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कागजी मड़कजाल में फंसा गेहूं खरीद
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बलिया। इस साल गेहूं खरीद पूरी तरह कागजी मकड़जाल में फंसकर रह गया है। किसान कागजी कोरम पूरा करने के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। अधिकांश क्रय केंद्रों पर एक पखवारा बाद भी बोहनी नहीं हो सकी है। जिले में कुल 71 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं लेकिन 49 क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, कुल 17708 किसानों ने पंजीकरण कराया है लेकिन 10635 किसानों का ही सत्यापन हो सका है। महज 2835 किसानों को ही टोकन जारी किया गया है। इसमें भी केवल 82 टोकन वाले और 13 बिना टोकन वाले किसानों से खरीद हो सकी है।
किसानों को अनाज का माकूल मूल्य दिलाने को लेकर शासन के निर्देश पर जिले में कुल 71 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें मार्केटिंग विभाग के 25, पीसीएफ के 40, मंडी समिति के 4 और एफसीआई के दो क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं। जिला विपणन अधिकारी की माने तो एक अप्रैल से निर्धारित किए गए सभी क्रय केंद्रों का संचालन शुरू है लेकिन धरातल पर अधिकांश इलाकों में अभी तक क्रय केंद्र या तो खुले ही नहीं हैं या फिर खरीद नहीं हो रही है। इसके चलते, किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पंजीकरण के बाद सत्यापन के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की परिक्रमा करनी पड़ रही है।
एक मात्र केंद्र पर ही खरीद, किसान बिचौलिए को गेहूं बेचने को मजबूर
नगरा। सरकार पहली अप्रैल से ही गेहूं खरीद करने का निर्देश दे चुकी है। क्रय केंद्र भी बना दिए गए हैं लेकिन क्षेत्र में एक केंद्र को छोड़कर अभी तक किसी केंद्र पर गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हुई है। खरीद शुरू न होने से किसान अपनी उपज बिचौलियों को बेचने का मन बना रहे हैं, क्योंकि बिचौलियों ने किसानों का चक्कर लगाना भी शुरू कर दिया है। किसानों की माने तो यह हर साल का हाल है। क्रय केंद्र जानबूझकर लेट शुरू किए जाते हैं ताकि किसान बिचौलियों के हाथ औने पौने दाम में अपनी फसल बेच दें। विकास खंड नगरा में नगरा, कमरौली, डिहवा, खारी, सिकंदरापुर, जुड़नपुर और लहसनी आदि गांवों में कुल आठ क्रय केंद्र खाद्य विभाग, सहकारी समिति और पीसीएफ के बनाए गए हैं लेकिन इन केंद्रों पर शासन के निर्देशों का कोई असर नहीं है। विपणन को छोड़कर अभी तक किसी केंद्र पर गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हुई है। मौसम में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसान जल्दी अपनी उपज को बेचना चाहता है। किसी को बेटे-बेटियों के हाथ पीले करने हैं तो किसी को घर बनवाना है। ऐसे में गेहूं खरीद न होने से मायूस किसान अपनी उपज बिचौलियों को बेचने का मन बना रहे हैं। विपणन निरीक्षक नगरा दानिश खान ने बताया कि विपणन केंद्र पर खरीदारी शुरू हो गई है। क्षेत्र के किसान मानक के अनुसार, अपना गेहूं लाकर बेच सकते हैं। बताया कि अभी तक 400 क्विंटल गेहूं खरीद की जा चुकी है।
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किसान नेता लाल बहादुर चौधरी ने बताया कि किसानों के सामने गेहूं की बिक्री करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया सबसे अधिक परेशान करने वाली है। ऑनलाइन पंजीकरण न होने से किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। बताया कि क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद ना होने से भी किसानों को परेशानी झेलना पड़ रहा है। किसान रामप्रवेश सिंह ने बताया कि क्रय केंद्रों का सुचारू रूप से संचालन न होने से किसान अपनी उपज को बिचौलियों के हाथों बेचने पर मजबूर हैं। किसानों को अपने बेटे-बेटियों की शादी और फसल बुवाई के लिए लिए कर्ज की अदायगी का दबाव है। इसलिए किसान जल्दी अपनी उपज बेचकर पैसा खाली करना चाहता है।
खरीद शुरू होने से किसानों को मिली राहत
रेवती। विपणन निरीक्षक की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी लग जाने के कारण गेहूं की खरीद पर प्रश्न चिह्न लगा हुआ था। इस बात को लेकर किसान अपने गेहूं को लेकर काफी चिंतित थे। हालांकि विपणन निरीक्षक की ड्यूटी कटने के बाद गोदाम पर गेहूं खरीद का कार्य प्रारंभ हो गया। इससे किसानों को राहत मिली है। विपणन निरीक्षक रामगोपाल यादव ने बताया कि गेहूं खरीद का काम शुरू हो गया है। नंबर के अनुसार, किसान आते जाएंगे और खरीद होती जाएगी। कुसौरी कला के किसान यशवंत सिंह ने कहा कि हमेशा से हम इस क्रय केंद्र पर अपना अनाज लाकर बेचते रहे हैं। पहले भीड़ की वजह से नंबर में इधर-उधर हो जाया करता था लेकिन इस वर्ष राहत है। कुसौरी कला के ही किसान पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि इस बार थोड़ी देर अवश्य हुई लेकिन जब से खरीद का काम शुरू हुआ है तब से खरीद निरंतर चल रही है।
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किसानों को अनाज का माकूल मूल्य दिलाने को लेकर शासन के निर्देश पर जिले में कुल 71 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें मार्केटिंग विभाग के 25, पीसीएफ के 40, मंडी समिति के 4 और एफसीआई के दो क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं। जिला विपणन अधिकारी की माने तो एक अप्रैल से निर्धारित किए गए सभी क्रय केंद्रों का संचालन शुरू है लेकिन धरातल पर अधिकांश इलाकों में अभी तक क्रय केंद्र या तो खुले ही नहीं हैं या फिर खरीद नहीं हो रही है। इसके चलते, किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पंजीकरण के बाद सत्यापन के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की परिक्रमा करनी पड़ रही है।
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एक मात्र केंद्र पर ही खरीद, किसान बिचौलिए को गेहूं बेचने को मजबूर
नगरा। सरकार पहली अप्रैल से ही गेहूं खरीद करने का निर्देश दे चुकी है। क्रय केंद्र भी बना दिए गए हैं लेकिन क्षेत्र में एक केंद्र को छोड़कर अभी तक किसी केंद्र पर गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हुई है। खरीद शुरू न होने से किसान अपनी उपज बिचौलियों को बेचने का मन बना रहे हैं, क्योंकि बिचौलियों ने किसानों का चक्कर लगाना भी शुरू कर दिया है। किसानों की माने तो यह हर साल का हाल है। क्रय केंद्र जानबूझकर लेट शुरू किए जाते हैं ताकि किसान बिचौलियों के हाथ औने पौने दाम में अपनी फसल बेच दें। विकास खंड नगरा में नगरा, कमरौली, डिहवा, खारी, सिकंदरापुर, जुड़नपुर और लहसनी आदि गांवों में कुल आठ क्रय केंद्र खाद्य विभाग, सहकारी समिति और पीसीएफ के बनाए गए हैं लेकिन इन केंद्रों पर शासन के निर्देशों का कोई असर नहीं है। विपणन को छोड़कर अभी तक किसी केंद्र पर गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हुई है। मौसम में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसान जल्दी अपनी उपज को बेचना चाहता है। किसी को बेटे-बेटियों के हाथ पीले करने हैं तो किसी को घर बनवाना है। ऐसे में गेहूं खरीद न होने से मायूस किसान अपनी उपज बिचौलियों को बेचने का मन बना रहे हैं। विपणन निरीक्षक नगरा दानिश खान ने बताया कि विपणन केंद्र पर खरीदारी शुरू हो गई है। क्षेत्र के किसान मानक के अनुसार, अपना गेहूं लाकर बेच सकते हैं। बताया कि अभी तक 400 क्विंटल गेहूं खरीद की जा चुकी है।
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किसान नेता लाल बहादुर चौधरी ने बताया कि किसानों के सामने गेहूं की बिक्री करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया सबसे अधिक परेशान करने वाली है। ऑनलाइन पंजीकरण न होने से किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। बताया कि क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद ना होने से भी किसानों को परेशानी झेलना पड़ रहा है। किसान रामप्रवेश सिंह ने बताया कि क्रय केंद्रों का सुचारू रूप से संचालन न होने से किसान अपनी उपज को बिचौलियों के हाथों बेचने पर मजबूर हैं। किसानों को अपने बेटे-बेटियों की शादी और फसल बुवाई के लिए लिए कर्ज की अदायगी का दबाव है। इसलिए किसान जल्दी अपनी उपज बेचकर पैसा खाली करना चाहता है।
खरीद शुरू होने से किसानों को मिली राहत
रेवती। विपणन निरीक्षक की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी लग जाने के कारण गेहूं की खरीद पर प्रश्न चिह्न लगा हुआ था। इस बात को लेकर किसान अपने गेहूं को लेकर काफी चिंतित थे। हालांकि विपणन निरीक्षक की ड्यूटी कटने के बाद गोदाम पर गेहूं खरीद का कार्य प्रारंभ हो गया। इससे किसानों को राहत मिली है। विपणन निरीक्षक रामगोपाल यादव ने बताया कि गेहूं खरीद का काम शुरू हो गया है। नंबर के अनुसार, किसान आते जाएंगे और खरीद होती जाएगी। कुसौरी कला के किसान यशवंत सिंह ने कहा कि हमेशा से हम इस क्रय केंद्र पर अपना अनाज लाकर बेचते रहे हैं। पहले भीड़ की वजह से नंबर में इधर-उधर हो जाया करता था लेकिन इस वर्ष राहत है। कुसौरी कला के ही किसान पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि इस बार थोड़ी देर अवश्य हुई लेकिन जब से खरीद का काम शुरू हुआ है तब से खरीद निरंतर चल रही है।