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संसाधन मिले हैं बेहद कम पर यकीन मानें यहां के रंगमंच में है बहुत दम

Sun, 27 Mar 2022 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 11:18 PM IST
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The resources are very less, but believe me, there is a lot of power in the theater here.
बलिया। जिले में रंगमंच की समृद्धशाली परंपरा रही हैं। आधुनिक हिंदी रंगमंच के प्रणेता स्वयं भारतेंदु हरिश्चंद्र 1884 में बलिया ददरी मेले के मंच पर बलिया नाट्य समाज के आह्वान पर भारतेंदु हरिश्चंद्र ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक का मंचन करने आए थे। तब से ददरी मेले के सांस्कृतिक मंच का नाम भारतेंदु लोककला मंच पड़ गया।
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सन् 1953 में तत्कालीन जिलाधिकारी महेश चंद्र शर्मा के प्रेरणा से कलेक्ट्रेट ड्रामेटिक एसोसिएशन की स्थापना हुई। जिसके द्वारा अशोक, कुणाल, कोणार्क, आम्रपाली, होरी आदि नाटकों का मंचन हुआ। तत्कालीन जिलाधिकारी महेश चंद्र शर्मा ने ही कलेक्ट्रेट में ड्रामा हॉल का निर्माण करवाया था। सत्तर के दशक में रंगकर्मी व संगीतज्ञ पंडित सीताराम चतुर्वेदी द्वारा बलिया के रंगमंच को नई ऊंचाई दी गई। इस दौर में उनके द्वारा लिखित व निर्देशित दर्जनों नाटकों की सैकड़ों प्रस्तुतियां हुई। उनमें आचार्य विष्णुगुप्त, दन्त मुद्रा, सेनापति पुष्यमित्र, कुणाल, अजंता, बेचारा केशव, गुंडा, शबरी, आदि नाटकों का मंचन हुआ। उस दौर में बलिया में लोग टिकट खरीद कर नाटक देखते थे। वर्तमान समय में देखें तो बलिया के रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का काम संकल्प के रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने किया हैं। आशीष ने संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था की स्थापना कर जिले में आधुनिक रंगमंच की नींव डाली। रंगकर्मी व रंग निर्देशक आशीष त्रिवेदी के निर्देशन में अब तक दो दर्जन से अधिक नाटकों का मंचन राष्ट्रीय स्तर पर देश के बड़े मंचों पर किया गया। संस्था द्वारा प्रदर्शित नाटकों में महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर का नाटक बिदेसिया (100 से ज्यादा प्रस्तुति ), गबरघीचोर, बेटी बेचवा, हबीब तनवीर का नाटक चरनदास चोर, गुरूशरण सिंह का लिखा इंकलाब जिंदाबाद, मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन, हृषिकेश सुलभ का अमली, पीयूष मिश्रा का गगन दमामा बाजयो, स्वदेश दीपक का कोर्ट मार्शल, प्रेमचंद की दर्जनों कहानियों के अलावा हिन्दी कविताओं का रंग कोलाज प्रमुख मंचीय प्रस्तुतियां रहीं। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर सैकड़ों नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति की गई है। विपरीत परिस्थितियों में भी रंगमंच के लिए समर्पित आशीष त्रिवेदी की एकल नाटक सुगना और भगत सिंह मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
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जिले के सैकड़ों रंगकर्मी बना रहे मुकाम
वर्तमान में संकल्प से प्रशिक्षण प्राप्त कर जिले के सैकड़ों युवा अभिनय के क्षेत्र में मुकाम बनाने में जुटे हैं। उनमें आनंद कुमार चौहान, राकेश विक्रम सिंह, रवि प्रकाश आनंद, शैलेन्द्र मिश्र, अभय सिंह कुशवाहा, रेनू सिंह, श्वेता त्रिवेदी, नम्रता त्रिवेदी, अपर्णा चौबे, सुनीता पाठक, अतुल राय, संतोष वर्मा, सुनील शर्मा, चंदन भारद्वाज, अमित पांडेय, स्मृति सिंह, ओमप्रकाश, चन्दन गुप्ता, नितीश पाण्डेय, सोनी, ट्विंकल गुप्ता, बिट्टू प्रत्यंचा, अनुपम पाण्डेय इत्यादि प्रमुख हैं।
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जूनियर फेलोशिप अवार्ड भी मिला
देशभर में दर्जनों सम्मान से सम्मानित संस्था संकल्प के सचिव रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से जूनियर फेलोशिप अवार्ड भी मिल चुका है। संकल्प संस्था की सक्रियता से प्रभावित होकर बलिया में और भी नाट्य संस्थाओं की स्थापना हुई, जिसमें मुख्य रूप से स्वराज दर्पण, जागरूक शिक्षण संस्थान, अपरमिता, वाइल्ड बंच, दस्तक इत्यादि प्रमुख हैं।

रंगमंच और उससे जुड़े लोगों को प्रोत्साहन की दरकार
रंगमंच को प्रोत्साहन की दरकार रंगकर्मियों के सामने आने वाला आर्थिक संकट एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसके वजह से बहुत सारे प्रतिभावान कलाकार अपनी कला का गला घोंट दूसरे कामों में लग जाते हैं। जरूरी है कि समाज के जागरूक लोग आगे आएं और सरकारी स्तर पर इन कलाकारों को प्रोत्साहन मिले।
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