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मनरेगा कार्यो के सुस्त रफ्तार से गांवों का विकास चौपट

Sun, 11 Jun 2017 11:52 PM IST
Updated Sun, 11 Jun 2017 11:52 PM IST
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मनरेगा कार्यो के सुस्त रफ्तार से गांवों का विकास चौपट
मनरेगा कार्यों के सुस्त रफ्तार से गांवों का विकास चौपट
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-जिले के नौ ब्लॉकों में ढाई माह में मात्र डेढ़ प्रतिशत हुए मनरेगा कार्य
- जिले के 801 ग्राम पंचायतों में 24 लाख मानव दिवस का टारगेट
-काम न मिलने पर शहरों की खाक छानने को मजबूर हैं मनरेगा श्रमिक
मंगल देव गिरि
बलरामपुर। जिले में मनरेेगा योजना परवान नहीं चढ़ रही है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दो माह में मात्र 1.9 फीसदी मानव दिवस का सृजन हो सका है। जिले में 12 महीनों में कुल 24 लाख मानव दिवस सृजित करने का टारगेट रखा गया है। मनरेगा योजना के लेबर बजट पर 59.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कछुआ गति से मनरेगा कार्य होने से जिले के श्रमिक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। काम की तलाश में मनरेगा श्रमिकों को शहरों की खाक छाननी पड़ रही है।
बता दें कि जिले में कुल 801 ग्राम पंचायतें हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में मनरेगा योजना पर 12 महीनों में लेबर बजट पर 59.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अप्रैल व मई माह 2017 में मात्र 45 हजार 121 मानव दिवस का सृजन हो सका है। निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए हर माह दो लाख मानव दिवस सृजित किया जाना अनिवार्य है। जिले में दो माह में मनरेगा योजना पर मात्र दो करोड़ 26 लाख तीन हजार रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए हैं। जिले के 722 ग्राम पंचायतों में अप्रैल व मई माह में अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ है जबकि बाकी बची 79 ग्राम पंचायतों में छिटपुट कार्य कराए जा रहे हैं। ग्राम प्रधानों का आरोप है कि मनरेगा योजना में झाम के चलते काम कराना संभव नहीं हो पा रहा है। एक काम कराने के लिए ग्राम प्रधानों को महीनों सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ रहा है। काम कराने के लिए सबसे पहले प्रस्ताव भेजना पड़ता है। प्रस्ताव पास होने में ही महीनों का समय बर्बाद हो जाता है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि नियम के झाम को दूर करने के बाद ही मनरेगा कार्य में प्रगति संभव हो सकेगी।
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श्रमिकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट
-जिले में कुल 1.63 लाख मनरेगा श्रमिकों का पंजीकरण है जिसके सापेक्ष 1.45 लाख श्रमिक मनरेगा योजना के काम पर निर्भर हैं। श्रमिक बदलू, ममता, संतराम, कमला, कनकलता व कावेरी आदि का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष में उन्हें अभी तक मनरेगा योजना से कोई काम नहीं मिला है। परिवार के भरण पोषण के लिए शहरों में काम की रोजाना तलाश करनी पड़ रही है।
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काम में तेजी लाने का दिया निर्देश
- मनरेेगा उपायुक्त बाल गोविन्द शुक्ला ने बताया कि जिले में मनरेगा काम में तेजी लाने के लिए बीडीओ, एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया है। वित्तीय वर्ष के अंत तक निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

हर माह हो रही मनरेगा कार्य की समीक्षा
-जिले के ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा योजना के कार्यों की हर माह समीक्षा की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में मनरेगा योजना के कार्य की प्रगति धीमी होने पर सभी बीडीओ से जवाब तलब किया गया है। संतोषजनक जवाब न देने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
राकेश कुमार मिश्र, डीएम बलरामपुर
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