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बलिया-छपरा रेलखंड पर दलदल रेलवे ट्रैक हुआ दुरूस्त
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बलिया। बलिया-छपरा रेलखंड पर करीब तीन किलोमीटर दलदल है। इसे पार करते समय ट्रेन में बैठे यात्रियों की सांसें रुक सी जाती थी। इस स्थान पर अब तक ट्रेन 10 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार से गुजरती थी। लेकिन अब इस ट्रैक को करीब 50 किमी की रफ्तार से दौड़ने लायक बना दिया गया है। यह सुविधा बैडफारमेशन ट्रीटमेंट के माध्यम से हुआ है।
बलिया से छपरा तक काली मिट्टी है और रेलवे ट्रैक पानी से घिरा रहता है। रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण करा रहा है। वर्ष 2019 में रेलवे ट्रैक धंस गया। इसके बाद रेलवे के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई थी। ट्रेनें दूसरे ट्रैक पर न्यूनतम गति से गुजारी जाने लगी, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आरडीएसओ (रेलवे डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन) ने सर्वे किया और बैडफारमेशन ट्रीटमेंट (आस्टिया की तकनीक) से ट्रैक को गतिमान बनाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली की एचएमबीएस टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। इसने जीओ ग्रिड और जीओ टेक्सटाइल की मदद से बेहतर ट्रैक तैयार कर लिया गया है।
सूत्रों की माने तो ट्रैक के नीचे की काली मिट्टी डेढ़ मीटर गहराई तक निकाली गई। इसके अलावा, आठ मीटर चौड़ा क्षेत्र समतल किया गया। जीओ टेक्सटाइल फाइबर टुकड़ा बिछाया गया। इस पर सफेद बालू की मोटी लेयर चढ़ाई गई। जिसके ऊपर करीब तीन किलोमीटर लंबा और आठ मीटर चौड़ा जीओ ग्रिड फाइवर बिछाया। जीरो से 20 एमएम तक आकार के मिक्स स्टोन चिप्स (विशेष स्वायल) की डेढ़ मीटर मोटी परत चढ़ाई गई है। इसके ऊपर गिट्टी बिछाकर स्लीपर व पटरी रखकर जाम कर दिया गया। उधर, बलिया से छपरा तक दोहरीकरण कार्य 450 करोड़ में चल रहा है। इस बाबत मॉडल रेलवे स्टेशन बलिया के स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने बताया कि दलदल वाले हिस्से को कार्यदायी संस्था द्वारा ठीक कर लिया गया है। इस पर शीघ्र ही अब ट्रेनें तेजगति से दौड़ेगी।
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बलिया से छपरा तक काली मिट्टी है और रेलवे ट्रैक पानी से घिरा रहता है। रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण करा रहा है। वर्ष 2019 में रेलवे ट्रैक धंस गया। इसके बाद रेलवे के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई थी। ट्रेनें दूसरे ट्रैक पर न्यूनतम गति से गुजारी जाने लगी, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आरडीएसओ (रेलवे डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन) ने सर्वे किया और बैडफारमेशन ट्रीटमेंट (आस्टिया की तकनीक) से ट्रैक को गतिमान बनाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली की एचएमबीएस टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। इसने जीओ ग्रिड और जीओ टेक्सटाइल की मदद से बेहतर ट्रैक तैयार कर लिया गया है।
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सूत्रों की माने तो ट्रैक के नीचे की काली मिट्टी डेढ़ मीटर गहराई तक निकाली गई। इसके अलावा, आठ मीटर चौड़ा क्षेत्र समतल किया गया। जीओ टेक्सटाइल फाइबर टुकड़ा बिछाया गया। इस पर सफेद बालू की मोटी लेयर चढ़ाई गई। जिसके ऊपर करीब तीन किलोमीटर लंबा और आठ मीटर चौड़ा जीओ ग्रिड फाइवर बिछाया। जीरो से 20 एमएम तक आकार के मिक्स स्टोन चिप्स (विशेष स्वायल) की डेढ़ मीटर मोटी परत चढ़ाई गई है। इसके ऊपर गिट्टी बिछाकर स्लीपर व पटरी रखकर जाम कर दिया गया। उधर, बलिया से छपरा तक दोहरीकरण कार्य 450 करोड़ में चल रहा है। इस बाबत मॉडल रेलवे स्टेशन बलिया के स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने बताया कि दलदल वाले हिस्से को कार्यदायी संस्था द्वारा ठीक कर लिया गया है। इस पर शीघ्र ही अब ट्रेनें तेजगति से दौड़ेगी।
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