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हमें अपने जड़ को, अपनी संस्कृति को, अपने परिवेश को कभी नहीं छोड़ना चाहिए

Wed, 30 Mar 2022 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 11:00 PM IST
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We should never leave our roots, our culture, our surroundings
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के सभागार में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा आयोजित सात दिवसीय सेवारत शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर कल्पलता पांडेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ‘भारतीय भाषा के संवर्द्धन अर्थात प्रमोशन ऑफ इंडियन लैंग्वेज’ पर अपना व्याख्यान दिया।
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प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि भारत में वह सब कुछ है जिसकी अन्य देश अपेक्षा करते हैं। भारत का शाब्दिक अर्थ ही है स्वयं ही प्रकाश की ओर बढ़ने वाला।
उन्होंने मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से लेकर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप को स्पष्ट किया। प्रत्येक व्यक्ति अलग होता है सबकी अपनी मौलिकता है जिसको पहचानना, विकसित करना और समाज में उसके अनुरूप वातावरण देना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य है। हमेेें अपने जड़ को, अपनी संस्कृति को, अपने परिवेश को कभी नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि यही वैयक्तिक, सामाजिक, एवं राष्ट्रीय विकास का आधार भी है और जिसका समर्थन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 करती है। शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था का हृदय बताते हुए प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि शिक्षक भिज्ञ रहे अथवा अनभिज्ञ वह कई छात्र-छात्राओं का रोल मॉडल होता है।बताया कि मौलिक विचार मातृ भाषा में ही अधिकतर आते हैं और संपर्क भाषा, क्षेत्रीय भाषा आदि शिक्षा के क्षेत्र में भी सर्वोत्तम आगत को प्रोत्साहन देते हैं। भाषा अधिगम के साथ ही संस्कृति के हस्तांतरण का प्रमुख माध्यम हैं जो छात्र को शिक्षा व संस्कृति से जोड़ भी सकती है व विमुख भी कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय भाषा/ घरेलू भाषा को आदि को शिक्षा के माध्यम के रूप में, अर्थात् भारतीय भाषाओं के संवर्द्धन एवं विकास को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रमुख स्थान दिया गया है। संस्कृत को भी मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयत्न किया गया है। लेकिन यह ध्यान रखा गया है कि इसे छात्रों पर थोपा नहीं जाएगा। अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाओं को एक विषय के रूप में सम्मिलित करने का प्रावधान है।
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द्वितीय एवं तृतीय सत्र में श्री मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज से जंतु विज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ. अनिल कुमार ने कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ‘ प्रिपरेशन एंड प्रिजेन्टेशन ऑफ गूगल फॉर्म, गूगल स्लाइड, एंड जनरेशन ऑफ ऑनलाइन ई-सर्टिफिकेट’ शीर्षक पर गतिविधि आधारित व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में डॉ फिरोज खान, डॉ भाग्यवंती चौहान, रंजीत कुमार पांडेय, डॉ शकुंतला श्रीवास्तव, सुश्री नीति कुशवाहा, आदि रहे। कार्यशाला का आयोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के समन्वयक डॉ. रमा कांत सिंह ने व संचालन डॉ. राघवेंद्र पांडेय ने किया।
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