई में देरी होने लगी है। सिंचित इलाकों के अन्नदाताओं ने प्रशासन से सिंचाई के साधनों को दुरुस्त कराने और डीजल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की मांग की है। जिले में तीन लाख से अधिक किसान धान की खेती करते हैं। जिल में करीब 90 हजार हेक्टअर क्षेत्रफल में धान के विभिन्न प्रजातियों की खेती की जाती है। जिले के लोग धान की खेती पर निर्भर हैं। धान की पैदावार प्रभावित होने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। समय पर बारिश न होने से अन्य फसलों जैसे मक्का, ज्वार, बाजारा, अरहर व उड़द आदि के बोआई में भी देरी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अंकित तिवारी ने बताया कि जिले में शीघ्र ही मानसून के सक्रिय होने की संभावना है।
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