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कमियां देख भड़के मुख्य अभियंता
ballia
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:09 PM IST
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कटानरोधी कार्य, जो मजदूरों की लापरवाही से अधर में पड़ा है।
- फोटो : ballia
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बाढ़ विभाग लखनऊ के मुख्य अभियंता एसके पाल ने रविवार की सुबह दूबेछपरा में चल रहे कटानरोधी कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान मंदगति से हो रहे कार्य, मजदूरों और संसाधनों की कमी पर मातहतों को फटकार लगाई। चेताया कि संसाधन बढ़ाकर मानक के अनुरूप कार्य कराएं अन्यथा भुगतान रोक दिया जाएगा।
दूबेछपरा में 27 मई को कटानरोधी कार्य शुरू हुआ था। उसके बाद क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह ने कार्यो में घोर अनियमितता पाई थी। उसके बाद भी ठेकेदार और बाढ़ विभाग के अधिकारी नहीं चेते। सात जून को औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम सिंह ने भी बाढ़ निरोधक कार्यो में अनियमितता तथा मजदूर और संसाधनों की कमी पाई थी। अधिकारियों को हर हाल में पांच जुलाई तक कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया था। ठेकेदारों ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ही जमकर मानक की धज्जियां उड़ाई। दोनों ठेकेदारों ने 16 मड पंप लगाकर बालू खनन किया, जो स्टीमेट में कहीं नहीं था। यहीं नहीं एक ठेकेदार को तलहटी में छह लेयर में 16 लाख जीओ बैग डालना था।
जिसमें मात्र नौ से दस लाख ही जीओ बैग डाला गया। अब तक मझौंवा, पचरूखिया से लेकर दूबेछपरा में हुए कार्यो में जमकर अनियमितता बरती गई। नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2013 में पचरूखिया और हुकुमछपरा में बने स्पर संख्या 17,18,19 और 23 गंगा की लहरों में बह गए। लेकिन आज तक किसी प्रकार की कोई जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि बाढ विभाग और ठेकेदारों के हौसले बुलंद होते गए। वर्ष 2015 में नौ करोड़ रुपये खर्च कर रिंगबंधे का निर्माण कार्य कराया गया। जो वर्ष 2016 की आई बाढ़ में बह गया। लोगों को ऐसा लगा कि दोषियाें के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन नतीजा आज तक सिफर रहा।
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इधर लगातार बारिश के चलते कटानरोधी कार्य ठप हो गया था। दो दिन से बारिश बंद भी है तो न ही मजदूर है और न ही संसाधन है। इस स्थिति को देखकर मुख्य अभियंता भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह कार्य बहुत ही घटिया तरीके से कराया जा रहा है। संसाधनों को अभाव देख उन्होंने मातहत अफसरों को भी जमकर फटकार लगाई। कहा कि हर हाल में बाढ़ आने से पहले कटानरोधी कार्य पूरा हो जाना चाहिए।
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दूबेछपरा में 27 मई को कटानरोधी कार्य शुरू हुआ था। उसके बाद क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह ने कार्यो में घोर अनियमितता पाई थी। उसके बाद भी ठेकेदार और बाढ़ विभाग के अधिकारी नहीं चेते। सात जून को औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम सिंह ने भी बाढ़ निरोधक कार्यो में अनियमितता तथा मजदूर और संसाधनों की कमी पाई थी। अधिकारियों को हर हाल में पांच जुलाई तक कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया था। ठेकेदारों ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ही जमकर मानक की धज्जियां उड़ाई। दोनों ठेकेदारों ने 16 मड पंप लगाकर बालू खनन किया, जो स्टीमेट में कहीं नहीं था। यहीं नहीं एक ठेकेदार को तलहटी में छह लेयर में 16 लाख जीओ बैग डालना था।
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जिसमें मात्र नौ से दस लाख ही जीओ बैग डाला गया। अब तक मझौंवा, पचरूखिया से लेकर दूबेछपरा में हुए कार्यो में जमकर अनियमितता बरती गई। नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2013 में पचरूखिया और हुकुमछपरा में बने स्पर संख्या 17,18,19 और 23 गंगा की लहरों में बह गए। लेकिन आज तक किसी प्रकार की कोई जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि बाढ विभाग और ठेकेदारों के हौसले बुलंद होते गए। वर्ष 2015 में नौ करोड़ रुपये खर्च कर रिंगबंधे का निर्माण कार्य कराया गया। जो वर्ष 2016 की आई बाढ़ में बह गया। लोगों को ऐसा लगा कि दोषियाें के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन नतीजा आज तक सिफर रहा।
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इधर लगातार बारिश के चलते कटानरोधी कार्य ठप हो गया था। दो दिन से बारिश बंद भी है तो न ही मजदूर है और न ही संसाधन है। इस स्थिति को देखकर मुख्य अभियंता भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह कार्य बहुत ही घटिया तरीके से कराया जा रहा है। संसाधनों को अभाव देख उन्होंने मातहत अफसरों को भी जमकर फटकार लगाई। कहा कि हर हाल में बाढ़ आने से पहले कटानरोधी कार्य पूरा हो जाना चाहिए।