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Ballia News: हाईकोर्ट ने तहसीलदार के आदेश को किया खारिज
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बैरिया। उपजिला मजिस्ट्रेट और तहसीलदार मजिस्ट्रेट के आदेश को उच्च न्यायालय ने निरस्त करते हुए दीवानी न्यायालय के आदेश को बरकरार रखने का आदेश दिया है। मामला चिरंजी छपरा लालगंज का है।
विजय प्रसाद के दो लड़के हैं। विजय प्रसाद ने एक रजिस्टर्ड वसीयत अपने बड़े पुत्र दीप नारायण के नाम से लिखी थी, जिसे दीवानी न्यायालय में उनके छोटे पुत्र प्रेमचंद्र द्वारा उनको खारिज करने के लिए दावा दाखिल किया गया था। दीवानी न्यायालय ने रजिस्टर्ड वसीयत को सही मानते हुए आदेश पारित कर दिया। नामांतरण प्रक्रिया में तहसीलदार बैरिया ने वरासतन आदेश पारित कर दोनों लड़कों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया।
अपील में उपजिलाधिकारी बैरिया और निगरानी में बोर्ड आफ रिवेन्यू इलाहाबाद ने भी तहसीलदार के आदेश को कायम रखते हुए पुष्ट कर दिया। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया। रिट याचिका दीप नारायण प्रसाद की तरफ से दाखिल की गई। उच्च न्यायालय ने रिट याचिका को स्वीकार किया। वहीं, उच्च न्यायालय ने अदालतों की ओर से दिए आदेश को भी राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत शक्ति का गलत प्रयोग मानते हुए तहसीलदार न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया।
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सभी को निर्देशित किया कि दीवानी न्यायालय की ओर से पारित आदेश के आधार पर दीप नारायण का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज करें। याचिकाकर्ता के तरफ से अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौबे और अधिवक्ता विनय कुमार गुप्ता ने बहस प्रस्तुत की। इस बाबत तहसीलदार बैरिया सुदर्शन कुमार ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश की पत्रावली मुझे प्राप्त हुई है। आदेश का अनुपालन किया जाएगा।
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विजय प्रसाद के दो लड़के हैं। विजय प्रसाद ने एक रजिस्टर्ड वसीयत अपने बड़े पुत्र दीप नारायण के नाम से लिखी थी, जिसे दीवानी न्यायालय में उनके छोटे पुत्र प्रेमचंद्र द्वारा उनको खारिज करने के लिए दावा दाखिल किया गया था। दीवानी न्यायालय ने रजिस्टर्ड वसीयत को सही मानते हुए आदेश पारित कर दिया। नामांतरण प्रक्रिया में तहसीलदार बैरिया ने वरासतन आदेश पारित कर दोनों लड़कों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया।
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अपील में उपजिलाधिकारी बैरिया और निगरानी में बोर्ड आफ रिवेन्यू इलाहाबाद ने भी तहसीलदार के आदेश को कायम रखते हुए पुष्ट कर दिया। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया। रिट याचिका दीप नारायण प्रसाद की तरफ से दाखिल की गई। उच्च न्यायालय ने रिट याचिका को स्वीकार किया। वहीं, उच्च न्यायालय ने अदालतों की ओर से दिए आदेश को भी राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत शक्ति का गलत प्रयोग मानते हुए तहसीलदार न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया।
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सभी को निर्देशित किया कि दीवानी न्यायालय की ओर से पारित आदेश के आधार पर दीप नारायण का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज करें। याचिकाकर्ता के तरफ से अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौबे और अधिवक्ता विनय कुमार गुप्ता ने बहस प्रस्तुत की। इस बाबत तहसीलदार बैरिया सुदर्शन कुमार ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश की पत्रावली मुझे प्राप्त हुई है। आदेश का अनुपालन किया जाएगा।