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विवि परिसर में जलजमाव, नाव के सहारे हो रही नैया पार

Sun, 10 Oct 2021 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:42 PM IST
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Water logging in the university campus, crossing the boat with the help of boat
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय परिसर में लगा बारिश का पानी। संवाद - फोटो : BALLIA
बलिया। जिले में हो रही बारिश का सबसे ज्यादा प्रभाव जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय पर पड़ा है। लगातार बारिश के कारण बीते अगस्त माह से समूचे परिसर में चारों तरफ बारिश का पानी भरा है। आलम यह है कि विश्वविद्यालय के मेन गेट से लगभग पांच सौ मीटर दूरी पर स्थित प्रशासनिक कार्यालय तक पहुंचने के लिए कर्मियों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले वर्ष 2019 में भी विश्वविद्यालय परिसर में जभराव हो गया था। लेकिन 2020 में तत्कालीन डीएम हरिप्रताप शाही की पहल पर हुई कटहल नाला की सफाई से जलजमाव की समास्या से राहत मिलीं थी। इस बार हालात प्रतिकूल है, जिसका परिणाम है कि कुलपति आवास भी पानी में घिर गया है। जिला प्रशासन इससे बेखबर है। करीब दो माह से जल जमाव का संकट झेल रहे जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की मुश्किलें पिछले दिनों हुई बारिश ने बढ़ा दी हैं। अधिकारी कर्मचारी घुटने भर पानी से होकर किसी प्रकार नाव आदि के सहारे प्रशासनिक भवन में आवागमन करते थे। कुलपति आवास के चारों ओर पानी भरने की सूचना मिलने पर प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी को फोन कर कुलपति के लिए अस्थाई आवास की व्यवस्था कराने और कैंपस से जल निकासी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक जिला प्रशासन ने न तो कुलपति के लिए अस्थाई आवास की व्यवस्था कराई और न ही जल निकासी का कोई इंतजाम कराया है। जिससे समस्या ज्यों कि त्यों बनीं हुई है।आठ अक्तूबर से विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया होनी थी। जल भराव के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन इसके लिए निजी स्कूल का सहारा लेने को विवश है। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलसचिव एसएल पाल ने रविवार को बताया कि कटहल नाला की सफाई हो जाए तो जलजमाव से जल्दी निजात मिल सकती है। कुलपति कल्पलता पांडेय ने जिलाधिकारी समेत शासन को इस समस्या के बारे में पत्र लिखा है। हालांकि यूनिवर्सिटी में बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या को लेकर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 13 मार्च 2021 को द्वितीय दीक्षांत समारोह में कहा था कि किसी अन्य जगह पर प्रशासनिक व शिक्षा व्यवस्था के लिए भवन निर्माण होगा। इसके लिए मंडलायुक्त, डीएम व विश्वविद्यालय प्रशासन बैठ कर जगह के लिए निर्णय लें। उम्मीद जताई कि अगला दीक्षांत समारोह नए भवन में होगा। लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण मामला अधर में लटक गया।
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