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पराली जलाने वालों की सेटेलाइट से होगी निगरानी

Fri, 22 Oct 2021 10:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 10:15 PM IST
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Those who burn stubble will be monitored by satellite
पराली जलाने पर होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए शासन सख्त है। खेत-खलिहान हर जगह सेटेलाइट से नजर रखी जा रही है। कहीं भी पराली जली तो सेटेलाइट से तस्वीरें जिला प्रशासन को लोकेशन के साथ मिल जाएंगी। जांच के बाद कार्रवाई तय की जाएगी।
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धान की कटाई शुरू होते ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। राज्य मुख्यालय जिले के हर कोने की निगरानी में जुटा है। लखनऊ कंट्रोल रूम में पराली जलने की तस्वीरें सेटेलाइट के माध्यम से कैद की जा रही हैं। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने दो साल पहले सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था शुरू की। इसकी मॉनिटरिंग कृषि विभाग लखनऊ के माध्यम से की जाती है। साल 2019 में जिले के अलग- अलग जगहों से पराली जलाने की कुल 16 तस्वीरें सेटेलाइट के माध्यम से कैद की गई थीं। 2020 में भी सेटेलाइट के माध्यम से कई लोगों को पराली जलाने का दोषी चिह्नित किया गया था।
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कंबाइन चालकों को दी गई हिदायत
पराली जलने की घटनाओं को रोकने के लिए कंबाइन चालकों को विशेष हिदायत दी गई है। उन्हें कंबाइन के साथ एसएमएस ( सुपर एक्स्ट्रा मैनेजमेंट) का इंतजाम करना होगा। ताकि धान की कटाई के साथ ही खेतों में पराली निस्तारण हो जाए। रबी की बुवाई के लिए किसानों को पराली न जलाना पड़े।
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धरती और आकाश से हो रही निगरानी
पराली जलने की घटनाओं पर अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट से नजर रखी ही जा रही है। स्थानीय स्तर पर कृषि विभाग, तहसील कर्मचारी पुलिस विभाग समेत ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कर्मचारी सेटेलाइट से प्राप्त केस का सत्यापन कर पराली जलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करेंगे।
पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्ती के नियम
दो एकड़ तक फसल अवशेष जलाने वालों से ढाई हजार रुपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये, व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पराली जलने पर दोषी व्यक्ति से 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला जा सकता है। दोबारा पकड़े जाने पर संबंधित किसान को कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से हाथ धोना पड़ सकता है।
पराली जलने से नुकसान
पराली जलाने से राख पैदा होती है और सूक्ष्म जीवों का नाश हो जाता है। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है। मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। हवा में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों की वजह से अस्थमा और खांसी जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा और दिल की बीमारी जैसे रोग भी बढ़ रहे हैं।

पराली न जले इसके लिए कंबाइन मालिकों को एसएमएस ( सुपर एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे फसल अवशेष के छोटे टुकड़े हो जाते हैं। इसके अलावा पराली जलने की घटनाओं की मॉनिटरिंग सेटेलाइट से भी की जा रही है।
इंद्राज यादव, उप कृषि निदेशक, बलिया।
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