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जयघोष के साथ निकाली भव्य कलश यात्रा
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 08 Apr 2015 10:40 PM IST
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हनुमानगंज ब्लाक के धर्मपुरा स्थित बाबा की बारी में आयोजित पांच दिवसीय विष्णु महायज्ञ के पहले दिन बुधवार को जयघोष के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें हाथी-घोड़े भी शामिल थे। गाजे बाजे के साथ ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कलश लेकर गांव का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं के जयकारे से पूरा इलाका गुंजायमान हो उठा।
कलश यात्रा बाबा की बारी से संयोजक दशरथ बाबा के नेतृत्व में निकाली गई। जो मां काली मंदिर और अमवां के शिव मंदिर होते हुए पुन: यज्ञ स्थल पर पहुंची। इस दौरान 501 श्रद्धालुओं ने कलश लेकर गांव का भ्रमण किया। कलश यात्रा में दुर्गावती शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। इस दौरान नर-नारियों के जयकारे से पूरा वातारण भक्तिमय हो गया।
उधर, मंगलवार शाम श्रीराम कथा के दौरान अयोध्या से आए व्यास अयोध्या दास उर्फ बिहारी बाबा ने श्रीराम के जन्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। इससे वे सदैव मायूस रहा करते थे। गुरु व ऋषियों के कहने पर यज्ञ तथा तप किया।
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इसके बाद राजा दशरथ के आंगन में चार पुत्रों का अवतार हुआ। इसके बाद अयोध्या में हर्ष व्याप्त हो गया। चारों पुत्रों का नाम श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघभन रखा गया। चारों भाई धीरे-धीरे बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर बढ़ रहे थे कि गुरु विश्वामित्र का अयोध्या नगरी में आगमन हुआ। कथा सुनकर लोग भावविभोर हो गए। इस मौके पर प्रेम नारायण सिंह, राजेश सिंह, देवेंद्र प्रधान, शुभम पांडेय, उमेश, मुकेश आदि रहे।
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कलश यात्रा बाबा की बारी से संयोजक दशरथ बाबा के नेतृत्व में निकाली गई। जो मां काली मंदिर और अमवां के शिव मंदिर होते हुए पुन: यज्ञ स्थल पर पहुंची। इस दौरान 501 श्रद्धालुओं ने कलश लेकर गांव का भ्रमण किया। कलश यात्रा में दुर्गावती शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। इस दौरान नर-नारियों के जयकारे से पूरा वातारण भक्तिमय हो गया।
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उधर, मंगलवार शाम श्रीराम कथा के दौरान अयोध्या से आए व्यास अयोध्या दास उर्फ बिहारी बाबा ने श्रीराम के जन्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। इससे वे सदैव मायूस रहा करते थे। गुरु व ऋषियों के कहने पर यज्ञ तथा तप किया।
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इसके बाद राजा दशरथ के आंगन में चार पुत्रों का अवतार हुआ। इसके बाद अयोध्या में हर्ष व्याप्त हो गया। चारों पुत्रों का नाम श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघभन रखा गया। चारों भाई धीरे-धीरे बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर बढ़ रहे थे कि गुरु विश्वामित्र का अयोध्या नगरी में आगमन हुआ। कथा सुनकर लोग भावविभोर हो गए। इस मौके पर प्रेम नारायण सिंह, राजेश सिंह, देवेंद्र प्रधान, शुभम पांडेय, उमेश, मुकेश आदि रहे।