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धन दौलत के पीछे दौड़ने के बजाए अल्लाह के बताए रास्ते पर चले लोग
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धन-दौलत के पीछे दौड़ने की जगह अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें लोग
बलरामपुर। सादुल्लाहनगर थाने के पास स्थित बाबा अब्दुल कुद्दूस शाह रहमत उल्ला अलैह की दरगाह पर दो दिवसीय उर्स का आयोजन किया गया। पहले दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ताजदारे मदीना कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी किया गया। इसमें इस्लामी आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दिलाया गया।
उर्स का शुभारंभ बुधवार को कुरानख्वानी के साथ हुआ। अस्र की नमाज के बाद अकीदतमंदों ने बाबा के मजार पर चादरपोशी की। शाम को ताजदारे मदीना कॉन्फ्रेंस की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई। मुख्य वक्ता व इस्लामी विद्वान मौलाना अब्दुल रहीम अशर्फी ने कहा कि कुरान व सुन्नत के अनुसार जीवनयापन करना चाहिए।
पैगम्बर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए। धन, दौलत व शोहरत के पीछे दौड़ने के बजाए शरीयत के अनुसार हमें अपना कार्य करना चाहिए। अन्य इस्लामी विद्वानों ने कहा कि शहीद-ए-मिल्लत ने शरीयत के अनुसार अल्लाह की रजा के लिए कार्य किया।
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उसी का नतीजा है कि उनके वफात के बाद भी आज हर धर्म के लोग उनकी मजार पर दुआ मांगने आते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कारी वसीम बेग व संचालन जावेद रजा ने किया। इस दौरान मारुफ अनवर हाशमी, मोहम्मद सिबतैन, तस्लीम रजा, इमरान, वाजिद, शोहरत अली आदि मौजूद रहे।
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बलरामपुर। सादुल्लाहनगर थाने के पास स्थित बाबा अब्दुल कुद्दूस शाह रहमत उल्ला अलैह की दरगाह पर दो दिवसीय उर्स का आयोजन किया गया। पहले दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ताजदारे मदीना कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी किया गया। इसमें इस्लामी आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दिलाया गया।
उर्स का शुभारंभ बुधवार को कुरानख्वानी के साथ हुआ। अस्र की नमाज के बाद अकीदतमंदों ने बाबा के मजार पर चादरपोशी की। शाम को ताजदारे मदीना कॉन्फ्रेंस की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई। मुख्य वक्ता व इस्लामी विद्वान मौलाना अब्दुल रहीम अशर्फी ने कहा कि कुरान व सुन्नत के अनुसार जीवनयापन करना चाहिए।
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पैगम्बर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए। धन, दौलत व शोहरत के पीछे दौड़ने के बजाए शरीयत के अनुसार हमें अपना कार्य करना चाहिए। अन्य इस्लामी विद्वानों ने कहा कि शहीद-ए-मिल्लत ने शरीयत के अनुसार अल्लाह की रजा के लिए कार्य किया।
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उसी का नतीजा है कि उनके वफात के बाद भी आज हर धर्म के लोग उनकी मजार पर दुआ मांगने आते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कारी वसीम बेग व संचालन जावेद रजा ने किया। इस दौरान मारुफ अनवर हाशमी, मोहम्मद सिबतैन, तस्लीम रजा, इमरान, वाजिद, शोहरत अली आदि मौजूद रहे।