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महिलाओं ने किया प्रदर्शन, लौटे पुलिसकर्मी
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बैरिया। गंगा की कटान से बेघर हुए पीड़ितों को आवंटित भूमि पर कब्जा दिलाने रविवार को बलिहार मौजे में पहुंचे तहसील प्रशासन और पुलिस टीम को लौटना पड़ा। तहसील प्रशासन और पुलिस की टीम के सामने ने महिलाओं ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया जिससे बगैर कार्रवाई किए टीम को लौटना पड़ा। इससे पहले 15 जुलाई को जब पीड़ितों को कब्जा दिलाने का प्रयास किया तो प्रभावशाली लोगों के विरोध के चलते पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए थे।
वर्ष 2016 में गंगा नदी के कटान में चौबे छपरा रामगढ़ निवासी हृदयनंद मिश्रा, अमरनाथ मिश्र और मंजू देवी पत्नी स्वर्गीय शशिकांत मिश्र का घर गंगा नदी में विलीन हो गए थे। कटान पीड़ितों ने बसने के लिए हल्दी थाना क्षेत्र के बलिहार मौजे के आराजी नंबर 349 में भूमि 2017 में बैनामा कराई गई थी। जमीन पर बसने के लिए कटान पीड़ित कब्जा करने गए तो दबंगों ने विरोध कर दिया। विधायक सुरेंद्र सिंह ने अपनी उपस्थिति में पैमाइश कराई। बावजूद दबंगों ने जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया। भूमि के चिन्हांकन के लिए पीड़ितों ने उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया। पैमाइश के आदेश होने पर 28 मार्च को तहसीलदार शिवसागर दुबे ने चिह्नांकन कर दिया गया । बावजूद दबंगों ने लाठी-डंडे के बल पर कब्जा करने से रोक दिया गया। इसके बाद पीड़ितों में एक ने तहसील प्रांगण में आत्मदाह की कोशिश की। 14 जुलाई को मौके पर फिर पहुंची टीम ने जमीन पर कब्जा दिला दिया। जमीन घेरने का काम शुरू हुआ तो ईंट पत्थर चलाकर मजदूरों को भगा दिया गया। रविवार को जब तहसीलदार शिवसागर दुबे के नेतृत्व में तहसील प्रशासन की टीम कब्जा दिलाने पहुंची तो महिलाओं ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन टीम को लौटने पर मजबूर कर दिया। तहसीलदार बैरिया शिवसागर दुबे ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर पैमाइश के बाद कब्जा दिलाने बलिहार गया था। वहां महिलाओं की निर्लज्ज प्रदर्शन देख कर लौटना पड़ा। इसकी रिपोर्ट एसडीएम और डीएम को दी जाएगी।-
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वर्ष 2016 में गंगा नदी के कटान में चौबे छपरा रामगढ़ निवासी हृदयनंद मिश्रा, अमरनाथ मिश्र और मंजू देवी पत्नी स्वर्गीय शशिकांत मिश्र का घर गंगा नदी में विलीन हो गए थे। कटान पीड़ितों ने बसने के लिए हल्दी थाना क्षेत्र के बलिहार मौजे के आराजी नंबर 349 में भूमि 2017 में बैनामा कराई गई थी। जमीन पर बसने के लिए कटान पीड़ित कब्जा करने गए तो दबंगों ने विरोध कर दिया। विधायक सुरेंद्र सिंह ने अपनी उपस्थिति में पैमाइश कराई। बावजूद दबंगों ने जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया। भूमि के चिन्हांकन के लिए पीड़ितों ने उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया। पैमाइश के आदेश होने पर 28 मार्च को तहसीलदार शिवसागर दुबे ने चिह्नांकन कर दिया गया । बावजूद दबंगों ने लाठी-डंडे के बल पर कब्जा करने से रोक दिया गया। इसके बाद पीड़ितों में एक ने तहसील प्रांगण में आत्मदाह की कोशिश की। 14 जुलाई को मौके पर फिर पहुंची टीम ने जमीन पर कब्जा दिला दिया। जमीन घेरने का काम शुरू हुआ तो ईंट पत्थर चलाकर मजदूरों को भगा दिया गया। रविवार को जब तहसीलदार शिवसागर दुबे के नेतृत्व में तहसील प्रशासन की टीम कब्जा दिलाने पहुंची तो महिलाओं ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन टीम को लौटने पर मजबूर कर दिया। तहसीलदार बैरिया शिवसागर दुबे ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर पैमाइश के बाद कब्जा दिलाने बलिहार गया था। वहां महिलाओं की निर्लज्ज प्रदर्शन देख कर लौटना पड़ा। इसकी रिपोर्ट एसडीएम और डीएम को दी जाएगी।-
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