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बिजली का करते रहे इंतजार, बिल आ गया दस हजार
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सोनभद्र/अनपरा। बिजली विभाग की महिमा अपरंपार है। विभाग ने घरों तक बिजली तो नहीं पहुंचाई, अलबत्ता लोगों को बिल थमा दिया है। एक-दो नहीं पूरे गांव की स्थिति यही है। किसी पर दस हजार बकाया है तो किसी पर आठ हजार। बिल देखकर चिंतित ग्रामीण अब इसके समाधान के लिए भटक रहे हैं। यह हाल कहीं और का नहीं, बल्कि यूपी को रोशन करने वाले ऊर्जांचल क्षेत्र का है। अनपरा तापीय परियोजना से कुछ किमी की दूरी पर आदिवासी कस्बा मेड़रदह के लोग विभाग की इस मनमानी के शिकार हैं। बिल सुधारने के लिए वह दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं।
म्योरपुर विकास खंड के कुलडोमरी ग्राम पंचायत के गुलालीडीह टोले में 150 से अधिक की आबादी है लेकिन यहां अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। इससे यहां के लोग आज भी अंधेरे में रहने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब मिट्टी का तेल मिलता था तो ढिबरी जलाकर घरों में रोशनी कर लेते थे। जब से मिट्टी का तेल मिलना बंद हुआ है ग्रामीणों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के राजेश्वर प्रसाद का कहना है कि जिले में चार दशक से अधिक समय से बिजली परियोजनाएं स्थापित हैं लेकिन आज तक ग्रामीण क्षेत्र की उपेक्षा की गई। आज भी यह गांव सरकार की योजनाओं से महरूम है। आरोप है कि गांव में बिजली पहुंचे बिना ही लोगों को बिजली बिल थमाया जा रहा है। ताजा प्रकरण गुलालीडीह टोले का है। यहां वर्ष 2018 में बिजली विभाग की तरफ से मीटर तो ग्रामीणों में वितरित कर दिया गया लेकिन अब तक गांव में बिजली नहीं पहुंच सकी है। बिजली का उपभोग किए बिना विभाग की तरफ से ग्रामीणों को बिजली का बिल थमाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न पहुंचने से उनके बच्चे डीजल से ढिबरी जलाकर पढ़ाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बिल में सुधार करते हुए गांव में बिजली के खंभे लगाकर आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। शुभेंदू शाह, एक्सईएन, बिजली पिपरी खंड ने बताया कि बिजली कनेक्शन के बिना बिल नहीं भेजा जाता है। ग्रामीणों के आरोप की जांच कराई जाएगी। शिकायत सही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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म्योरपुर विकास खंड के कुलडोमरी ग्राम पंचायत के गुलालीडीह टोले में 150 से अधिक की आबादी है लेकिन यहां अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। इससे यहां के लोग आज भी अंधेरे में रहने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब मिट्टी का तेल मिलता था तो ढिबरी जलाकर घरों में रोशनी कर लेते थे। जब से मिट्टी का तेल मिलना बंद हुआ है ग्रामीणों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के राजेश्वर प्रसाद का कहना है कि जिले में चार दशक से अधिक समय से बिजली परियोजनाएं स्थापित हैं लेकिन आज तक ग्रामीण क्षेत्र की उपेक्षा की गई। आज भी यह गांव सरकार की योजनाओं से महरूम है। आरोप है कि गांव में बिजली पहुंचे बिना ही लोगों को बिजली बिल थमाया जा रहा है। ताजा प्रकरण गुलालीडीह टोले का है। यहां वर्ष 2018 में बिजली विभाग की तरफ से मीटर तो ग्रामीणों में वितरित कर दिया गया लेकिन अब तक गांव में बिजली नहीं पहुंच सकी है। बिजली का उपभोग किए बिना विभाग की तरफ से ग्रामीणों को बिजली का बिल थमाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न पहुंचने से उनके बच्चे डीजल से ढिबरी जलाकर पढ़ाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बिल में सुधार करते हुए गांव में बिजली के खंभे लगाकर आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। शुभेंदू शाह, एक्सईएन, बिजली पिपरी खंड ने बताया कि बिजली कनेक्शन के बिना बिल नहीं भेजा जाता है। ग्रामीणों के आरोप की जांच कराई जाएगी। शिकायत सही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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