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तेज हवा व बारिश से घाघरा नदी ने पकड़ा उग्र रूप

Tue, 16 Jul 2019 10:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:12 PM IST
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Water level of Ghaghra reached near danger mark
बांसडीह में कटान पीड़ित क्षेत्र का सर्वेक्षण करते अधिकारी। - फोटो : BALLIA
बेल्थरारोड/जयप्रकाश नगर। घाघरा का जलस्तर बढ़ कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है जिससे तटवर्ती गांवों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर नेपाल ने पानी छोड़ा तो स्थिति भयावह हो जाएगी। उधर, घाघरा का जलस्तर बढ़ने से कटान होने लगी है। जयप्रकाश नगर क्षेत्र के चांददीयर मौजा के सात लोगों की कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को नदी का जलस्तर 63. 890 मीटर पर स्थिर हो गया, जो लाल निशान 64.010 से महज 12 सेंटीमीटर कम है। आयोग का कहना है कि सुबह से नदी की प्रकृति में स्थिरता के बाद घटाव का क्रम शुरू हो गया।
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बेल्थरारोड क्षेत्र में लाल निशान छूने को आतुर घाघरा का पानी चारों तरफ फैल गया है। हाहानाला, चैनपुर गुलौरा, टगुनिया, खैराखास, तुर्तीपार, मुजौना, करीमगंज, बेल्थराबाजार, सहिया, सोनबरसा, हल्दीरामपुर आदि ग्रामों के पास पानी पहुंच गया है। पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर के पैतृक ग्राम टगुनिया के निकट से होकर नदी का पानी बह रहा है। बेल्थराबाजार के गौतम बुद्ध घाट पर स्थित मंदिर बाढ़ के पानी से घिर गया है। तुर्तीपार के कई बस्तियों में नदी का पानी घुस गया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद स्थिरता आ जाने से बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है, लेकिन नदी के मिजाज में अप्रत्याशित परिवर्तन को लेकर तटवर्ती लोग भयभीत हैं।
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लाल निशान के करीब पहुंची घाघरा के जलस्तर में मंगलवार को दोपहर के बाद से स्थिरता का क्रम शुरू हो जाने से तटवर्ती लोगों ने राहत की अनुभूति की है, फिर भी बाढ़ की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वैसे बाढ़ के संभावित खतरे को देख सरकारी अमला सतर्क है।
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जयप्रकाश नगर क्षेत्र के चांददीयर पंचायत के चांददीयर मौजा में टोला बाज राय के किसान परशुराम यादव, धर्मनाथ यादव, राजदेव यादव, उमाशंकर यादव, तपेशा सिंह, शिवमंगल सिंह, छबीला यादव की कृषि योग्य भूमि घाघरा की कटान के भेंट चढ़ गई। वहीं अब टोला शिवन राय के गांव निवासी किसान हरिभुवन यादव, रामदेव यादव, शिवशंकर यादव, नंदजी यादव की भूमि मुहाने पर है।
जयप्रकाश नगर: पिछले रविवार से तेज हवा व बारिश के सहयोग मिलते ही घाघरा नदी ने उग्र रूप धारण कर लिया है। 48 घंटे के अंदर चांददीयर पंचायत के चांददीयर गांव सहित कई गांवों के किसानों की करीब पांच एकड़ कृषि योग्य भूमि घाघरा में समाहित हो गई है। यदि घाघरा नदी कि ऐसी स्थिति बरकरार रही तो घाघरा को अब बीएसटी बांध तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा।
आलम यह है कि विकास खण्ड मुरली छपरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत चांददीयर के चांददीयर गांव से दक्षिण दिशा की तरफ बीएसटी बांध से करीब दो किलोमीटर पूरब दिशा में बहने वाली घाघरा नदी बीते एक सप्ताह हुई तूफानी बारिश के चलते कटान करना शुरु कर दिया है। घाघरा नदी पांच एकड़ जमीन निगलते हुए बीएसटी बांध से करीब पांच सौ मीटर दूरी पर स्थित विद्यार्थी ब्रह्म स्थान के निकट पहुंच चुकी है। जब किसानों ने नदी के इस वीभत्स रूप को देखा तो आश्चर्य चकित हो गए कि यदि यह रूप बरकरार रह गया तो नदी को बीएसटी बांध तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा। लेकिन शासन प्रशासन या राजनैतिक दल को कोई चिंता नहीं है।
चांददीयर पंचायत के चांददीयर गांव के प्रधान प्रतिनिधि बीरेंद्र यादव, राजकिशोर यादव (अध्यक्ष) विनोद यादव, विश्वनाथ गोंड़, राजमहल यादव, परसन सिंह का कहना है कि बाढ़ खण्ड बलिया द्वारा बीएसटी बांध को बचाने लिये जो कार्य इस वर्ष करवाया गया है, वह मात्र उतनी दूरी में बांध को सुरक्षित रख सकता है। यदि इसके आगे के बांध पर कटान रोधी कार्य नहीं करवाया गया तो विद्यार्थी ब्रह्म बाबा स्थान के सामने घाघरा नदी से बीएसटी बांध सुरक्षित नहीं होगा। जब तक जय प्रभा सेतु से कटान रोधी कार्य नहीं करवाया जाएगा, तब तक यह कटान बंद नहीं होने वाला है। भले ही सरकार द्वारा करोड़ों रुपये बहा दिए जाय।

नहीं सूख रहा बारिश का पानी
बांसडीह। एक समय ऐसा रहा कि बारिश न होने से जलस्तर कम होता जा रहा था। लेकिन लगातार चार दिनों तक हुई बारिश ने तबाही मचा दिया। अब हालात ऐसे हो गए है कि किसानों की खेती एक तरफ लटक गई है तो दूसरी तरफ जलजमाव व कीचड़ से परेशानी बढ़ गई है। किसानों ने धान की नर्सरी डाला था वह भी डूब गई है। कुछ ऐसे भी किसान थे, जिन्होंने पानी के अभाव में धान की नर्सरिया तक नहीं डाली थी। उधर, कस्बा से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल जमाव इतना हो गया है कि लोगों का जीना दुश्चार हो गया है।
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