UP Board Paper Leak: पेपर लीक मामले के दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार करने का दावा, अब तक 46 गिरफ्त में
बलिया पुलिस के अनुसार पेपर लीक के मास्टरमाइंड एवं महाराजी देवी स्मारक इंटर कॉलेज के प्रबंधक निर्भय नारायन सिंह और राजीव प्रजापति सहित 14 और आरोपियों को पकड़ा गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड प्रयागराज की अंग्रेजी इंटरमीडिएट का पेपर लीक होने के मामले में बलिया पुलिस ने मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार प्रकरण के मास्टरमाइंड एवं महाराजी देवी स्मारक इंटर कॉलेज के प्रबंधक निर्भय नारायन सिंह और राजीव प्रजापति सहित 14 और आरोपियों को पकड़ा गया है।
अब तक सभी दर्ज मामलों में कुल 46 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि इसमें महाराजी देवी स्मारक इंटर कॉलेज किड़िहरापुर के प्रबंधक निर्भय नारायन सिंह और कंप्यूटर के कार्य से संबंधित दुकान चलाने वाला राजीव प्रजापति शामिल हैं।
25 से 30 हजार रुपये में हल कॉपियां बेचने का आरोप
राजीव प्रजापति ने कॉलेज को उपलब्ध कराए गए प्रश्न पत्रों के पैकेट से प्रश्नपत्र निकाल कर सुभाष चंद्र इंटर कॉलेज ताड़ीबड़ा गांव थाना नगरा में अंग्रेजी विषय के शिक्षक अविनाश गौतम से सॉल्व कराया। यह हल कापी निर्भय नारायन सिंह को दी गई। निर्भय नारायन सिंह ने 25 से 30 हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से तय कर इस हल कॉपी को मुलायम चौहान, मनीष चौहान व बृजेश चौहान से उत्तर पुस्तिकाओं पर लिखवाया।
पुलिस ने बताया कि निर्भय नारायन सिंह ने आर्थिक लाभ के लिए उक्त प्रश्नपत्र अन्य लोगों को भी दिया। वहीं राजीव प्रजापति ने प्रश्नपत्र अपने मोबाइल के पीडीएफ स्कैनर एप से स्कैन कर सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से अन्य लोगों को आर्थिक लाभ के लिए बेचे जाने की बात कबूल की है। यह प्रश्नपत्र उनके पास से बरामद मोबाइल फोन में भी मिला है।
पुलिस का दावा है कि प्रश्नपत्र खरीदने वाले कई व्यक्तियों ने आर्थिक लाभ के लिए अन्य लोगों को बेचे जाने की बात स्वीकार की है। इस बात की पुष्टि उनके बैंक अकाउंट और पेटीएम ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट जो इनके मोबाइल में पाए गए हैं उससे भी हुई है।
अन्य की जांच की जा रही है। मामले को हल करने के लिए सात टीमों का गठन किया गया था। अब तक मामले में चार कॉलेज प्रबंधक, तीन प्रधानाचार्य, 10 शिक्षक, पांच प्राइवेट कोचिंग शिक्षक के साथ तीन विद्यालय क्लर्क व अन्य शामिल हैं।
अब तक ये गिरफ्तार किए गए
इस मामले में अब तक डीआईओएस बृजेश कुमार मिश्रा, नगरा से बृजभान यादव, जय प्रकाश यादव, जनार्दन यादव, सुनील कुमार, राकेश यादव, वरुण सिंह, अनमोल यादव, जय प्रकाश पांडेय, अमित यादव, विशाल यादव, अभिषेक यादव, अनूप चौहान, रजनीकांत यादव, आनंद नरायन चौहान उर्फ मुलायम चौहान, मनीष चौहान, विकास राय, प्रशांत राय, बृजेश चौहान, भानु प्रताप सिंह, निर्भय नारायन सिंह, राजू उर्फ राजीव प्रजापति, अविनाश गौतम, नीरज सिंह, सुनील, कमलेश यादव, चंदन चौहान, ओमकार नाथ, शुभेन्द्र यादव, अहमद रजा, ओम प्रकाश वर्मा, सुधीर कुमार यादव, सुजीत वर्मा, शाहिद अंसारी, अरविंद कुमार, अनिल कुमार गोंड़, अनूप यादव, नरेंद्र प्रसाद गुप्ता, राजेश गुप्ता, अरविंद कुमार वर्मा, मनिंद्र कुमार गुप्ता आदि गिरफ्तार किए गए हैं।
पेपर लीक मामले में गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
समिति के प्रदेश अध्यक्ष अजय प्रताप नारायण सिंह ने कहा कि पेपर लीक मामले में पत्रकारों को घसीटना लोकतंत्र पर हमला है। पत्रकार का काम खबरों को उजागर करना है। अगर बलिया के पत्रकारों ने पेपर लीक मामले को उजागर किया तो क्या गुनाह कर दिया। वहीं, राष्ट्रीय सचिव सुनील चौधरी ने कहा कि यूपी में पत्रकारों की दशा दिन पर दिन दयनीय होती जा रही है।
पत्रकारों की गिरफ्तारी मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिश है। गिरफ्तार साथियों की रिहाई नहीं हुई तो प्रदेश भर में एक बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप की मांग की। कहा कि पत्रकारों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।