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Balrampur News: नियुक्ति में फर्जीवाड़े पर अनुदान वापसी की कार्रवाई
Wed, 13 May 2026 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 13 May 2026 11:11 PM IST
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बलरामपुर। तुलसीपुर स्थित मदरसा जामिया अनवारुल उलूम में कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन के समय हुई नियुक्तियों का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फर्जी शपथपत्र के आधार पर नियुक्ति दिए जाने के मामले में पहले से द एफआईआर है। इसी बीच बुधवार को शासन ने विवादित नियुक्ति के सापेक्ष जारी वित्तीय अनुदान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त सचिव दया शंकर ओझा ने मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को जिलाधिकारी की जांच आख्या के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। जांच में सामने आया कि मदरसा प्रबंधन ने मो. हसन रजा की मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति करने उनके फर्जी हस्ताक्षर का शपथ पत्र लगा दिया। जिसके आधार पर सहायक अध्यापक की जगह पर पहले 25 मई 2020 को कनिष्ठ लिपिक पद पर नियुक्त किया। इसके बाद एक अप्रैल 2021 को उन्हें सहायक अध्यापक तहतानिया पद पर नियुक्त कर दिया गया। परिषद कार्यालय की ओर से इन नियुक्तियों के आधार पर क्रमशः 19 जून 2020 और 15 जुलाई 2021 को वित्तीय अनुदान भी जारी कर दिया गया। जांच समिति ने नियुक्ति प्रक्रिया को नियमानुसार नहीं माना।
शासन ने अब सहायक अध्यापक पद पर दी गई नियुक्ति के सापेक्ष जारी वित्तीय अनुदान वापस लेने के निर्देश दिए हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डीएस मौर्या ने बताया कि फर्जीवाड़े की एफआईआर दिसंबर 2025 में दर्ज कराई जा चुकी है। मदरसा प्रबंधक अब्दुल कादरी बेसिक शिक्षा विभाग के एमडीएम घोटाले में पहले से ही जेल में बंद हैं।
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संयुक्त सचिव दया शंकर ओझा ने मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को जिलाधिकारी की जांच आख्या के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। जांच में सामने आया कि मदरसा प्रबंधन ने मो. हसन रजा की मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति करने उनके फर्जी हस्ताक्षर का शपथ पत्र लगा दिया। जिसके आधार पर सहायक अध्यापक की जगह पर पहले 25 मई 2020 को कनिष्ठ लिपिक पद पर नियुक्त किया। इसके बाद एक अप्रैल 2021 को उन्हें सहायक अध्यापक तहतानिया पद पर नियुक्त कर दिया गया। परिषद कार्यालय की ओर से इन नियुक्तियों के आधार पर क्रमशः 19 जून 2020 और 15 जुलाई 2021 को वित्तीय अनुदान भी जारी कर दिया गया। जांच समिति ने नियुक्ति प्रक्रिया को नियमानुसार नहीं माना।
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शासन ने अब सहायक अध्यापक पद पर दी गई नियुक्ति के सापेक्ष जारी वित्तीय अनुदान वापस लेने के निर्देश दिए हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डीएस मौर्या ने बताया कि फर्जीवाड़े की एफआईआर दिसंबर 2025 में दर्ज कराई जा चुकी है। मदरसा प्रबंधक अब्दुल कादरी बेसिक शिक्षा विभाग के एमडीएम घोटाले में पहले से ही जेल में बंद हैं।
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