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ऑनलाइन डीएल बनवाने में हो रहा खेल: कंप्यूटर को रिमोट पर लेकर पास करा रहे परीक्षा
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बलिया। परिवहन विभाग में दलालों का नेटवर्क तोड़ने के लिए सरकार ने लाइसेंस की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दी। जब से आधार से लिंक करके घर बैठे लर्निंग लाइसेंस बनवाने की व्यवस्था शुरू हुई तब से दलालों के काम करने का तरीका ही बदल गया है। वे कंप्यूटर रिमोट पर लेकर प्रश्नों के जवाब देने लगे हैं।
नए सिस्टम के तहत पब्लिक को लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ जाने की जरूरत ही नहीं है। इससे दलालों की बन आई है। वे लाइसेंस के लिए स्लॉट दिलाने सेलकर परीक्षा पास कराने तक का सारा काम ठेके पर कर रहे हैं। लर्निंग लाइसेंस की फीस 350 रुपये है लेकिन दलाल 2500 रुपये में खुलेआम ठेका ले रहे हैं। इसमें आवेदन करने, स्लॉट दिलवाने और परीक्षा पास करवाने तक का पूरा पैकेज शामिल है।
शिवम ने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। परीक्षा पास नहीं कर सका। उसने दलाल से संपर्क किया और एक हजार रुपये में बत तय हुई। शिवम अपने घर पर ही लैपटॉप के सामने बैठा था। उसके लैपटॉप को रिमोट पर लेकर दलाल ने परीक्षा दे दी। शिवम का लर्निंग लाइसेंस बन गया। इसकी शिकायत आरटीओ दफ्तर पहुंची लेकिन आरोप साबित न ससका क्योंकि इस तरह की गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए विभाग पास कोई इंतजाम नहीं है। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जब से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से महज पांच फीसदी लोग परीक्षा में फेल हो रहे हैं जबकि इससे पहले 40 फेल हो जाते थे।
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आईटी विशेषज्ञ रजनीकांत सिंह का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए आरटीओ के सॉफ्टवेयर में चेक पाइंट लगवाने की जरूरत है। कोई जिस लैपटॉप से परीक्षा दे रहा है तो उसे रिमोट पर लेने से रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए। एक ही आईपी एड्रेस से लगातार आवेदन करने पर भी रोक लगाने की जरूरत है। इसी से दलालों के वर्चस्व को तोड़ा जा सकता है।
जनसेवा केंद्र और साइबर कैफे के कारोबार से जुड़े लोग साफ्टवेयर का गलत उपयोग कर रहे हैं। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही इस पर रोक लगाने की प्रभावी व्यवस्था की जाएगी।
-अरुण राय, एआरटीओ (प्रशासन),परिवहन विभाग
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नए सिस्टम के तहत पब्लिक को लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ जाने की जरूरत ही नहीं है। इससे दलालों की बन आई है। वे लाइसेंस के लिए स्लॉट दिलाने सेलकर परीक्षा पास कराने तक का सारा काम ठेके पर कर रहे हैं। लर्निंग लाइसेंस की फीस 350 रुपये है लेकिन दलाल 2500 रुपये में खुलेआम ठेका ले रहे हैं। इसमें आवेदन करने, स्लॉट दिलवाने और परीक्षा पास करवाने तक का पूरा पैकेज शामिल है।
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शिवम ने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। परीक्षा पास नहीं कर सका। उसने दलाल से संपर्क किया और एक हजार रुपये में बत तय हुई। शिवम अपने घर पर ही लैपटॉप के सामने बैठा था। उसके लैपटॉप को रिमोट पर लेकर दलाल ने परीक्षा दे दी। शिवम का लर्निंग लाइसेंस बन गया। इसकी शिकायत आरटीओ दफ्तर पहुंची लेकिन आरोप साबित न ससका क्योंकि इस तरह की गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए विभाग पास कोई इंतजाम नहीं है। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जब से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से महज पांच फीसदी लोग परीक्षा में फेल हो रहे हैं जबकि इससे पहले 40 फेल हो जाते थे।
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आईटी विशेषज्ञ रजनीकांत सिंह का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए आरटीओ के सॉफ्टवेयर में चेक पाइंट लगवाने की जरूरत है। कोई जिस लैपटॉप से परीक्षा दे रहा है तो उसे रिमोट पर लेने से रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए। एक ही आईपी एड्रेस से लगातार आवेदन करने पर भी रोक लगाने की जरूरत है। इसी से दलालों के वर्चस्व को तोड़ा जा सकता है।
जनसेवा केंद्र और साइबर कैफे के कारोबार से जुड़े लोग साफ्टवेयर का गलत उपयोग कर रहे हैं। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही इस पर रोक लगाने की प्रभावी व्यवस्था की जाएगी।
-अरुण राय, एआरटीओ (प्रशासन),परिवहन विभाग