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घाघरा में बढ़ाव से तटवर्ती किसान चिंतित
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 10 Mar 2015 10:49 PM IST
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घाघरा के जलस्तर में अचानक उफान से तटवर्ती इलाकों में खलबली मची है। किसान चिंतित हैं। पानी बढ़ने से दियारा क्षेत्र के दर्जनाें किसानों की तरबूज और खरबूज की सैकड़ाें एकड़ खेती बरबाद होने के कगार पर है।
रविवार की शाम घाघरा में अचानक जलस्तर बढ़ने से कथौड़ा, डूहाबिहरा, सिसोटार, लीलकर, खरीद, बिजलीपुर आदि गांवों के दियारे के सामने नदी के बीच में जो बालू के टीले हैं, उनके जलमग्न होने से सैकड़ाें एकड़ फसल पूरी तरह डूब चुकी है।
सिसोटार और खरीद गांव के क्षेत्र की उपजाऊ भूमि कट-कटकर नदी में विलीन होने लगी है। इससे किसानों और तटवर्ती लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। खरीद गांव के सामने बना पीपा पुल भी डूब गया है।
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इस पर से लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। अगर आवागमन पर तत्काल रोक नहीं लगी तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
सिसोटार निवासी राजेंद्र यादव, विजय, राजाराम, महेश आदि का कहना है कि घाघरा प्रत्येक वर्ष सैकड़ाें एकड़ उपजाऊ भूमि अपने में समाहित करती जा रही है।
उधर शासन और जिला प्रशासन इसे रोकने के लिए करोड़ों रुपये पानी में बहा रहा है, लेकिन निजात नहीं मिल रहा। विभाग इसे डेंजर जोन से बाहर बताकर पल्ला झाड़ लिया है।
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रविवार की शाम घाघरा में अचानक जलस्तर बढ़ने से कथौड़ा, डूहाबिहरा, सिसोटार, लीलकर, खरीद, बिजलीपुर आदि गांवों के दियारे के सामने नदी के बीच में जो बालू के टीले हैं, उनके जलमग्न होने से सैकड़ाें एकड़ फसल पूरी तरह डूब चुकी है।
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सिसोटार और खरीद गांव के क्षेत्र की उपजाऊ भूमि कट-कटकर नदी में विलीन होने लगी है। इससे किसानों और तटवर्ती लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। खरीद गांव के सामने बना पीपा पुल भी डूब गया है।
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इस पर से लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। अगर आवागमन पर तत्काल रोक नहीं लगी तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
सिसोटार निवासी राजेंद्र यादव, विजय, राजाराम, महेश आदि का कहना है कि घाघरा प्रत्येक वर्ष सैकड़ाें एकड़ उपजाऊ भूमि अपने में समाहित करती जा रही है।
उधर शासन और जिला प्रशासन इसे रोकने के लिए करोड़ों रुपये पानी में बहा रहा है, लेकिन निजात नहीं मिल रहा। विभाग इसे डेंजर जोन से बाहर बताकर पल्ला झाड़ लिया है।