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अबकी बार नवरात्र में घोड़े पर आएंगी मां, हाथी पर करेंगी प्रस्थान

Sun, 03 Oct 2021 09:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 09:51 PM IST
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This time the mother will come on horse in Navratri, will leave on an elephant
शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र सात अक्तूबर से शुरू हो रहा है। वाराणसी से प्रकाशित पंचांग के अनुसार इस वर्ष षष्ठी तिथि का क्षय होने से नवरात्र आठ दिन का रहेगा, जो सात अक्तूबर से 14 अक्तूबर को समाप्त होगा। 15 अक्तूबर को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार माता का आगमन घोड़े पर हो रहा है। जो सामान्य फलदायक है, लेकिन दशमी शुक्रवार को होने से माता का प्रस्थान हाथी पर हो रहा है, जो शुभ फलदायक रहेगा। इससे समस्त व्यक्तियों में नई स्फूर्ति, नव चेतना का संचार होगा। साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।
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13 को महानिशा पूजा, 14 को होगी पूर्णाहुति
पंडित अखिलेश उपाध्याय के अनुसार, इस नवरात्र 12 अक्तूबर को सप्तमी तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि को एक बजकर 49 मिनट तक एवं मूल नक्षत्र का योग होने से पंडालों में मूर्तियों की स्थापना का कार्य इसी दिन होगा। 13 अक्तूबर को महाअष्टमी है। इस दिन अष्टमी तिथि रात्रि 11 बजकर 42 मिनट तक है। अष्टमी का उपवास इसी दिन रखा जाएगा। महानिशा पूजन और रात्रि में बलिदानिक कार्य भी इसी दिन किए जाएंगे। 14 अक्तूबर नवमी तिथि रात्रि नौ बजकर 53 मिनट तक है। इस दिन मां दुर्गा के पूजन-अर्चन एवं पूर्णाहुति के लिए सूर्योदय से रात्रि नौ बजकर 53 मिनट का समय उत्तम है। 15 अक्तूबर को व्रत के पारण के साथ ही इसी दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।
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यह है कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित अखिलेश उपाध्याय के मुताबिक, सात अक्तूबर को प्रतिपदा तिथि दिन में तीन बजकर 28 मिनट तक है। ऐसे में सूर्योदय से प्रतिपदा तीन बजकर 28 मिनट के भीतर कभी भी कलश स्थापना की जा सकती है। इसके लिए प्रात: छह बजकर 10 मिनट से छह बजकर 40 मिनट तक (कन्या लग्न-स्वभाव लग्न में), पुन: 11 बजकर 14 मिनट से दिन में एक बजकर 19 मिनट तक (धनु लग्न द्विस्भाव लग्न), इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक), ये तीनों मुहूर्त कलश स्थापना के लिए प्रशस्त हैं।
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ऐसे करें पूजन-अर्चन
पंडित अखिलेश उपाध्याय के अनुसार, नवरात्र का पूर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोएं। उस पर विधि पूर्वक कलश स्थापित करें। कलश पर देवी जी की मूर्ति (धातु या मिट्टी) अथवा चित्रपट स्थापित करें। नित्यकर्म समाप्त कर पूजा सामग्री एकत्रित कर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें तथा आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें। रक्षादीपक जला लें। सर्वप्रथम क्रमश: गणेश-अंबिका, कलश (वरुण), मातृका पूजन, नवग्रहों तथा दिगपालों का पूजन करें। शास्त्रसम्मत एवं षोडशोपचार से पूजन करें।
शारदीय नवरात्र का कार्यक्रम
07 अक्तूबर मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
08 अक्तूबर मां ब्रह्मचारिणी पूजा
09 अक्तूबर मां चंद्रघंटा पूजा
10 अक्तूबर मां कुष्मांडा पूजा
11 अक्तूबर मां स्कंदमाता और मां कात्यायनी पूजा
12 अक्तूबर मां कालरात्रि पूजा
13 अक्तूबर मां महागौरी पूजा
14 अक्तूबर मां सिद्धिदात्री पूजा
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