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Ballia News: अंग्रेजी, संस्कृत और विज्ञान पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं
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इंदरपुर। नगरा क्षेत्र में स्थित राम-लक्ष्मण सिंह बालिका उमा विद्यालय सरायचावट में शिक्षकों की कमी है। विद्यालय की मान्यता कक्षा 6 से 10वीं तक है। पांच कक्षाएं हैं। शिक्षकों की कमी से छात्राओं की संख्या घटती गई, इस समय महज 60 छात्राएं यहां पढ़ती हैं। शिक्षिकाएं सिर्फ तीन हैं। संस्कृत, गणित व सामाजिक विषय की ही पढ़ाई होती है। अंग्रेजी, संस्कृत व विज्ञान के लिए कोई अध्यापिका नहीं है।
कभी इस विद्यालय में बालिकाओं की तादाद काफी अच्छी थी। क्योंकि इस क्षेत्र में माध्यमिक स्तर पर छात्राओं को शिक्षा के लिए यही एक मात्र बालिका विद्यालय है। अन्य विद्यालय को-एजुकेशन के हैं। वर्तमान शिक्षा सत्र में शिक्षिकाओं ने छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया लेकिन कोई असर नहीं पड़ा है। वहीं समीप के जनता इंटर कालेज में छात्राओं की संख्या करीब 500 के आसपास है। यहां पर छात्रों से अधिक छात्राएं हैं।
प्रभारी प्रधानाचार्य निशा सिंह का कहना है कि शिक्षिकाओं की कमी से छात्राओं का एडमिशन नहीं होता है। आयोग से भर्ती नहीं की जा रही है। जो छात्राएं हैं उनको पढ़ाया जा रहा है। सभी परिचारकों को प्रतिदिन विद्यालय आने को कहा गया है। नगरा के खंड शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि राम-लक्ष्मण सिंह बालिका उमा विद्यालय सरायचावट की जांच कर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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कभी इस विद्यालय में बालिकाओं की तादाद काफी अच्छी थी। क्योंकि इस क्षेत्र में माध्यमिक स्तर पर छात्राओं को शिक्षा के लिए यही एक मात्र बालिका विद्यालय है। अन्य विद्यालय को-एजुकेशन के हैं। वर्तमान शिक्षा सत्र में शिक्षिकाओं ने छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया लेकिन कोई असर नहीं पड़ा है। वहीं समीप के जनता इंटर कालेज में छात्राओं की संख्या करीब 500 के आसपास है। यहां पर छात्रों से अधिक छात्राएं हैं।
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प्रभारी प्रधानाचार्य निशा सिंह का कहना है कि शिक्षिकाओं की कमी से छात्राओं का एडमिशन नहीं होता है। आयोग से भर्ती नहीं की जा रही है। जो छात्राएं हैं उनको पढ़ाया जा रहा है। सभी परिचारकों को प्रतिदिन विद्यालय आने को कहा गया है। नगरा के खंड शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि राम-लक्ष्मण सिंह बालिका उमा विद्यालय सरायचावट की जांच कर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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