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Ballia News: एसएनए स्पर्श पोर्टल से होगी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की निगरानी
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पंदह। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएम-जी) योजना को कुशल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने एक और पहल की है। केंद्र प्रायोजित इस योजना के लिए धन स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया अब एसएनए स्पर्श पोर्टल (सिंगल नोडल एजेंसी) से की जाएगी। उप सचिव अनिल कुमार ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिया है। उप सचिव ने एसएनए स्पर्श पोर्टल प्रणाली को यथाशीघ्र लागू करते हुए 31 मार्च 2025 के बाद इस मद में खर्च की गई धनराशि का विवरण दर्ज करने की अपेक्षा की है।
यह प्रणाली के लागू होने से केंद्र सरकार से प्राप्त फंड का सीधे उपयोग करना संभव हो सकेगा। साथ ही फंड प्रवाह पर केंद्र सरकार की निगरानी भी होगी। इससे फंड के उपयोग में मनमानी पर रोक लग सकेगी। इस प्रणाली के लागू होने से गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए शुरू किए गए शौचालय निर्माण, स्वच्छता जागरूकता अभियान, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को गति मिलने की उम्मीद है।
त्रिस्तरीय होगी स्पर्श पोर्टल की व्यवस्था
नई व्यवस्था को मूर्त रूप देने और उसके कुशल संचालन के लिए राज्य, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर अलग अलग व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश स्तर पर कुशल मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्टेट स्कीम मैनेजर की होगी। सरकार ने यह जिम्मेदारी किरेंद्र पाल सिंह (उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन) को सौंपा है। जबकि जिले और पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी की अलग से यूजर आईडी बनाई जाएगी। वहीं राज्य, मंडल, जिला और पंचायत स्तर पर एडमिन, मेकर और चेकर भी बनाए जाएंगे। मेकर जहां वेंडरों और लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन और भुगतान के वाउचर बनाएंगे, वहीं कार्यों का अप्रूवल और रिजेक्शन चेकर के जिम्मे होगा।
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सीडीओ और डीपीआरओ की भूमिका होगी अहम
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था में जिले स्तर पर एडमिन और मेकर की भूमिका डीपीआरओ की होगी, जबकि सीडीओ चेकर होंगे। यानी भुगतान का अप्रूवल और रिजेक्शन सीडीओ की मर्जी पर निर्भर करेगा। जबकि ग्राम पंचायत स्तर पर चेकर की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को तथा ग्राम पंचायत सचिव एडमिन और मेकर की भूमिका निभाएंगे। वहीं मंडल स्तर पर मंडलीय उपनिदेशक पंचायत को एडमिन और चेकर तथा शासकीय लेखाकार व कार्यालय सहायक मेकर होंगे। प्रत्येक स्तर पर मेकर द्वारा प्रस्तुत बिल व वाउचर का चेकर द्वारा अप्रूवल करने के बाद स्कैन कॉपी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। भुगतान में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी मेकर, चेकर और एडमिन की होगी। जिला पंचायत राज अधिकारी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि शासन से एसएनए स्पर्श पोर्टल जारी किया गया है। इसके माध्यम से अब पारदर्शिता बनी रहेगी। पहले ट्रेजरी से संचालित होगी।
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यह प्रणाली के लागू होने से केंद्र सरकार से प्राप्त फंड का सीधे उपयोग करना संभव हो सकेगा। साथ ही फंड प्रवाह पर केंद्र सरकार की निगरानी भी होगी। इससे फंड के उपयोग में मनमानी पर रोक लग सकेगी। इस प्रणाली के लागू होने से गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए शुरू किए गए शौचालय निर्माण, स्वच्छता जागरूकता अभियान, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को गति मिलने की उम्मीद है।
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त्रिस्तरीय होगी स्पर्श पोर्टल की व्यवस्था
नई व्यवस्था को मूर्त रूप देने और उसके कुशल संचालन के लिए राज्य, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर अलग अलग व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश स्तर पर कुशल मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्टेट स्कीम मैनेजर की होगी। सरकार ने यह जिम्मेदारी किरेंद्र पाल सिंह (उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन) को सौंपा है। जबकि जिले और पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी की अलग से यूजर आईडी बनाई जाएगी। वहीं राज्य, मंडल, जिला और पंचायत स्तर पर एडमिन, मेकर और चेकर भी बनाए जाएंगे। मेकर जहां वेंडरों और लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन और भुगतान के वाउचर बनाएंगे, वहीं कार्यों का अप्रूवल और रिजेक्शन चेकर के जिम्मे होगा।
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सीडीओ और डीपीआरओ की भूमिका होगी अहम
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था में जिले स्तर पर एडमिन और मेकर की भूमिका डीपीआरओ की होगी, जबकि सीडीओ चेकर होंगे। यानी भुगतान का अप्रूवल और रिजेक्शन सीडीओ की मर्जी पर निर्भर करेगा। जबकि ग्राम पंचायत स्तर पर चेकर की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को तथा ग्राम पंचायत सचिव एडमिन और मेकर की भूमिका निभाएंगे। वहीं मंडल स्तर पर मंडलीय उपनिदेशक पंचायत को एडमिन और चेकर तथा शासकीय लेखाकार व कार्यालय सहायक मेकर होंगे। प्रत्येक स्तर पर मेकर द्वारा प्रस्तुत बिल व वाउचर का चेकर द्वारा अप्रूवल करने के बाद स्कैन कॉपी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। भुगतान में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी मेकर, चेकर और एडमिन की होगी। जिला पंचायत राज अधिकारी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि शासन से एसएनए स्पर्श पोर्टल जारी किया गया है। इसके माध्यम से अब पारदर्शिता बनी रहेगी। पहले ट्रेजरी से संचालित होगी।