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Ballia News: दस हजार बच्चों का बचपन लड़ रहा कुपोषण से जंग
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बलिया। जिले में करीब दस हजार से अधिक मासूमों का बचपन कुपोषण की चपेट में है। कुपोषण को दूर करने के लिए भले की बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन हकीकत इससे बहुत दूर है। खेलने-कूदने और जिंदगी की शुरुआत करने की उम्र में इन मासूम जिंदगियों का बचपन सेहतमंद बनने को कुपोषण से जंग लड़ रहा है। जिले में 9929 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधीन संचालित होने वाले 3471 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 2,66,829 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों पर बीते अप्रैल माह में करीब 2238 आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने 2,50,344 बच्चों का सर्वे किया। इनमें 9929 बच्चे कुपोषित मिले हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिला व बच्चों को पूरक आहार दिया जाता है। इससे उनको पौष्टिकता से भरपूर जीवन मिल सके। लेकिन, इसके बाद भी कई बच्चे कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। वजह कुछ भी रहे, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीतता है।
ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों का वजन व देखभाल की जाती है। इसके बाद गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाया जाता है। इसके अलावा इन बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए दलिया, दाल, तेल और फोर्टिफाइड चावल आदि भी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन, इसके बाद भी जिलेभर में 9929 बच्चे कुपोषण के बीच अपना जीवन गुजार रहे हैं। इसमें 2277 बच्चे अति कुपोषित और 7652 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र पर भी फिलहाल 18 बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।
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बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए डीएम थे गंभीर
बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए तत्कालीन डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। अफसरों की सुपर-30 टीम बनाई गई है। जो, कुपोषित बच्चों के परिवारों को सरकार की योजनाओं का लाभ देते हुए उनको कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। यह अधिकारी समय-समय पर गांवों का दौरा कर परिवार की स्थिति का जायजा भी लेते रहते है।
बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाकर उनको स्वस्थ बनाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर कुपोषित बच्चों के परिवारों के बीच जाकर उनका आकलन भी किया जाता है। इसके ऐसे बच्चों को पौष्टिक आहार का वितरण भी किया जाता है।
-केएम पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बलिया।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधीन संचालित होने वाले 3471 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 2,66,829 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों पर बीते अप्रैल माह में करीब 2238 आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने 2,50,344 बच्चों का सर्वे किया। इनमें 9929 बच्चे कुपोषित मिले हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिला व बच्चों को पूरक आहार दिया जाता है। इससे उनको पौष्टिकता से भरपूर जीवन मिल सके। लेकिन, इसके बाद भी कई बच्चे कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। वजह कुछ भी रहे, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीतता है।
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ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों का वजन व देखभाल की जाती है। इसके बाद गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाया जाता है। इसके अलावा इन बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए दलिया, दाल, तेल और फोर्टिफाइड चावल आदि भी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन, इसके बाद भी जिलेभर में 9929 बच्चे कुपोषण के बीच अपना जीवन गुजार रहे हैं। इसमें 2277 बच्चे अति कुपोषित और 7652 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र पर भी फिलहाल 18 बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।
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बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए डीएम थे गंभीर
बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए तत्कालीन डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। अफसरों की सुपर-30 टीम बनाई गई है। जो, कुपोषित बच्चों के परिवारों को सरकार की योजनाओं का लाभ देते हुए उनको कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। यह अधिकारी समय-समय पर गांवों का दौरा कर परिवार की स्थिति का जायजा भी लेते रहते है।
बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाकर उनको स्वस्थ बनाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर कुपोषित बच्चों के परिवारों के बीच जाकर उनका आकलन भी किया जाता है। इसके ऐसे बच्चों को पौष्टिक आहार का वितरण भी किया जाता है।
-केएम पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बलिया।