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Balrampur News: गिद्धहवा में बाघ की दहशत से प्रशासन अलर्ट, छानबीन तेज

Thu, 26 Feb 2026 10:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 10:54 PM IST
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Administration on alert due to tiger threat in Giddhawa, investigations intensified
बलरामपुर के परसरामपुर गिद्वहवा के पास जंगल में गश्त करती वन विभाग की टीम ।-संवाद
गैसड़ी। पचपेड़वा क्षेत्र के ग्राम परसरामपुर के मजरे गिद्धहवा में मंजू (25) की मौत के बाद अब वन विभाग ने हमले को बाघ से जोड़कर जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक पड़ताल में घटनास्थल के आसपास मिले पगचिह्न और हमले के तरीके को देखते हुए बाघ की संलिप्तता की आशंका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वन्यजीव विशेषज्ञों की राय के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
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यह इलाका भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा है और सोहेलवा वन्य जीव अभयारण्य के घने जंगलों के करीब बसा है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमा पार और जंगल के बीच बाघों की आवाजाही आम है। खेतों और गांव के बीच कोई मजबूत अवरोध न होने से खतरा बना रहता है।
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घटना के बाद गिद्धहवा और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। खेतों में काम करने वाली महिलाएं और किसान दहशत में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की परिधि में घेराबंदी (फेंसिंग) कराई जाए और हाई मास्ट लाइट लगाई जाए। बाघ की मौजूदगी पर अलर्ट देने के लिए सायरन/अलार्म सिस्टम स्थापित हो। गश्त बढ़ाई जाए और वनकर्मियों की स्थायी तैनाती हो। ग्राम प्रधान शेखर पांडेय समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई बार जंगली जानवरों की गतिविधियां देखी गईं, लेकिन ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
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सर्च ऑपरेशन जारी, ग्रामीणों को किया सतर्क
भांभर रेंज के क्षेत्राधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि टीम लगातार इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है। पगचिह्न, ड्रैग मार्क और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। खुलकर तो नहीं लेकिन जंगल में बाघ की मौजूदगी दबी जुबान से वन विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं। रेंजर का कहना है कि हर बिंदु की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यदि बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो ट्रैंकुलाइजिंग टीम और अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती की जाएगी। वन विभाग ने ग्रामीणों को अकेले खेतों में न जाने और समूह में काम करने की सलाह दी है।
टाइगर रिजर्व की कवायद को मिला बल

गिद्धहवा की घटना के बाद एक बार फिर सीमा से सटे जंगलों को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि क्षेत्र को औपचारिक रूप से संरक्षित दर्जा मिलता है तो वन्यजीवों की मॉनिटरिंग बेहतर होगी। बीते दिनों जंगल का सर्वे भी हुआ था, जिसमें तीन बाघ होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल अभी सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस घटना के बाद टाइगर रिजर्व की कवायद को बल मिला है। टाइगर रिजर्व के लिए संघर्ष कर रहे सर्वेश सिंह ने कहा कि मुहिम और तेज होगी।

वन्यजीवों का प्राकृतिक गलियारा संकरा हुआ
सीमा क्षेत्र में जंगल और गांवों की नजदीकी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञ एके सिंह ने बताया कि आबादी बढ़ने और खेतों के विस्तार से वन्यजीवों का प्राकृतिक गलियारा संकरा हुआ है। ऐसे में भोजन या क्षेत्र की तलाश में बाघ आबादी के करीब पहुंच जाते हैं।
मंजू की मौत ने इस संघर्ष को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब निगाहें वन विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हैं।
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