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ओडीएफ गांवों का हाल बेहाल, ओडीएफ प्लस की भी गति सुस्त
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बलिया। तमाम गांवों को काफी पहले ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। इससे साबित होता है कि जिले में घर-घर शौचालय बन गए हैं। उस समय गांवों में निगरानी समिति भी बनाई गई थीं, जिले स्तर पर डीसी और ब्लाक स्तर पर बीसी की तैनाती की गई थी। अब ये टीमें पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी हैं। तमाम शौचालयों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। बहुत से शौचालयों का निर्माण अभी भी अधूरा है। इस वजह से लोग अभी भी खुले में शौच जा रहे हैं।
जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। हालांकि इसके बाद ओडीएफ प्लस के तहत छूटे परिवारों का सर्वे किया गया। वर्ष 2021-22 मे ओडीएफ प्लस को लागू किया गया। अब तक जिले में कुल 402840 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओडीएफ प्लस में भी अभी तक 35 राजस्व गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। अभी भी 3391 शौचालय निर्माणाधीन हैं।
अब कहीं नहीं दिखते स्वेच्छाग्राही
बलिया। गांवों को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2017-18 में ट्रिगरिंग की व्यवस्था की गई और इसके लिए गांव के लोगों को बतौर स्वेच्छाग्राही बनाया गया। कुल 380 स्वेच्छाग्राही का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से कुल 40 लाख की धनराशि खर्च की गई। स्वेच्छाग्राही सीटी का घंटी बजाकर खुले में शौच करने वालों को मना करने का काम करते थे। लेकिन कुछ माह के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई।
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सैकड़ों परिवार आज भी हैं शौचालय विहीन
बैरिया। कागजों में गांवों में शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार शौचालय विहीन है। ग्राम पंचायतों के मलिन बस्तियों के घर शौचालय न होने से महिलाएं आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। बैरिया विकास खंड के कई मुख्य मार्गो के किनारे लोग खुले में शौच करते हैं। बीते दो-तीन वर्ष पूर्व घंटी बजाओ अभियान चलाकर खुले में शौच रोकने के प्रयास किया गया लेकिन उक्त अभियान भी फ्लॉप हो गया। खास बात यह है कि जरूरतमंदों को शौचालय का लाभ मिलना आज भी दूर की कौड़ी है जबकि पहुंच वाले लोग शौचालय का लाभ ले लेते हैं। इस बाबत खंड विकास अधिकारी श्याम सुन्दर यादव ने कहा कि जरूरतमंदों को शौचालय बनवाया जाएगा।
सभी गांव हैं ओडीएफ, सड़कों पर गंदगी का अंबार
रसड़ा। ब्लॉक के सभी गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि आज भी लोग ग्रामीण अंचलों में खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा गावों में लगभग 23 हजार व्यक्तिगत शौचालय एवं 72 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। फिर भी सड़कों पर या खेतों में लोग खुले में शौच को जाते हैं। आज भी गावों की सड़कों पर गंदगी का अंबार है। एडीओ पंचायत ज्ञान प्रकाश पांडेय ने बताया कि 72 सामुदायिक शौचालय बने है जिसमें लगभग 22 सामुदायिक शौचालय को कुछ कमियों की वजह से चालू नहीं किया जा सका है जबकि 50 सामुदायिक शौचालय चालू हैं।
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सभी गांव ओडीएफ, बिना कुछ लिखा लगा दिया बोर्ड
जयप्रकाश नगर। विकास खंड मुरली छपरा में कुल 25 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी पंचायतों को सम्बंधित विभाग द्वारा कई गांवों के बाहर बिना लिखा कुछ लिखा बोर्ड लगाकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। यही नहीं अधिकारियों ने प्रधानों के साथ शौचमुक्त पंचायत का बोर्ड लगाकर फीता भी काट दिया, लेकिन हकीकत इससे ठीक विपरीत है। आज भी यदि इसकी जांच की जाय तो बीस प्रतिशत शौचालय पूर्ण निर्मित तो चालीस प्रतिशत शौचालय अर्धनिर्मित मिलेंगे। आज भी कई पंचायतों में कई लाभार्थियों को आधा पैसा ही प्राप्त हो सका है।
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बेस लाइन सर्वे के आंकड़े
2019 में ओडीएफ राजस्व गांव- 1843
ओडीएफ प्लस में शामिल राजस्व गांव- 1843
कुल बने शौचालय- 402840
शौचालय निर्माणाधीन- 3391
सामुदायिक शौचालय लक्ष्य-818
सामुदायिक शौचालय पूर्ण- 734
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बेसलाइन सर्वे के आधार पर पूर्व के वर्षों में सभी गांवों को ओडीएफ किया गया था। अब जिले के सभी राजस्व गांवों को ओडीएफ प्लस में शामिल किया गया है। करीब छह माह पहले ही यह योजना लागू हुई है। कई गांवों में शौचालयों का निर्माण चल रहा है जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। योजना के तहत 35 राजस्व गांवों को ओडीएफ किया गया है।
- शैलेश ओझा, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया
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जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। हालांकि इसके बाद ओडीएफ प्लस के तहत छूटे परिवारों का सर्वे किया गया। वर्ष 2021-22 मे ओडीएफ प्लस को लागू किया गया। अब तक जिले में कुल 402840 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओडीएफ प्लस में भी अभी तक 35 राजस्व गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। अभी भी 3391 शौचालय निर्माणाधीन हैं।
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अब कहीं नहीं दिखते स्वेच्छाग्राही
बलिया। गांवों को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2017-18 में ट्रिगरिंग की व्यवस्था की गई और इसके लिए गांव के लोगों को बतौर स्वेच्छाग्राही बनाया गया। कुल 380 स्वेच्छाग्राही का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से कुल 40 लाख की धनराशि खर्च की गई। स्वेच्छाग्राही सीटी का घंटी बजाकर खुले में शौच करने वालों को मना करने का काम करते थे। लेकिन कुछ माह के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई।
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सैकड़ों परिवार आज भी हैं शौचालय विहीन
बैरिया। कागजों में गांवों में शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार शौचालय विहीन है। ग्राम पंचायतों के मलिन बस्तियों के घर शौचालय न होने से महिलाएं आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। बैरिया विकास खंड के कई मुख्य मार्गो के किनारे लोग खुले में शौच करते हैं। बीते दो-तीन वर्ष पूर्व घंटी बजाओ अभियान चलाकर खुले में शौच रोकने के प्रयास किया गया लेकिन उक्त अभियान भी फ्लॉप हो गया। खास बात यह है कि जरूरतमंदों को शौचालय का लाभ मिलना आज भी दूर की कौड़ी है जबकि पहुंच वाले लोग शौचालय का लाभ ले लेते हैं। इस बाबत खंड विकास अधिकारी श्याम सुन्दर यादव ने कहा कि जरूरतमंदों को शौचालय बनवाया जाएगा।
सभी गांव हैं ओडीएफ, सड़कों पर गंदगी का अंबार
रसड़ा। ब्लॉक के सभी गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि आज भी लोग ग्रामीण अंचलों में खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा गावों में लगभग 23 हजार व्यक्तिगत शौचालय एवं 72 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। फिर भी सड़कों पर या खेतों में लोग खुले में शौच को जाते हैं। आज भी गावों की सड़कों पर गंदगी का अंबार है। एडीओ पंचायत ज्ञान प्रकाश पांडेय ने बताया कि 72 सामुदायिक शौचालय बने है जिसमें लगभग 22 सामुदायिक शौचालय को कुछ कमियों की वजह से चालू नहीं किया जा सका है जबकि 50 सामुदायिक शौचालय चालू हैं।
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सभी गांव ओडीएफ, बिना कुछ लिखा लगा दिया बोर्ड
जयप्रकाश नगर। विकास खंड मुरली छपरा में कुल 25 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी पंचायतों को सम्बंधित विभाग द्वारा कई गांवों के बाहर बिना लिखा कुछ लिखा बोर्ड लगाकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। यही नहीं अधिकारियों ने प्रधानों के साथ शौचमुक्त पंचायत का बोर्ड लगाकर फीता भी काट दिया, लेकिन हकीकत इससे ठीक विपरीत है। आज भी यदि इसकी जांच की जाय तो बीस प्रतिशत शौचालय पूर्ण निर्मित तो चालीस प्रतिशत शौचालय अर्धनिर्मित मिलेंगे। आज भी कई पंचायतों में कई लाभार्थियों को आधा पैसा ही प्राप्त हो सका है।
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बेस लाइन सर्वे के आंकड़े
2019 में ओडीएफ राजस्व गांव- 1843
ओडीएफ प्लस में शामिल राजस्व गांव- 1843
कुल बने शौचालय- 402840
शौचालय निर्माणाधीन- 3391
सामुदायिक शौचालय लक्ष्य-818
सामुदायिक शौचालय पूर्ण- 734
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बेसलाइन सर्वे के आधार पर पूर्व के वर्षों में सभी गांवों को ओडीएफ किया गया था। अब जिले के सभी राजस्व गांवों को ओडीएफ प्लस में शामिल किया गया है। करीब छह माह पहले ही यह योजना लागू हुई है। कई गांवों में शौचालयों का निर्माण चल रहा है जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। योजना के तहत 35 राजस्व गांवों को ओडीएफ किया गया है।
- शैलेश ओझा, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया