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वीर लोरिक: नई पीढ़ी तक पहुंचेगी लोकनायक की गाथा, बलिया में 4.97 करोड़ से बन रहा भव्य सभागार; होगा आधुनिक परिसर

Mon, 21 Sep 2026 07:52 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 21 Sep 2026 07:52 PM IST
सार

बलिया में लोकनायक वीर लोरिक की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए 4.97 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सभागार बनाया जा रहा है। 350 क्षमता वाले सभागार में एचडी प्रोजेक्शन और इंटेलिजेंट एलईडी लाइटिंग की सुविधा होगी। वीर लोरिक की स्मृति में बनने वाले परिसर में उनकी वीरता, साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की गाथाएं संरक्षित होंगी।

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Veer Lorik saga folk hero reach new generation grand auditorium built in Ballia cost 4 crore in ballia
लोकनायक वीर लोरिक की प्रतिमा। - फोटो : संवाद

विस्तार

महापुरुषों और महान योद्धाओं की वीरगाथाओं को सहेजने और उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में जनपद बलिया में महापुरुष वीर लोरिक की स्मृति को संजोने की पहल की गई है। संस्कृति विभाग की ओर से जनपद के राजस्व ग्राम हसनपुरा, पोस्ट बिसौली, तहसील बांसडीह में 4.97 करोड़ रुपये की लागत से भव्य सभागार का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना के लिए 1.36 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी जारी की जा चुकी है।

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इस परियोजना के तहत 350 दर्शकों की क्षमता वाले अत्याधुनिक सभागार का निर्माण किया जा रहा है, जिसके फाउंडेशन का कार्य शुरू हो चुका है। सभागार के सिविल निर्माण के साथ इसे फायर-प्रूफ बनाया जाएगा, ताकि कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किए जा सकें। इसके अलावा सभागार में जलापूर्ति की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे कार्यक्रमों के दौरान कलाकारों और दर्शकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

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स्थानीय कलाकारों के लिए इस सभागार को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। इसमें साउंड रीइन्फोर्समेंट सॉल्यूशन यानी बेहतर ध्वनि व्यवस्था, एचडी सिनेमैटिक प्रोजेक्शन सिस्टम और एलईडी इंटेलिजेंट स्टेज लाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा। मंच के लिए मोटराइज्ड कर्टन और फैब्रिकेशन सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इसके अलावा सभागार में बेहतर ध्वनि गुणवत्ता और दर्शकों के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए एकॉस्टिकल एवं इंटीरियर्स का विशेष कार्य कराया जाएगा।

इस भवन का निर्माण आरसीसी फ्रेम्ड स्ट्रक्चर यानी आरसीसी ढांचागत संरचना के आधार पर किया जाएगा। भवन की डिजाइन भारतीय मानक (आईएस) कोड के अनुसार तैयार की जाएगी। परियोजना से जुड़े सभी निर्माण कार्य केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की निर्धारित स्पेसिफिकेशन के अनुसार अथवा संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप कराए जाएंगे।

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील के गौरा गांव में जन्मे वीर लोरिक भोजपुरी लोक महाकाव्य ‘लोरिकायन’ के प्रमुख नायक माने जाते हैं। अपनी ताकत और वीरता के लिए प्रसिद्ध वीर लोरिक को लोककथाओं में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने वाले योद्धा के रूप में याद किया जाता है। उनकी वीरगाथाओं में सोनभद्र के अत्याचारी राजा से मंजरी की रक्षा करने और उसे युद्ध में हराने का प्रसंग प्रमुख है, जिसके बाद वीर लोरिक और मंजरी के विवाह की कथा भी लोकगाथाओं में प्रसिद्ध हुई। 

वीर लोरिक से जुड़ी सबसे चर्चित कथाओं में मारकुंडी घाटी का ‘वीर लोरिक पत्थर’ भी शामिल है। मान्यता है कि मंजरी के कहने पर वीर लोरिक ने अपनी तलवार के एक वार से विशाल पत्थर को दो हिस्सों में काट दिया था। आज यह पत्थर वीरता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बलिया में वीर लोरिक अखाड़ा, उनकी प्रतिमा और वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम भी उनकी स्मृति को जीवित रखे हुए हैं।

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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महापुरुष वीर लोरिक की वीरता और उनकी लोकगाथाएं उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी गाथाएं साहस, शौर्य और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश देती हैं। प्रदेश सरकार महापुरुषों और लोकनायकों से जुड़ी विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे नई पीढ़ी तक पहुंचा रही है। 

उन्होंने बताया बलिया के हसनपुरा में सभागार और पुस्तकालय का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वीर लोरिक के जीवन, शौर्य और लोकगाथाओं को संरक्षित करने के साथ उनके योगदान और विरासत को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। यह परियोजना युवाओं को वीर लोरिक के जीवन और उनकी वीरता से परिचित कराने के साथ लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उन्हें जोड़ने में भी मदद करेगी।

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