{"_id":"6116a5178ebc3ee0204a66a7","slug":"water-rises-on-nh-31-five-houses-merge-in-gang-ballia-news-vns605934250","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनएच-31 पर चढ़ा पानी, पांच मकान गंगा में समाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनएच-31 पर चढ़ा पानी, पांच मकान गंगा में समाएं
विज्ञापन
नरही क्षेत्र के बैरिया में एनएच-31 के ऊपर से बह रहा गंगा नदी के बाढ़ का पानी तथा उससे होकर गुजर रहे ब?
- फोटो : BALLIA
रामगढ़/दया छपरा/बैरिया/नरहीं। जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ बिंदु के नजदीक आ रहा है, नदी की धारा भयावह रूप लेती जा रही हैं। हाई फ्लड लेवल से 21 सेमी नीचे बह रहा गंगा का पानी एनएच-31 पर चढ़ गया है। उदय छपरा में शुक्रवार को कुल तीन मकान गंगा की लहरों में समा गए। काली मंदिर के पास नीम का पेड़ गंगा में समा गया। मंदिर भी खतरे की जद में है। वहीं, अवशेष बचा दूबे छपरा रिंगबांध 10 मीटर तक कटकर नदी में समा गया। दो अन्य स्थानों पर दो मकान नदी में समा गए। स्थिति देख बाढ़ पीड़ितों दहशत का आलम बना है।
बैरिया-सोहांव में एनएच पर बहने लगा पानी
शुक्रवार सुबह से बैरिया और सोहांव में बाढ़ का पानी एनएच-31 के ऊपर से बहने लगा है। गड़हांचल की 50 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित हैं। तीन दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बड़का खेत के 200 घर गांव के बाहर है, जहां चारों तरफ से सड़क हैं। गुरुवार की रात इसमें पानी भर गया। उधर, बैरिया तहसील के केहरपुर निवासी शिवजी सिंह का मकान गंगा की लहरों में समा गया। उदय छपरा में नागा उपाध्याय, सुनील उपाध्याय तथा राजेंद्र और वीरेंद्र चौधरी के तीन मकान भी नदी में समा गए। सदर तहसील के चौबे छपरा निवासी लक्ष्मण ओझा का मकान भी गंगा की लहरों में बह गया। गंगा की उत्पाती लहरें उदय छपरा में काली मंदिर को अपने आगोश में लेने को आतुर हैं। पास स्थित नीम का पेड़ नदी में समा चुका है। अवशेष बचे दुबे छपरा रिंग बंधे पर भी लहरों ने अपना खंजर चलाना शुरू कर दिया। 10 मीटर तक बांध कट चुका है। बाढ़ विभाग मिट्टी भरी बोरियों और बांस बल्ली से बने बंबू क्रेट का प्रयोग कर शेष बचे रिंग बंधे को बचाने में जुट है। गोपालपुर कन्हई ब्रम्हस्थान के पास और उदय छपरा में अध्यापक मदन उपाध्याय के घर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। गंगा का पानी एनएच-31 के सुघर छपरा ढाला, लार्ड कृष्ण विद्यालय के सामने व दुबेछपरा चिमनी के सामने के साथ ही पीएन इंटर कालेज दुबेछपरा के सामने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चार दशकों से गंगा की लहरें किसी न किसी गांव का अस्तित्व मिटाकर नई इबारत लिख रही हैं। हर साल बाढ़ और कटान रोकने के नाम पर बाढ़ विभाग अरबों रुपए पानी में बहा देता। फिर भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कटान रोकने के नाम पर 34 करोड़ की परियोजना बनाई गई। 30 करोड़ की लागत से ड्रेजिंग शुरू हुआ। इन कार्यों से कोई लाभ दिखता नहीं नजर आ रहा है। बाढ़ विभाग और ठेकेदार मालामाल जरूर हो गए।
थाने में पानी, स्टाफ सड़क पर
दुबहर। थाने में पानी घुसने से स्टाफ एनएच-31 पर सड़क के किनारे टेंट लगाकर आवश्यक कागजात और हथियार के साथ बैठे हुए हैं। कई घरों में पानी घुसने से लोग एनएच पर ही शरण लिए हुए हैं। गंगा नदी में आई बाढ़ अभी थमने का नाम नहीं ले रही है । स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से बाढ़ पीड़ितों को कुछ राहत सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन उनके सामने रहने के लिए तिरपाल और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था आवश्यक है। जिला प्रशासन से भूसा उपलब्ध कराया गया है लेकिन वह काफी कम है।
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालयों में दो से पांच फीट पानी
नरहीं। प्राथमिक विद्यालयों में दो से पांच फिट पानी लगा है। कर्णपुरा, गोविन्दपुर, लक्ष्मणपुर, बड़का खेत, गंगहरा, रैया खाड़ी, उमरपुर दियारे, शाहपुर बभनौली, इच्छा चौबे का पूरा, कोट, अंजोरपुर, नरहीं नंबर दो, कुल्हड़िया, बेल्सीपार सहित दर्जनों विद्यालय पानी में डूबे हुए हैं। प्रधानाध्यापक अखिलेश राय ने बताया कि पास में ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
सरयू के तेवर भी दिख रहे गरम, कटान का खतरा
बैरिया। तहसील के उत्तर से बहने वाली सरजू नदी का तेवर अभी भी गरम है। वहीं दक्षिणी छोर पर बहने वाली गंगा नदी का तेवर नरम हो सकती है। चांदपुर हेड पर सरजू नदी का जलस्तर शुक्रवार को 58.30 मीटर दर्ज किया गया। यहां से 1.5 सेंटीमीटर प्रति घंटा की दर से बढ़ाव है। चांदपुर में वर्ष 1984 में हाईफ्लड लेवल 60.240 मीटर दर्ज किया गया था। दोनों नदियां अपने घटाव पर जाती हैं तो खतरा और भी बढ़ेगा। उतरती लहरों के समय में भी कटान होता है। दुबे छपरा केहरपुर, गोपालपुर, पांडेयपुर, वंशगोपाल छपरा, मिश्र के मठिया, हाता, बुधनचक, दयाछपरा टाडी, प्रसाद छपरा आदि गांवों के लोग एनएच-31 या रिश्तेदारों के यहा शरण लिए हैं। कुछ ने छतों पर डेरा डाल रखा है। सरयू नदी की बाढ़ से गोपालनगर, वशिष्ठनगर, मानगढ़, शिवाल के लोग घिरे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि बाढ़ विभाग के अधिकारी कमाने का अवसर तलाशते हैं। बाढ़ आने पर बचाव कार्य के नाम पर जमकर लूटखसोट की जाती है। नावों की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण दीयरांचल के लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राशन की कमी और ईंधन का अभाव कोढ़ में खाज बना है। एसडीएम अभय कुमार सिंह ने बताया कि पका पकाया भोजन सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है, जो बंधों, सड़कों पर शरण लिए हैं। सुरेमनपुर दीयरांचल के लोग बाढ़ से जरूर परेशान है, लेकिन अभी अपने घरों में हैं।
फेफना क्षेत्र में राहत
फेफना। क्षेत्र में गंगा और टोंस का बढ़ाव गुरुवार की रात स्थिर होने के कारण बाढ़ पीड़ितों ने चैन की सांस ली है। शुक्रवार सुबह बाढ़ के पानी में बढ़ाव नहीं दिखा। यदि इसी प्रकार स्थिति बनी रहेगी तो संभव है कि रविवार से पानी में घटाव होने लगेगा।
विज्ञापन
बैरिया-सोहांव में एनएच पर बहने लगा पानी
शुक्रवार सुबह से बैरिया और सोहांव में बाढ़ का पानी एनएच-31 के ऊपर से बहने लगा है। गड़हांचल की 50 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित हैं। तीन दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बड़का खेत के 200 घर गांव के बाहर है, जहां चारों तरफ से सड़क हैं। गुरुवार की रात इसमें पानी भर गया। उधर, बैरिया तहसील के केहरपुर निवासी शिवजी सिंह का मकान गंगा की लहरों में समा गया। उदय छपरा में नागा उपाध्याय, सुनील उपाध्याय तथा राजेंद्र और वीरेंद्र चौधरी के तीन मकान भी नदी में समा गए। सदर तहसील के चौबे छपरा निवासी लक्ष्मण ओझा का मकान भी गंगा की लहरों में बह गया। गंगा की उत्पाती लहरें उदय छपरा में काली मंदिर को अपने आगोश में लेने को आतुर हैं। पास स्थित नीम का पेड़ नदी में समा चुका है। अवशेष बचे दुबे छपरा रिंग बंधे पर भी लहरों ने अपना खंजर चलाना शुरू कर दिया। 10 मीटर तक बांध कट चुका है। बाढ़ विभाग मिट्टी भरी बोरियों और बांस बल्ली से बने बंबू क्रेट का प्रयोग कर शेष बचे रिंग बंधे को बचाने में जुट है। गोपालपुर कन्हई ब्रम्हस्थान के पास और उदय छपरा में अध्यापक मदन उपाध्याय के घर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। गंगा का पानी एनएच-31 के सुघर छपरा ढाला, लार्ड कृष्ण विद्यालय के सामने व दुबेछपरा चिमनी के सामने के साथ ही पीएन इंटर कालेज दुबेछपरा के सामने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चार दशकों से गंगा की लहरें किसी न किसी गांव का अस्तित्व मिटाकर नई इबारत लिख रही हैं। हर साल बाढ़ और कटान रोकने के नाम पर बाढ़ विभाग अरबों रुपए पानी में बहा देता। फिर भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कटान रोकने के नाम पर 34 करोड़ की परियोजना बनाई गई। 30 करोड़ की लागत से ड्रेजिंग शुरू हुआ। इन कार्यों से कोई लाभ दिखता नहीं नजर आ रहा है। बाढ़ विभाग और ठेकेदार मालामाल जरूर हो गए।
विज्ञापन
थाने में पानी, स्टाफ सड़क पर
दुबहर। थाने में पानी घुसने से स्टाफ एनएच-31 पर सड़क के किनारे टेंट लगाकर आवश्यक कागजात और हथियार के साथ बैठे हुए हैं। कई घरों में पानी घुसने से लोग एनएच पर ही शरण लिए हुए हैं। गंगा नदी में आई बाढ़ अभी थमने का नाम नहीं ले रही है । स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से बाढ़ पीड़ितों को कुछ राहत सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन उनके सामने रहने के लिए तिरपाल और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था आवश्यक है। जिला प्रशासन से भूसा उपलब्ध कराया गया है लेकिन वह काफी कम है।
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालयों में दो से पांच फीट पानी
नरहीं। प्राथमिक विद्यालयों में दो से पांच फिट पानी लगा है। कर्णपुरा, गोविन्दपुर, लक्ष्मणपुर, बड़का खेत, गंगहरा, रैया खाड़ी, उमरपुर दियारे, शाहपुर बभनौली, इच्छा चौबे का पूरा, कोट, अंजोरपुर, नरहीं नंबर दो, कुल्हड़िया, बेल्सीपार सहित दर्जनों विद्यालय पानी में डूबे हुए हैं। प्रधानाध्यापक अखिलेश राय ने बताया कि पास में ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
सरयू के तेवर भी दिख रहे गरम, कटान का खतरा
बैरिया। तहसील के उत्तर से बहने वाली सरजू नदी का तेवर अभी भी गरम है। वहीं दक्षिणी छोर पर बहने वाली गंगा नदी का तेवर नरम हो सकती है। चांदपुर हेड पर सरजू नदी का जलस्तर शुक्रवार को 58.30 मीटर दर्ज किया गया। यहां से 1.5 सेंटीमीटर प्रति घंटा की दर से बढ़ाव है। चांदपुर में वर्ष 1984 में हाईफ्लड लेवल 60.240 मीटर दर्ज किया गया था। दोनों नदियां अपने घटाव पर जाती हैं तो खतरा और भी बढ़ेगा। उतरती लहरों के समय में भी कटान होता है। दुबे छपरा केहरपुर, गोपालपुर, पांडेयपुर, वंशगोपाल छपरा, मिश्र के मठिया, हाता, बुधनचक, दयाछपरा टाडी, प्रसाद छपरा आदि गांवों के लोग एनएच-31 या रिश्तेदारों के यहा शरण लिए हैं। कुछ ने छतों पर डेरा डाल रखा है। सरयू नदी की बाढ़ से गोपालनगर, वशिष्ठनगर, मानगढ़, शिवाल के लोग घिरे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि बाढ़ विभाग के अधिकारी कमाने का अवसर तलाशते हैं। बाढ़ आने पर बचाव कार्य के नाम पर जमकर लूटखसोट की जाती है। नावों की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण दीयरांचल के लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राशन की कमी और ईंधन का अभाव कोढ़ में खाज बना है। एसडीएम अभय कुमार सिंह ने बताया कि पका पकाया भोजन सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है, जो बंधों, सड़कों पर शरण लिए हैं। सुरेमनपुर दीयरांचल के लोग बाढ़ से जरूर परेशान है, लेकिन अभी अपने घरों में हैं।
फेफना क्षेत्र में राहत
फेफना। क्षेत्र में गंगा और टोंस का बढ़ाव गुरुवार की रात स्थिर होने के कारण बाढ़ पीड़ितों ने चैन की सांस ली है। शुक्रवार सुबह बाढ़ के पानी में बढ़ाव नहीं दिखा। यदि इसी प्रकार स्थिति बनी रहेगी तो संभव है कि रविवार से पानी में घटाव होने लगेगा।

नरही क्षेत्र के गंगा नदी के बाढ़ के पानी अधिक होने के चलते सुरक्षित स्थान पर अपने पशुओं को ले जाते - फोटो : BALLIA

दूबेछपरा पीजी कालेज के सामने एनएच-31 पर दबाव बना रही गंगा नदी के बाढ़ का पानी। संवाद- फोटो : BALLIA