मझौवां। हुकुम छपरा के पावन गंगा तट पर चल रहे नौ दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के सातवें दिन सायंकाल का दृश्य श्रद्धा, भक्ति और दिव्यता का अद्भुत से सराबोर नजर आया। जैसे ही संध्या का आंचल गंगा की लहरों पर उतरा, पूरा तट आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट से पहुंचे पांच पंडितों ने वैदिक विधि-विधान के साथ मां गंगा का पूजन कर भव्य गंगा महाआरती का शुभारंभ किया। सुसज्जित वेदियों पर पारंपरिक परिधान में सजे पंडितों ने जब एक साथ दीपमालाएं प्रज्वलित कर समवेत स्वर में आरती गाई तो पूरा वातावरण हर-हर गंगे और जय मां गंगे के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। हाथों में बहुस्तरीय दीपदान लिए पंडितों की सुसंगठित और लयबद्ध गतियां, धूप-दीप और अगरबत्ती की महक, शंखनाद और घंटों की गूंज इन सबने मिलकर ऐसा अलौकिक दृश्य रच दिया, मानो देवताओं का साक्षात आगमन हो गया हो। गंगा की लहरों पर पड़ती दीपों की सुनहरी छटा ने पूरे तट को दिव्य आभा से भर दिया। इस दिव्य महाआरती को देखने के लिए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग गंगा तट पर उमड़ पड़े। हर चेहरा आस्था से दमक रहा था, हर हृदय भक्ति में डूबा नजर आ रहा था। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर आरती में सहभागी बने और मां गंगा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा अर्पित करते दिखे। पूरे गंगा तट पर दीपों की जगमगाहट, भक्ति के स्वर और श्रद्धा का सैलाब प्रतीत हो रहा था।