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जल बचाओ जीवन बचाओ का दिया संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 22 Mar 2016 06:37 PM IST
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पानी की समस्या
- फोटो : demo
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जिला विकास अधिकारी जगत नरायण राय ने लोगों को जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया। कहा कि जल बचाओ-जीवन बचाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचे, ताकि लोग जल को बचाएं और उसका संरक्षण भी करें।
मंगलवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर विकास भवन सभागार में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत 16 से 22 मार्च तक नेशनल वाश अवेयरनेस वीक के अंतिम दिन आयोजित एक दिवसीय जनपद स्तरीय कार्यशाला में कहीं।
जिला विकास अधिकारी ने यह भी कहा कि जल संरक्षण औरजल बचाने के लिए जरूरी है कि पारंपरिक जलस्त्रोंतों को न पाटे, उसे पुनर्जीवित करें। उन्होंने कहा कि गांव-गांव, घर-घर शौचालय बने और उसका प्रयोग करें। पानी का उतना ही प्रयोग किया जाय जितनी आवश्यकता है।
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कहा रेनवाटर हार्वेस्टिंग योजना को अमल में लायी जाय। सहायक अभियंता जल निगम ने कहा कि जनपद में पानी की कोई कमी नहीं है किंतु बलिया में आर्सेनिक से काफी क्षेत्र प्रभावित है लोगों को आर्सेनिक से मुक्त कराने के लिए पाइप पेयजल योजना लागू की गयी है।
कहा कि भूजल का दोहन अधिक हो रहा है जो चिंता की बात है। यदि जल का बचाव और संरक्षण नही किया गया तो आने वाले दिनों में पानी की विकट स्थिति पैदा हो जायेगी। डॉ. अतुल तिवारी ने कहा कि बच्चों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार कराया जाय।
लोगों को यह भी बताया जाय कि आर्सेनिक आयरन के कारण अशुद्ध जल से निपटने के लिए क्या उपचार है। शौचालय का निर्माण हो और उसका उपयोग भी हो इस पर बल दिया।
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मंगलवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर विकास भवन सभागार में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत 16 से 22 मार्च तक नेशनल वाश अवेयरनेस वीक के अंतिम दिन आयोजित एक दिवसीय जनपद स्तरीय कार्यशाला में कहीं।
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जिला विकास अधिकारी ने यह भी कहा कि जल संरक्षण औरजल बचाने के लिए जरूरी है कि पारंपरिक जलस्त्रोंतों को न पाटे, उसे पुनर्जीवित करें। उन्होंने कहा कि गांव-गांव, घर-घर शौचालय बने और उसका प्रयोग करें। पानी का उतना ही प्रयोग किया जाय जितनी आवश्यकता है।
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कहा रेनवाटर हार्वेस्टिंग योजना को अमल में लायी जाय। सहायक अभियंता जल निगम ने कहा कि जनपद में पानी की कोई कमी नहीं है किंतु बलिया में आर्सेनिक से काफी क्षेत्र प्रभावित है लोगों को आर्सेनिक से मुक्त कराने के लिए पाइप पेयजल योजना लागू की गयी है।
कहा कि भूजल का दोहन अधिक हो रहा है जो चिंता की बात है। यदि जल का बचाव और संरक्षण नही किया गया तो आने वाले दिनों में पानी की विकट स्थिति पैदा हो जायेगी। डॉ. अतुल तिवारी ने कहा कि बच्चों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार कराया जाय।
लोगों को यह भी बताया जाय कि आर्सेनिक आयरन के कारण अशुद्ध जल से निपटने के लिए क्या उपचार है। शौचालय का निर्माण हो और उसका उपयोग भी हो इस पर बल दिया।