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गंगा का जलस्तर कम होने के बाद भी कम नहीं हुई पीड़ितों की मुश्किलें
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रामगढ़। गंगा का पानी गांव से निकलने के बाद भी बाढ़ पीडि़तों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात यह है कि आज भी संपर्क मार्ग पर कीचड़ फैला हुआ है तो कहीं सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। गांव के आसपास बने गड्ढे में बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे दुर्गंध उठने शुरू हो गए हैं।
ग्राम सभा गोपालपुर के पीडि़तों का कहना है कि पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव में पहुंचना मुनासिब नहीं समझ रहा है। अगर कोई आता भी है तो सड़कों तक पहुंच कर करवाई के नाम पर खानापूर्ति कर कोरा आश्वासन देकर लौट जा रहा है। इस बार तो शासन स्तर से प्रति कार्डधारक को तीन लीटर मिट्टी का तेल मिला है। उसके बाद तहसील प्रशासन द्वारा फरमान सुनाया जा रहा है कि राहत सामग्री चाहिए तो अपना आधार कार्ड जमा कर पहले रजिस्ट्रेशन कराइए। उदई छपरा निवासी बाढ़ पीडि़त राज किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रधान मनोज यादव का कहना है कि कई एक ऐसे परिवार हैं जिनके घर में रखे सारे सामान बाढ़ की पानी में बह गए हैं। उनको शासन स्तर से मिलने वाली सहायता कैसे मिल पाएगी। बाढ़ का पानी जब गांव में प्रवेश किया तो हालात यह था कि आदमी किसी तरह अपने माल मवेशी व बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि गांव में जमा बाढ़ का पानी से अब दुर्गंध उठने शुरू हो गए हैं। गुहार के बाद भी गांव में कहीं पर भी ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं हुआ। फसल जो सड़ गई उनसे भी दुर्गंध आने लगी है। हम लोग मजदूर किस्म के लोग हैं। दिन का मजदूरी न करे तो बच्चे भी भूखे पेट सो जाएंगे। क्योंकि शासन का फरमान है कि जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं होगा तब तक पीडि़तों की सहायता राशि नहीं मिल पाएगी।
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ग्राम सभा गोपालपुर के पीडि़तों का कहना है कि पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव में पहुंचना मुनासिब नहीं समझ रहा है। अगर कोई आता भी है तो सड़कों तक पहुंच कर करवाई के नाम पर खानापूर्ति कर कोरा आश्वासन देकर लौट जा रहा है। इस बार तो शासन स्तर से प्रति कार्डधारक को तीन लीटर मिट्टी का तेल मिला है। उसके बाद तहसील प्रशासन द्वारा फरमान सुनाया जा रहा है कि राहत सामग्री चाहिए तो अपना आधार कार्ड जमा कर पहले रजिस्ट्रेशन कराइए। उदई छपरा निवासी बाढ़ पीडि़त राज किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रधान मनोज यादव का कहना है कि कई एक ऐसे परिवार हैं जिनके घर में रखे सारे सामान बाढ़ की पानी में बह गए हैं। उनको शासन स्तर से मिलने वाली सहायता कैसे मिल पाएगी। बाढ़ का पानी जब गांव में प्रवेश किया तो हालात यह था कि आदमी किसी तरह अपने माल मवेशी व बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि गांव में जमा बाढ़ का पानी से अब दुर्गंध उठने शुरू हो गए हैं। गुहार के बाद भी गांव में कहीं पर भी ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं हुआ। फसल जो सड़ गई उनसे भी दुर्गंध आने लगी है। हम लोग मजदूर किस्म के लोग हैं। दिन का मजदूरी न करे तो बच्चे भी भूखे पेट सो जाएंगे। क्योंकि शासन का फरमान है कि जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं होगा तब तक पीडि़तों की सहायता राशि नहीं मिल पाएगी।
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