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Ballia News: ध्वस्त हुआ वशिष्ठ का विशिष्ट किला, बसपा ने लगाई सेंध

Sat, 13 May 2023 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 May 2023 11:36 PM IST
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Vashisht's special fort demolished, BSP made a dent
रसड़ा। नगर पालिका परिषद में अब तक अपराजेय रहे वशिष्ठ नारायण सोनी का किला ध्वस्त हो ही गया। बसपा को इसमें सेंध लगाने में सफलता मिल ही गई। बसपा प्रत्याशी विनयशंकर जायसवाल ने भाजपा के वशिष्ठ नारायण सोनी को 5860 मतों से हरा कर नपा की कुर्सी पर पहली बार बसपा को काबिज कराया।
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बसपा प्रत्याशी विनय शंकर जायसवाल ने 12335 मत, भाजपा प्रत्याशी वशिष्ठ नारायण सोनी 6475, सपा के गोविंद गुप्ता 64, कांग्रेस के राजकुमार गुप्ता 86, आम आदमी पार्टी की सपना गुप्ता 28, निर्दलीय गुलाब आनंद गिरी को 38, लक्ष्मी देवी को 38 मत तथा नोटा को 20 मत मिले। भाजपा को छोड़ सपा, आम आदमी पार्टी एवं कांग्रेस प्रत्याशियों सहित सभी की जमानत जब्त हो गई।
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जीत की खबर लगते ही विधायक उमाशंकर सिंह ने गाजे बाजे के साथ हजारों समर्थकों के साथ नाथ बाबा एवं रोशन शाह की मजार पर जाकर माथा टेका। विनय की जीत पर समर्थकों ने आतिशबाजी के साथ अबीर गुलाल उड़ाए। विनय शंकर जायसवाल ने निर्धन कन्याओं की शादी, नगर में एम्बुलेंस चलवाने, हिंदू-मुस्लिम लोगों के शवों रखने के लिए डी फ्रीजर देने के साथ ही सैकड़ों गरीबों के इलाज को लेकर जनता के बीच थे। जनता ने भी उन्हें रिकार्ड मतों से जीत दिलाकर आशीर्वाद दिया।
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विनय शंकर ने पहले चरण के मतदान में बढ़त को हर चरण में बढ़त बनाते गए। हर चक्र में बढ़त देख बसपा कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ता गया। पिछले दो चुनावों में मामूली मतों से हार कर नपा की कुर्सी गंवाने वाले बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह ने रिकार्ड मतों से बसपा को जीता कर पिछली हार का बदला भी चुकता कर गए। इस बार का चुनाव चेयरमैन बनाम विधायक की हो गई थी। जिस में विधायक ने बाजी मारी।

पांच बार जीत दर्ज चुके थे वशिष्ठ
रसड़ा। नपा की कुर्सी पर पांच बार से कब्जा जमाकर बैठे वशिष्ठ नरायन सोनी छठी बार कब्जा जमाने से चूक गए। खास बात यह है कि अब तक कभी भाजपा, कभी निर्दल तो कभी सपा समर्थित उम्मीदवार बनकर अपने तथा अपनी पत्नी मोती रानी सोनी को कुर्सी पर बिठाते आते रहे थे। सभी सरकारों में वो फिट हो जाते थे। पिछली बार भाजपा और बसपा को धूल चटाकर निर्दल ही अपनी पत्नी मोती रानी सोनी को कुर्सी पर बिठाया था। इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हर बार त्रिकोणीय लड़ाई में बाजी मारते आते थे। इस बार उनकी लड़ाई सीधी बसपा थी। सीधी लड़ाई में विरोधी वोटों का बंटवारा न होने से भी वशिष्ठ नारायण सोनी का छठी बार कुर्सी पर कब्जा जमाने का सपना पूरा नहीं हो सका।


सभासदों का भी टूटा किला
रसड़ा। नगर पालिका परिषद में परिवर्तन की लहर में अब तक अपराजेय है कई सभासद भी अपनी कुर्सी गंवा बैठे। अब तक अपराजेय रहे वार्ड नंबर छह से वकील अहमद अंसारी की पुत्रवधू को भी हार का सामना करना पड़ा। वार्ड नंबर 22 से अपराजेय सभासद पप्पू पहलवान के साथ वार्ड नंबर 13 से शिवानंद बागले को भी हार का सामना करना पड़ा। कई सभासद अपनी कुर्सी बचा ले गए। वार्ड नंबर पांच से राजेंद्र जायसवाल, वार्ड नंबर सात से विजय कुमार संटू वार्ड 10 से नसीम, वार्ड 12 से संजय राजभर, 24 से अविनाश जायसवाल ने जीत दर्ज की। वार्ड 10 से नसीम ने 502 मत पाकर सबसे ज्यादा 342 मत से जीते। वार्ड 22 से रीना देवी 278 मत पाकर एक मत से विजयी हुई।
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