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कोरोना संक्रमित की मौत के बाद हो सम्मानजनक हो विदाई

Fri, 03 Jul 2020 09:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2020 09:42 PM IST
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'The risk of infection from an infected body is reduced in four hours'
सीफार द्वारा आयोजित आनलाइन बेविनार में शामिल कई राज्यों के विशेषज्ञ। - फोटो : BALLIA
बलिया। कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद शव से संक्रमण फैलने का खतरा चार घंटे बाद कम हो जाता है। ऐसे में डरें नहीं शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए मृतक का अंतिम संस्कार करें। ये बातें शुक्रवार को सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित ‘कोविड-19 संक्रमित मृतक के शरीर की व्यवस्था और अंतिम संस्कार’ विषयक राष्ट्रीय वेबिनार में विशेषज्ञों ने कहीं।
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वेबिनार में उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, नई दिल्ली समेत कई राज्यों के विषय-विशेषज्ञ और मीडिया के लोग शामिल हुए। सीफार की निदेशक अखिला शिवदास ने संक्रमित शव के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए। देश में कोरोना संक्रमित के शवों से दूरी बनाने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं जो चिंता का विषय हैं। इस संबंध में नजरिया बदलना होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. वंदना प्रसाद ने कहा कि कोरोना मृतक के प्रति भेदभाव ठीक नहीं है। मृत शरीर से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। शव पर भी अधिकतम चार घंटे तक ही वायरस टिक सकता है। डॉ. टी सुंदर रमन ने संक्रमित के शव के प्रति समाज में फैले भय और भ्रांतियों का खंडन किया। कहा कि संक्रमित शव से कोरोना फैलने का अभी तक का कोई भी केस दर्ज नहीं हुआ है। आईआईटी दिल्ली में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. दिनेश मोहन ने बताया कि शव से संक्रमण का खतरा नहीं है। लोगों को चाहिए कि शव के बारे में अनावश्यक भ्रांति न पालें। सिर्फ सावधानियां रखनी होंगी। मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. जॉन दयाल ने कहा कि संक्रमण से मौत के बाद बदले व्यवहार की जो घटनाएं आई हैं, वे दुखद हैं। दाह-संस्कार या दफनाने के बाद तो संक्रमण के प्रसार का कोई सवाल ही नहीं उठता है, लेकिन फिर भी भय का माहौल है जिसे दूर करना होगा।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता नताशा बधवार ने कहा कि संक्रमित की मृत्यु के बाद अपेक्षित सम्मान मिलना चाहिए। तमाम भ्रांतियां हैं जिन्हें दूर करना होगा। इस कार्य में मीडिया का अहम योगदान हो सकता है। हर्ष मंदर ने कहा कि भय और भ्रांतियों से निपटने के सिर्फ दो ही तरीके हैं। एक तो विज्ञान और दूसरी सटीक सूचना। इन दोनों तरीकों से लोगों के बीच फैले भय और भ्रांति को समाप्त करना होगा।
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सम्मानजनक विदाई का सबका अधिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति की मौत पर उसे सम्मानजनक विदा करना चाहिए। संक्रमित मृतकों का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा करने में कोई ख़तरा नहीं है। उन्हें दफ़नाने या उनका दाह संस्कार करने से कोरोना का संक्रमण नहीं फैलता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मृतकों को दफनाने के संबंध में 15 मार्च को एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया था। इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि मृतक के परिजन अंतिम बार अपने प्रियजन का दर्शन कर सकते हैं। इसमें वैसे सभी धार्मिक कार्यों की भी अनुमति दी गई थी, जिन्हें बिना शारीरिक संपर्क के पूरा किया जा सकता है।
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