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Ballia News: बैरिया-आरा फोरलेन बाईपास परियोजना का काम जल्द, 2426 करोड़ होंगे खर्च
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जयप्रकाश नगर। उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली बैरिया-आरा 4 लेन बाईपास परियोजना अब महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके निर्माण के लिए 1564.19 करोड़ रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) की निविदा जारी की है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2426 करोड़ रुपये है, जो मूल्य वृद्धि के साथ 2800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह 27.062 किलोमीटर लंबा बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जोड़ेगा। इसका निर्माण ईपीसी मोड पर कराया जाएगा। ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 20 अगस्त है, जबकि तकनीकी और वित्तीय बोलियां 21 अगस्त को खोली जाएंगी। वर्षों से प्रतीक्षित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
सफल एजेंसी के चयन के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, जिसकी अवधि चार वर्ष तय की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की होगी। भूमि अधिग्रहण के लिए 900 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जो बलिया और आरा जिलों में किया जाएगा।
एनएचएआई, गाजीपुर के इंजीनियर अजय सिंह ने बताया कि टेंडर मुख्यालय से ही होगा। दूसरे चरण की योजना : भाजपा के पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दूसरे चरण की योजना बताई। बैरिया से आरा तक फोरलेन सड़क व पुल परियोजना का जमीन अधिग्रहण हो गया है। इसका टेंडर नोटिस और एलाइनमेंट भी स्वीकृत है। पहले चरण में कर्ण छपरा से आरा हाईवे तक फोरलेन सड़क बनेगी। दूसरे चरण में सिवान के जिरादेई तक चार लेन की सड़क व सरयू नदी पर पुल का निर्माण होगा। यह सड़क डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गांव जिरादेई से जुड़ेगी। दूसरे चरण का डीपीआर जल्द बनेगा।
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परियोजना की स्वीकृति और प्रयास
बलिया और बिहार के आरा को जोड़ने वाली इस फोरलेन सड़क व महुली घाट पर गंगा पुल परियोजना को मंजूरी मिली है। उपसभापति हरिवंश और सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के वर्षों के प्रयासों से यह परियोजना मंजूर हुई। वर्ष 2023 में दयासागर यादव और सुरेंद्र सिंह सहित कई लोगों ने हरिवंश को पत्र भेजा था। हरिवंश ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राजकुमार सिंह से स्वीकृति का अनुरोध किया। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने आश्वासन दिया था, और इसे 3 जुलाई 2026 को औपचारिक स्वीकृति मिली।
शासन से आरा-बलिया जोड़ने वाले सेतु व राजमार्ग निर्माण की प्रक्रिया शासन स्तर से चल रही है। टेंडर मुख्यालय से ही होना है। टेंडर होने के बाद कार्य शुरू होगा। - इं. अजय सिंह, एनएचएआई, गाजीपुर
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके निर्माण के लिए 1564.19 करोड़ रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) की निविदा जारी की है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2426 करोड़ रुपये है, जो मूल्य वृद्धि के साथ 2800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह 27.062 किलोमीटर लंबा बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जोड़ेगा। इसका निर्माण ईपीसी मोड पर कराया जाएगा। ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 20 अगस्त है, जबकि तकनीकी और वित्तीय बोलियां 21 अगस्त को खोली जाएंगी। वर्षों से प्रतीक्षित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
सफल एजेंसी के चयन के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, जिसकी अवधि चार वर्ष तय की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की होगी। भूमि अधिग्रहण के लिए 900 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जो बलिया और आरा जिलों में किया जाएगा।
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एनएचएआई, गाजीपुर के इंजीनियर अजय सिंह ने बताया कि टेंडर मुख्यालय से ही होगा। दूसरे चरण की योजना : भाजपा के पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दूसरे चरण की योजना बताई। बैरिया से आरा तक फोरलेन सड़क व पुल परियोजना का जमीन अधिग्रहण हो गया है। इसका टेंडर नोटिस और एलाइनमेंट भी स्वीकृत है। पहले चरण में कर्ण छपरा से आरा हाईवे तक फोरलेन सड़क बनेगी। दूसरे चरण में सिवान के जिरादेई तक चार लेन की सड़क व सरयू नदी पर पुल का निर्माण होगा। यह सड़क डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गांव जिरादेई से जुड़ेगी। दूसरे चरण का डीपीआर जल्द बनेगा।
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परियोजना की स्वीकृति और प्रयास
बलिया और बिहार के आरा को जोड़ने वाली इस फोरलेन सड़क व महुली घाट पर गंगा पुल परियोजना को मंजूरी मिली है। उपसभापति हरिवंश और सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के वर्षों के प्रयासों से यह परियोजना मंजूर हुई। वर्ष 2023 में दयासागर यादव और सुरेंद्र सिंह सहित कई लोगों ने हरिवंश को पत्र भेजा था। हरिवंश ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राजकुमार सिंह से स्वीकृति का अनुरोध किया। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने आश्वासन दिया था, और इसे 3 जुलाई 2026 को औपचारिक स्वीकृति मिली।
शासन से आरा-बलिया जोड़ने वाले सेतु व राजमार्ग निर्माण की प्रक्रिया शासन स्तर से चल रही है। टेंडर मुख्यालय से ही होना है। टेंडर होने के बाद कार्य शुरू होगा। - इं. अजय सिंह, एनएचएआई, गाजीपुर