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Balrampur News: बोर्ड परीक्षा कराएंगे 2154 शिक्षक, नहीं चलेगा बहाना
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बलरामपुर। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में 67 विद्यालयों को केंद्र बनाया गया है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 36,146 विद्यार्थियों की परीक्षा 24 फरवरी से शुरू हो रही है। परीक्षा कराने के लिए 2154 शिक्षकाें की ड्यूटी तय की गई है। ड्यूटी लगाए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, इसी के साथ ड्यूटी कटवाने वाले शिक्षकों ने भी दौड़ शुरू कर दी है।
बोर्ड ने कड़ी व्यवस्था बनाई है, जिससे ड्यूटी से बचना शिक्षकों के लिए अब आसान नहीं होगा। अब बीमारी का बहाना बनाकर कोई भी शिक्षक बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से छुटकारा नहीं पा सकेगा। छुट्टी के आवेदन के साथ शिक्षकों को सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) के पास से जारी मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा। बोर्ड के सचिव ने सभी सीएमओ को इसे लेकर पत्र भेजा है। इस निर्णय के बाद से शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में आम तौर पर सरकारी-अर्द्धसरकारी स्कूलों के पुराने शिक्षक ड्यूटी करने से बचना चाहते हैं। इसके लिए बीमारी का बहाना बनाकर अक्सर छुट्टी मार लेते हैं।
वहीं, प्राइवेट स्कूलों को केंद्र बनाया जाता है, तो स्कूल प्रबंधक भी नहीं चाहते कि पुराने शिक्षक ड्यूटी पर आएं। जुगाड़ पर कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी निर्धारित की जाती है, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार परीक्षा के पहले मेडिकल लीव के लिए आवेदन देने पर जांच-पड़ताल भी की जाएगी। इसके लिए शिक्षक या प्रधानाचार्य को चिकित्सकीय अवकाश के लिए डीआईओएस के पास आवेदन करना होगा। वहां से उन्हें स्वास्थ्य की पुष्टि के लिए सीएमओ के पास भेजा जाएगा। सीएमओ के स्तर से प्रमाणित होने के बाद ही मेडिकल लीव स्वीकृत होगी। डीआईओएस मृदुला आनंद ने कहा कि बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से बचने के लिए बहाने रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शिक्षकों की ड्यूटी तय करने की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है।
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बोर्ड ने कड़ी व्यवस्था बनाई है, जिससे ड्यूटी से बचना शिक्षकों के लिए अब आसान नहीं होगा। अब बीमारी का बहाना बनाकर कोई भी शिक्षक बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से छुटकारा नहीं पा सकेगा। छुट्टी के आवेदन के साथ शिक्षकों को सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) के पास से जारी मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा। बोर्ड के सचिव ने सभी सीएमओ को इसे लेकर पत्र भेजा है। इस निर्णय के बाद से शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में आम तौर पर सरकारी-अर्द्धसरकारी स्कूलों के पुराने शिक्षक ड्यूटी करने से बचना चाहते हैं। इसके लिए बीमारी का बहाना बनाकर अक्सर छुट्टी मार लेते हैं।
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वहीं, प्राइवेट स्कूलों को केंद्र बनाया जाता है, तो स्कूल प्रबंधक भी नहीं चाहते कि पुराने शिक्षक ड्यूटी पर आएं। जुगाड़ पर कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी निर्धारित की जाती है, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार परीक्षा के पहले मेडिकल लीव के लिए आवेदन देने पर जांच-पड़ताल भी की जाएगी। इसके लिए शिक्षक या प्रधानाचार्य को चिकित्सकीय अवकाश के लिए डीआईओएस के पास आवेदन करना होगा। वहां से उन्हें स्वास्थ्य की पुष्टि के लिए सीएमओ के पास भेजा जाएगा। सीएमओ के स्तर से प्रमाणित होने के बाद ही मेडिकल लीव स्वीकृत होगी। डीआईओएस मृदुला आनंद ने कहा कि बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से बचने के लिए बहाने रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शिक्षकों की ड्यूटी तय करने की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है।
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