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Ballia News: डेढ़ वर्ष से क्षतिग्रस्त है सरयू पर बना पुल, दोबारा होगी मरम्मत
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बेल्थरारोड। बलिया और देवरिया जिले को विभाजित करने वाली सरयू पर निर्मित पुल लगभग डेढ़ साल से क्षतिग्रस्त है। मुंबई की कंपनी द्वारा चार करोड़ की लागत से 10 माह तक पुल मरम्मत का कार्य किया गया, लेकिन मरम्मत से कोई फायदा नहीं हुआ।
आवागमन शुरू होने पर भारी वाहन के गुजरते समय छठे-सातवें पाए के ज्वाइंट की दरार दो फुट फैल गई। सूचना मिलने पर आनन-फानन में पुल पर पहुंचे सेतु निगम के अधिकारियों ने नौ फुट ऊंचा बैरियर लगाकर पुल से दो पहिया छोड़, सभी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। अब एक बार फिर भोपाल की कंपनी को पुल मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई है। इसे लेकर अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण किया।
अक्तूबर में पुल स्पेशलिस्ट दिल्ली से बीके रैना और आईआईटी के इंजीनियर मंगेश जोशी को बुलाया गया। टीम ने पुल की जांच की और भारी वाहनों पर रोक लगाकर छोटे वाहनों का आवागमन शुरू करा दिया। नवंबर में बीके रैना और मंगेश जोशी ने दूसरी बार पुल का निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि पुल से भारी वाहन हमेशा के लिए बंद रहेंगे या मरम्मत के बाद चल सकते हैं।
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इसके लिए अलग अलग कोण से नक्शा बनाकर अपने साथ लेते गए। दिल्ली में विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ बैठक में निर्णय लिया गया कि मरम्मत के बाद भारी वाहन भी चलेंगे और सरकार को बजट बनाकर सौंप दिया। प्रदेश सरकार ने मुख्य कार्यालय सेतु निगम लखनऊ को चार करोड़ बचे पैसे में मरम्मत कार्य कराने का आदेश दिया और कहा कि बजट कम होने पर तत्काल दिया जाएगा।
भोपाल की सनफील्ड कंपनी को मरम्मत का जिम्मा सौंपा गया। बुधवार की शाम को मरम्मत कार्य के लिए कम्पनी के उप प्रबंधक सुनील जाधव और सेतु निगम गोरखपुर के मुख्य परियोजना प्रबंधक अशोक सिंह और परियोजना प्रबंधक वैभव सिंह ने पुल का निरीक्षण किया और सनफील्ड कम्पनी के कर्मचारियों को निर्देश दिया। मुख्य परियोजना प्रबंधक ने बताया कि चार करोड़ में ही मरम्मत कार्य होगा। दो से तीन माह मरम्मत में लग सकते हैं। इस बार मरम्मत हो जाने के बाद दोबारा मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। आवागमन पूर्व की भांति जारी रहेगा।
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आवागमन शुरू होने पर भारी वाहन के गुजरते समय छठे-सातवें पाए के ज्वाइंट की दरार दो फुट फैल गई। सूचना मिलने पर आनन-फानन में पुल पर पहुंचे सेतु निगम के अधिकारियों ने नौ फुट ऊंचा बैरियर लगाकर पुल से दो पहिया छोड़, सभी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। अब एक बार फिर भोपाल की कंपनी को पुल मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई है। इसे लेकर अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण किया।
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अक्तूबर में पुल स्पेशलिस्ट दिल्ली से बीके रैना और आईआईटी के इंजीनियर मंगेश जोशी को बुलाया गया। टीम ने पुल की जांच की और भारी वाहनों पर रोक लगाकर छोटे वाहनों का आवागमन शुरू करा दिया। नवंबर में बीके रैना और मंगेश जोशी ने दूसरी बार पुल का निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि पुल से भारी वाहन हमेशा के लिए बंद रहेंगे या मरम्मत के बाद चल सकते हैं।
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इसके लिए अलग अलग कोण से नक्शा बनाकर अपने साथ लेते गए। दिल्ली में विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ बैठक में निर्णय लिया गया कि मरम्मत के बाद भारी वाहन भी चलेंगे और सरकार को बजट बनाकर सौंप दिया। प्रदेश सरकार ने मुख्य कार्यालय सेतु निगम लखनऊ को चार करोड़ बचे पैसे में मरम्मत कार्य कराने का आदेश दिया और कहा कि बजट कम होने पर तत्काल दिया जाएगा।
भोपाल की सनफील्ड कंपनी को मरम्मत का जिम्मा सौंपा गया। बुधवार की शाम को मरम्मत कार्य के लिए कम्पनी के उप प्रबंधक सुनील जाधव और सेतु निगम गोरखपुर के मुख्य परियोजना प्रबंधक अशोक सिंह और परियोजना प्रबंधक वैभव सिंह ने पुल का निरीक्षण किया और सनफील्ड कम्पनी के कर्मचारियों को निर्देश दिया। मुख्य परियोजना प्रबंधक ने बताया कि चार करोड़ में ही मरम्मत कार्य होगा। दो से तीन माह मरम्मत में लग सकते हैं। इस बार मरम्मत हो जाने के बाद दोबारा मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। आवागमन पूर्व की भांति जारी रहेगा।