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मृतक, अपात्रों को भी बांटी समाजवादी पेंशन
ballia
Updated Wed, 02 Aug 2017 10:35 PM IST
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पेंशन
- फोटो : अमर उजाला
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समाजवादी पेंशन वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है। जांच में जहां 11 हजार 497 लाभार्थी अपात्र मिले हैं, वहीं 383 लाभार्थी मृतक पाए गए हैं। शासन के निर्देश पर जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से समाजवादी पेंशनधारकों के कराए गए सत्यापन से इसका खुलासा हुआ है। हालांकि अभी जांच जारी है। वहीं, शासन ने 2017-18 में पेंशन योजना के लिए किसी बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। जिले में कुल 93 हजार 189 समाजवादी पेंशनर हैं।
2012-13 में समाजवादी पेंशन योजना लागू की गई। मई 2014 में शासन ने जिले के लिए 63 हजार 161 का लक्ष्य निर्धारित करते हुए चयन प्रक्रिया शुरु करने को कहा और जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग को दी। हालांकि समय-समय पर लक्ष्य भी बढा। लेकिन अन्य योजनाओं की तरह समाजवादी पेंशन योजना में भी समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबूओं ने मनमाना चयन किया। शासन के नियमों के मुताबिक, ग्राम सचिव लाभार्थियों से आवेदन लेकर सत्यापन कर बीडीओ के माध्यम से जिला समाज कल्याण कार्यालय को देंगे और समाज कल्याण विभाग की ओर इसकी फीडिंग कराई जाएगी। नोडल अधिकारी सीडीओ ब्लाकों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर फीडिंग की जांच कर डाटा को लॉक करेंगे।
लेकिन सच है यह है कि एक ओर जहां सचिव व बीडीओ ने मनमानी तरीके से चयन कर सूची भेजी तो दूसरी ओर जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबूओं ने भी मनमाने तरीके से फीडिंग कराई। शिकायतों पर अधिकारी इसे अनसुना करते रहे। चयन का पूरा मानक ध्वस्त रहा। हैरानी की बात रही कि इसके बावजूद डाटा फीडिंग को लॉक कर किश्त भेजने का काम शुरु कर दिया गया। करीब एक माह पहले शासन ने समाजवादी पेंशन की जांच का निर्देश दिया था। जिस पर यह खुलासा हुआ।
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2012-13 में समाजवादी पेंशन योजना लागू की गई। मई 2014 में शासन ने जिले के लिए 63 हजार 161 का लक्ष्य निर्धारित करते हुए चयन प्रक्रिया शुरु करने को कहा और जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग को दी। हालांकि समय-समय पर लक्ष्य भी बढा। लेकिन अन्य योजनाओं की तरह समाजवादी पेंशन योजना में भी समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबूओं ने मनमाना चयन किया। शासन के नियमों के मुताबिक, ग्राम सचिव लाभार्थियों से आवेदन लेकर सत्यापन कर बीडीओ के माध्यम से जिला समाज कल्याण कार्यालय को देंगे और समाज कल्याण विभाग की ओर इसकी फीडिंग कराई जाएगी। नोडल अधिकारी सीडीओ ब्लाकों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर फीडिंग की जांच कर डाटा को लॉक करेंगे।
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लेकिन सच है यह है कि एक ओर जहां सचिव व बीडीओ ने मनमानी तरीके से चयन कर सूची भेजी तो दूसरी ओर जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबूओं ने भी मनमाने तरीके से फीडिंग कराई। शिकायतों पर अधिकारी इसे अनसुना करते रहे। चयन का पूरा मानक ध्वस्त रहा। हैरानी की बात रही कि इसके बावजूद डाटा फीडिंग को लॉक कर किश्त भेजने का काम शुरु कर दिया गया। करीब एक माह पहले शासन ने समाजवादी पेंशन की जांच का निर्देश दिया था। जिस पर यह खुलासा हुआ।
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