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रेड जोन में दर्ज शहर की आबोहवा, सैर करना ठीक नहीं

Mon, 27 Dec 2021 11:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 11:48 PM IST
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The climate of the city recorded in the Red Zone, it is not good to walk
बलिया। हवा में प्रदूषण की मात्रा इन दिनों फिर बढ़ रही है। शहर की जैसी हवा है, उसमें सुबह-शाम सैर करना खतरे से खाली नहीं रह गया है। प्रदूषित हवा के कारण डॉक्टर सैर से बचने की सलाह दे रहे हैं। सोमवार को बलिया का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रेड जोन में रहा। यह स्थिति पिछले दो-तीन दिनों से बनी हुई है और इसमें हल्का उतार-चढ़ाव हो रहा है।
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इन दिनों हवा में प्रदूषण बढ़ा हुआ है। सोमवार की शाम को शहर का एक्यूआई 162 रहा जो रेड जोन में माना जाता है। यह स्थिति पिछले दो-तीन दिनों से बनी हुई है। हालांकि सोमवार को इसमें मामूली उतार-चढ़ाव होता रहा है। सुबह 4.30 बजे एक्यूआई 162 जो दिन में 10.30 बजे बढ़कर 163 हो गया। अपराह्न साढे तीन बजे हल्का सुधार हुआ और एक्यूआई 162 पर आया जो देरशाम तक बना रहा। रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 141 दर्ज किया गया। लेकिन आधी रात के बाद से 160 से अधिक एक्यूआई रहा। जिले के सिकंदरपुर, बेलथरा बाजार गांव, भीमपुरा नंबर एक के बरेवा व रसड़ा में तो हवा में प्रदूषण की मात्रा और ही अधिक है।
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जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में एक्यूआई की स्थिति
बलिया नगर- 162
बांसडीह- 162
मनियर- 162
सिकंदरपुर- 171
बेल्थरा बाजार गांव- 176
भीमपुरा नंबर एक बरेवा- 176
रसड़ा- 173
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सुबह-शाम भी हवा की गुणवत्ता काफी खराब रह रही है। ऐसे में लोगों को सैर से बचना चाहिए। सोमवार को हवा की गुणवत्ता पिछले चार दिनों की तुलना में करीब डेढ़ गुना खराब हो गई। सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया है।
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-डॉ.गणेश कुमार पाठक,पर्यावरणविद्, बलिया।
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दूषित हवा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक: डॉ स्वर्णकार
एयर इंडेक्स बढ़ने से जिले की आबोहवा स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाकहो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस हवा के संपर्क में कुछ मिनट रहने पर हर किसी के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। खतरनाकपार्टिकुलेट मैटर 10 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले प्रदूषक कण होते हैं। 2.5 माइक्रोमीटर से बड़े कण वायुमार्ग में जमा हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। प्रदूषक के कण फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। फीजिशियन डॉ एके स्वर्णकार ने बताया कि वायु प्रदूषण का सबसे गंभीर प्रभाव फेफड़ों और हृदय पर पड़ता है। इसके चलते खांसी या सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा बढ़ सकता है और पुरानी सांस की बीमारी का विकास हो सकता है।
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