{"_id":"5e9b1c4e8ebc3e76876a3412","slug":"workers-returned-to-their-homes-if-they-were-fascinated-by-food-ballia-news-vns520927210","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोजन को मोहताज हुए तो घरों को लौटे मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोजन को मोहताज हुए तो घरों को लौटे मजदूर
विज्ञापन
गाजीपुर से पैदल चलकर सहरसा जाते हुए मजदूर चांददीयर के यादव नगर गांव के सामने आराम करते हुए।
- फोटो : BALLIA
जयप्रकाश नगर। लॉक डाउन 2.0 में कमाए गए पैसे खत्म होने के बाद जब भोजन को मोहताज होना पड़ा तो गाजीपुर, वाराणसी, झांसी, जयपुर में काम करने वाले मजदूर अपने घरों को लौटने को मजबूर हो गए। बिहार के विभिन्न जनपदों के मूल निवासी इन मजदूरों में कोई पैदल तो कोई साइकिल से अपने घरों को रवाना हो गया। बिहार के सहरसा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और पश्चिम बंगाल के मालदह के लिए रवाना हुए तीन टोलियों में शामिल करीब 34 मजदूरों ने शनिवार को अपनी व्यथा सुनाई।
बिहार के मधुबनी के भेजा थाना क्षेत्र के जोगिया गांव निवासी श्रमिक बिल्लू पासवान, प्रेम नाथ पासवान, भुवनेश्वर पासवान ,पवन पासवान, राजेश पासवान समेत 21 लोग वाराणसी में मजदूरी व राजमिस्त्री का कार्य करते थे। लॉकडाउन में काम भी बंद हो गया और भोजन के लाले पड़ गए तो वे घर को निकल पड़े। सहरसा के महषि गांव निवासी मनोहर कुमार सदा, अच्छे लाल सदा, प्रभु सदा, लालबाबू सदा, उमेश सदा, रंजीत सदा, दशरथ सदा, लालो साहब सदा, इंदल सदा आदि ने बताया कि हम गाजीपुर के कोल्ड स्टोर में कार्य करते थे। लॉकडाउन टू लागू होने के बाद मालिक ने व्यवस्था देने में असमर्थता जताई तो विवश होकर हमें पैदल ही घरों के लिए लौटना पड़ा।
मुजफ्फरपुर जनपद के बजरडीहा गांव निवासी पप्पू झा व इंद्रजीत झा राजस्थान के जयपुर में होटल में कार्य करते थे। मालिक ने निकाल दिया तो वे 13 अप्रैल को साइकिल से ही घर को निकल पड़े। इसी तरह पश्चिम बंगाल के मालदह जनपद के पुखुड़िया गांव निवासी शमीम अख्तर व असरफ हुल्लत ने बताया कि वे झांसी में मार्बल टाइल्स का काम करते थे और लॉकडाउन में वहां से भगा दिया गया। इसके चलते वह साइकिल से ही घर को चल दिए। मजदूरों ने बताया कि रास्ते में बलिया के समीप हम लोगों को एक व्यक्ति ने खीरा व गाजर दिया। इससे पहले वे बिस्किट खरीदकर खाते आ रहे थे। बताया कि सीमावर्ती गांव में पुलिस व चांददीयर के प्रधान ने चूड़ा गुड़ भर पेट खाने के लिए देते हुए रास्ते के लिए भी पैकेट दिया।
विज्ञापन
साइकिल खरीद भदोही से घर को निकले दिहाड़ी मजदूर
रामगढ़। लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी दिहाड़ी मजदूरों का पलायन नहीं रुक रहा है। शनिवार को भदोही में दिहाड़ी मजदूर का काम कर रहे बिहार के दरभंगा और मधुबनी के मजदूर काम धंधा बंद होने के कारण और साधनाभाव से सात मजदूरों ने पांच साइकिल खरीद कर अपने घर के लिए निकल पड़े थे। एक साथ काम कर रहे सभी मजदूरों ने निर्णय लिया कि अब घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है इसलिए सभी मजदूरों ने एक साथ मिलकर पांच साइकिल खरीद भदोही से घर को चल दिए।
विज्ञापन
बिहार के मधुबनी के भेजा थाना क्षेत्र के जोगिया गांव निवासी श्रमिक बिल्लू पासवान, प्रेम नाथ पासवान, भुवनेश्वर पासवान ,पवन पासवान, राजेश पासवान समेत 21 लोग वाराणसी में मजदूरी व राजमिस्त्री का कार्य करते थे। लॉकडाउन में काम भी बंद हो गया और भोजन के लाले पड़ गए तो वे घर को निकल पड़े। सहरसा के महषि गांव निवासी मनोहर कुमार सदा, अच्छे लाल सदा, प्रभु सदा, लालबाबू सदा, उमेश सदा, रंजीत सदा, दशरथ सदा, लालो साहब सदा, इंदल सदा आदि ने बताया कि हम गाजीपुर के कोल्ड स्टोर में कार्य करते थे। लॉकडाउन टू लागू होने के बाद मालिक ने व्यवस्था देने में असमर्थता जताई तो विवश होकर हमें पैदल ही घरों के लिए लौटना पड़ा।
विज्ञापन
मुजफ्फरपुर जनपद के बजरडीहा गांव निवासी पप्पू झा व इंद्रजीत झा राजस्थान के जयपुर में होटल में कार्य करते थे। मालिक ने निकाल दिया तो वे 13 अप्रैल को साइकिल से ही घर को निकल पड़े। इसी तरह पश्चिम बंगाल के मालदह जनपद के पुखुड़िया गांव निवासी शमीम अख्तर व असरफ हुल्लत ने बताया कि वे झांसी में मार्बल टाइल्स का काम करते थे और लॉकडाउन में वहां से भगा दिया गया। इसके चलते वह साइकिल से ही घर को चल दिए। मजदूरों ने बताया कि रास्ते में बलिया के समीप हम लोगों को एक व्यक्ति ने खीरा व गाजर दिया। इससे पहले वे बिस्किट खरीदकर खाते आ रहे थे। बताया कि सीमावर्ती गांव में पुलिस व चांददीयर के प्रधान ने चूड़ा गुड़ भर पेट खाने के लिए देते हुए रास्ते के लिए भी पैकेट दिया।
विज्ञापन
साइकिल खरीद भदोही से घर को निकले दिहाड़ी मजदूर
रामगढ़। लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी दिहाड़ी मजदूरों का पलायन नहीं रुक रहा है। शनिवार को भदोही में दिहाड़ी मजदूर का काम कर रहे बिहार के दरभंगा और मधुबनी के मजदूर काम धंधा बंद होने के कारण और साधनाभाव से सात मजदूरों ने पांच साइकिल खरीद कर अपने घर के लिए निकल पड़े थे। एक साथ काम कर रहे सभी मजदूरों ने निर्णय लिया कि अब घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है इसलिए सभी मजदूरों ने एक साथ मिलकर पांच साइकिल खरीद भदोही से घर को चल दिए।