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कल तक सबके दुलारे थे, आज अछूत हो गए!
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बलिया। कोरोना के भय ने शारीरिक ही नहीं सामाजिक दूरी को भी बढ़ा दिया है। जिले में कोरोना संक्रमित पाए गए लोगों का जहां अस्पताल में इलाज चल रहा है वहीं उनके परिवार के लोगों को तमाम मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमक के भय से न तो दुकानदार उन्हें सामान देना चाहते हैं और न ही चक्की वाला उसका गेहूं पीसना चाहता है। इनके परिवार के सदस्य को आता देख दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर ले रहे हैं। स्थिति यह है कि इनकी मदद के लिए ग्राम प्रधान को भी छिपकर उनके घर जाना पड़ रहा है। जयप्रकाश नगर क्षेत्र के हॉटस्पॉट घोषित एक गांव के पीडि़त परिवार के लोगों ने सोमवार को अपना दर्द बयां किया।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कर रहे हैं। यह अपील किया जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के परिवार के लोग आप ही के बीच के हैं, इनके साथ ऐसा व्यवहार न करें, जिससे इन्हें मानसिक कष्ट हो।
जयप्रकाश नगर क्षेत्र में हॉटस्पॉट घोषित एक गांव निवासी बिगन यादव ने बताया कि पुत्र की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दूसरे दिन तीन पड़ोसियों के घर को चारों तरफ से सील कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि जब भी परिवार का कोई सदस्य किसी दुकान पर जा रहा है तो दुकानदार सामान देने से इंकार कर दे रहे हैं। मेरे हाथ से पैसा लेने के लिए मना कर रहे हैं। चक्की संचालक गेहूं पीसने से भी मना कर दिया। बाद में ग्राम प्रधान भोजन की व्यवस्था कराई।
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एक अन्य गांव की निर्मला देवी का कहना है कि जिस दिन परिवार में एक सदस्य के कोरोना पॉजिटिव आने की सूचना आई, उसी दिन से गांव के लोगों ने परिवार से दूरी बना ली। हमें सामान नहीं दिया जा रहा। हमें देखकर लोग रास्ता बदल दे रहे हैं।
उमरावती देवी का कहना है कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन देखना नसीब होगा। जो कल तक साथ बैठकर हंसी मजाक करती थीं, अब दूर से ही देखकर मुंह बनाने लग रही हैं।
रेखा देवी का कहना है कि जब से हमारे परिवार में एक मरीज के पॉजिटिव आने की सूचना फैली, लोगों ने हमारे घर की तरफ से गुजरना भी बंद कर दिया है। हमारे बच्चों को देखते ही भगा दिया जा रहा है।
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संक्रमित युवक के परिवारों से लोग कर रहे परहेज
बैरिया। क्षेत्र के हॉटस्पॉट गांव में संक्रमित मिले युवक के परिवार वालों की सैंपलिंग 18 मई को हो गई, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। संक्रमित के भाई, माता-पिता, पत्नी, भाभी होम क्वारंटीन हैं। बड़े भाई का कहना है कि हम लोग घर में खाना बनाने के लिए कुछ खरीदना चाहते हैं तो दुकानदार सामान देने से इंकार कर देते हैं। घर से निकलने पर लोग ताने भी मारते हैं। हम लोगों की मेहनत, मजदूरी सब बंद हो गई है। इससे आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
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बेखौफ घूम रहे गांवों में होम क्वारंटीन मजदूर
बैरिया। क्षेत्र के गांवों में गैर राज्यों से आए लोग होम क्वारंटीन किए गए हैं लेकिन इसका पालन न कर खुलेआम घूम रहे हैं। इसको लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। क्षेत्र के दुर्जनपुर, श्रीनगर, बलिहार, चकिया, श्रीकांतपुर में क्वारंटीन सेन्टर बने हैं। बलिहार ग्राम पंचायत में 38 प्रवासी मजदूरों को होम क्वारन्टीन किया गया है। धूपाराम प्यारी बालिका विद्यालय क्वारन्टीन सेन्टर पर चले गए। सूरत से आए युवक ने बताया कि कोटवां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर होम क्वारन्टीन का सुझाव दिया है। लेकिन मैं घर नहीं जाना चाहता हूं, क्योंकि घर जाने के बाद मेरे अलावा मेरे घर के लोगों को भी अलग निगाह से देखा जाएगा। इसलिए क्वारन्टीन की अवधि पूरा करने के बाद ही घर जाएंगे। हालांकि इन लोगों ने तो माहौल को समझते हुए सही रास्ता चुन लिया, लेकिन अधिकतर ऐसे हैं जो मना करने के बाद भी न तो क्वारंटीन हो रहे हैं और न ही होम क्वारंटीन में रह रहे हैं।
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हालांकि स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कर रहे हैं। यह अपील किया जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के परिवार के लोग आप ही के बीच के हैं, इनके साथ ऐसा व्यवहार न करें, जिससे इन्हें मानसिक कष्ट हो।
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जयप्रकाश नगर क्षेत्र में हॉटस्पॉट घोषित एक गांव निवासी बिगन यादव ने बताया कि पुत्र की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दूसरे दिन तीन पड़ोसियों के घर को चारों तरफ से सील कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि जब भी परिवार का कोई सदस्य किसी दुकान पर जा रहा है तो दुकानदार सामान देने से इंकार कर दे रहे हैं। मेरे हाथ से पैसा लेने के लिए मना कर रहे हैं। चक्की संचालक गेहूं पीसने से भी मना कर दिया। बाद में ग्राम प्रधान भोजन की व्यवस्था कराई।
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एक अन्य गांव की निर्मला देवी का कहना है कि जिस दिन परिवार में एक सदस्य के कोरोना पॉजिटिव आने की सूचना आई, उसी दिन से गांव के लोगों ने परिवार से दूरी बना ली। हमें सामान नहीं दिया जा रहा। हमें देखकर लोग रास्ता बदल दे रहे हैं।
उमरावती देवी का कहना है कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन देखना नसीब होगा। जो कल तक साथ बैठकर हंसी मजाक करती थीं, अब दूर से ही देखकर मुंह बनाने लग रही हैं।
रेखा देवी का कहना है कि जब से हमारे परिवार में एक मरीज के पॉजिटिव आने की सूचना फैली, लोगों ने हमारे घर की तरफ से गुजरना भी बंद कर दिया है। हमारे बच्चों को देखते ही भगा दिया जा रहा है।
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संक्रमित युवक के परिवारों से लोग कर रहे परहेज
बैरिया। क्षेत्र के हॉटस्पॉट गांव में संक्रमित मिले युवक के परिवार वालों की सैंपलिंग 18 मई को हो गई, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। संक्रमित के भाई, माता-पिता, पत्नी, भाभी होम क्वारंटीन हैं। बड़े भाई का कहना है कि हम लोग घर में खाना बनाने के लिए कुछ खरीदना चाहते हैं तो दुकानदार सामान देने से इंकार कर देते हैं। घर से निकलने पर लोग ताने भी मारते हैं। हम लोगों की मेहनत, मजदूरी सब बंद हो गई है। इससे आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
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बेखौफ घूम रहे गांवों में होम क्वारंटीन मजदूर
बैरिया। क्षेत्र के गांवों में गैर राज्यों से आए लोग होम क्वारंटीन किए गए हैं लेकिन इसका पालन न कर खुलेआम घूम रहे हैं। इसको लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। क्षेत्र के दुर्जनपुर, श्रीनगर, बलिहार, चकिया, श्रीकांतपुर में क्वारंटीन सेन्टर बने हैं। बलिहार ग्राम पंचायत में 38 प्रवासी मजदूरों को होम क्वारन्टीन किया गया है। धूपाराम प्यारी बालिका विद्यालय क्वारन्टीन सेन्टर पर चले गए। सूरत से आए युवक ने बताया कि कोटवां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर होम क्वारन्टीन का सुझाव दिया है। लेकिन मैं घर नहीं जाना चाहता हूं, क्योंकि घर जाने के बाद मेरे अलावा मेरे घर के लोगों को भी अलग निगाह से देखा जाएगा। इसलिए क्वारन्टीन की अवधि पूरा करने के बाद ही घर जाएंगे। हालांकि इन लोगों ने तो माहौल को समझते हुए सही रास्ता चुन लिया, लेकिन अधिकतर ऐसे हैं जो मना करने के बाद भी न तो क्वारंटीन हो रहे हैं और न ही होम क्वारंटीन में रह रहे हैं।