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सिपाही से एसडीएम बने श्याम बाबू की नियुक्ति रद्द, जाति प्रमाण पत्र फर्जी होने पर हुई कार्रवाई

Thu, 27 Aug 2020 12:20 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 27 Aug 2020 12:20 AM IST
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Shyam Babu appointed as SDM canceled
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2016 की पीसीएस परीक्षा में अंतिम रूप से चयनित होकर सिपाही से एसडीएम बने बलिया जिले के बैरिया तहसील क्षेत्र के इब्राहिमाबाद उपरवार निवासी श्याम बाबू की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। कई स्तर पर हुई जांच में प्रमाण पत्र फर्जी साबित होने के बाद अपर मुख्य सचिव ने यह आदेश जारी किया। श्याम बाबू की तैनाती बतौर उप जिलाधिकारी (परिवीक्षाधीन) संतकबीर नगर में थी।

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श्याम बाबू ने इलाहाबाद (प्रयागराज) में सिपाही रहते हुए वर्ष 2016 में पीसीएस की मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई। गोंड जाति के श्याम बाबू ने एसटी का प्रमाण पत्र लगाया था। नियुक्ति के बाद मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था गोरखपुर के अध्यक्ष विजय बहादुर चौधरी ने श्याम बाबू के विपक्ष में जिलास्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की ओर से जून 2019 में जारी आदेश को निरस्त करने के लिए मंडलीय अपीलीय फोरम में अपील की।
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इस संबंध में कमिश्नर की अध्यक्षता में मार्च 2020 में बैठक हुई। इसमें बलिया के सीआरओ प्रवरशील बरनवाल, उप निदेशक पंचायत राम जियावन व समाज कल्याण के उप निदेशक सुरेश चंद्र के साथ ही अपीलकर्ता व श्याम बाबू भी मौजूद हुए।
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यहां शिकायतकर्ता ने कहा कि श्याम बाबू का एसटी का प्रमाण पत्र हेराफेरी पर आधारित है। बैरिया के तहसीलदार ने अपनी आख्या में श्याम बाबू को एसटी का नहीं माना है। यह भी बताया कि उच्च न्यायालय में दायर याचिका के जवाब में बलिया के डीएम व बांसडीह तहसीलदार की ओर से पत्र दाखिल किया गया है कि बलिया में ये जनजाति नहीं पाई जाती है।

नवंबर 2017 को मंडलीय अपीलीय फोरम में भी कहा गया है कि गोंड जनजाति केवल उनके लिए है जो कैमूर अथवा झांसी मंडल से विस्थापित होकर आए हैं, न कि बलिया में पहले से निवास कर रहे हैं। इसके अलावा भी शिकायतकर्ता ने तहसील व जिला स्तर से जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्याम बाबू के एसटी प्रमाण पत्र को फर्जी बताया।

अपीलीय फोरम ने स्थलीय जांच आख्या का भी परीक्षण किया। इसमें श्याम बाबू के गांव के अलग-अलग लोगों का बयान लिया गया है। लोगों ने बताया है कि श्याम बाबू व उनके पूर्वज कई पुश्तों से इब्राहिमाबाद में ही रहते हैं। किसी दूसरे जिले से नहीं आए हैं। जबकि शासनादेश में स्पष्ट है कि मिर्जापुर (अब सोनभद्र) जिले के कैमूर माला को छोड़कर उत्तर प्रदेश में गोंड समुदाय के लोग नहीं रहते हैं।
 

Shyam Babu appointed as SDM canceled
सांकेतिक तस्वीर

स्थलीय सत्यापन के दौरान गांव के लोगों ने यह भी बताया कि श्याम बाबू के पूर्वजों का पेशा खेती-बारी, मजदूरी व भूजा भूजने का है। स्थानीय स्तर पर भूजा भूजने का काम भड़भूजा करते थे। इसका गोंड जाति से कोई संबंध नहीं हैं क्योंकि यह पिछड़ी जाति में है।

मंडलीय अपीलीय फोरम द्वारा उपलब्ध कराए गए निर्णय के आधार पर अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंहल ने अपने आदेश में कहा है कि जिस आधार पर श्याम बाबू का चयन पीसीएस परीक्षा में हुआ था, वह आधार ही दूषित व कपटपूर्ण है। लिहाजा, राज्यापाल लोक सेवा आयोग (उत्तर प्रदेश, प्रयागराज) द्वारा श्याम बाबू की एसडीएम (परिवीक्षाधीन) के पद पर की गई मौलिक नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश प्रदान करते हैं।

प्रमाण पत्र के लिए लगाई थी रिश्तेेदार की खतौनी

एसटी का प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए श्याम बाबू ने खुद के बजाय अपने एक रिश्तेदार की खतौनी लगाई थी। बैरिया तहसीलदार ने अपनी जांच आख्या में कहा है कि श्याम बाबू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसके पूर्वज भूमिहीन हैं। लिहाजा अपने रिश्तेदार गोन्हियाछपरा निवासी परमानंद साह के पूर्वजों की खतौनी लगाकर एसटी का प्रमाण पत्र जारी कराया है।

जांच आख्या में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी व्यक्ति की जाति का निर्धारण उसके पिता की जाति से होता है, रिश्तेदार की जाति से नहीं। ऐसे में श्याम बाबू द्वारा अपनी जाति के संबंध में जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए हैं वे शासनादेशों के आधारों को पूर्ण नहीं कर रहे हैं। उनके टीसी प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर की नकल 1950 के राष्ट्रपति के आदेश के बहुत बाद के हैं।

Shyam Babu appointed as SDM canceled
सांकेतिक तस्वीर

सपा सरकार के आदेश को हाईकोर्ट ने किया था स्थगित

श्याम बाबू के मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में बैरिया तहसीलदार ने विभिन्न तथ्यों का हवाला दिया है। कहा है कि संविधान में एससी व एसटी की कोई परिभाषा नहीं दी गई है। लेकिन राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वे प्रत्येक राज्य के राज्यपाल से परामर्श कर एक सूची बनाएं। राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है कि किसी जाति को एससी या एसटी में शामिल करें।

पूर्व में सपा सरकार द्वारा 16 अन्य पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का आदेश जारी किया गया था लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा उसे स्थगित कर दिया गया है। धनगर जाति को भी एससी में शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय द्वारा स्थगित कर दिया गया है, जिसका आधार यह बताया गया है कि एससी-एसटी का लाभ केवल उन्हीं जातियों को मिल सकता है जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कर दी गई है।

बलिया के गोंड अनुसूचित जनजाति नहीं

जांच रिपोर्ट में मई 2018 के तत्कालीन बलिया डीएम के पत्र का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि बलिया जिला में भुर्जी, भुजवा, भड़भूजा, भूज, कान्दू, कसौधन, कहार जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग में आती हैं।

पूर्व में डीएम की अध्यक्षता में जिला कास्ट स्क्रूटनी कमेटी की बैठकों में निर्णय हो चुका है कि भुर्जी, भुजवा, भड़भूजा, जिन्हें गोंड कहकर पुकारा जाता है, अनुसूचित जनजाति गोंड नहीं हैं। अक्टूबर 2010 के शसनादेश में भी उल्लेख है कि प्रदेश के कुछ भागों में भुर्जी, भुजवा, भड़भूजा जिन्हें स्थानीय भाषा में गोंड जाति भी कहा जाता है और जो पिछड़े वर्ग में आते हैं, उन्हें कुछ स्थानों पर एसटी का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, जो गलत है।

प्रमाण पत्र जारी करने वालों पर भी हो कार्रवाई 

अपर मुख्य सचिव ने अपने आदेश में श्याम बाबू को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई को कहा है। लिखा है कि अनियमित तरीके से जारी किए गए प्रमाण पत्र के आधार पर ही श्याम बाबू द्वारा एसडीएम का पद प्राप्त कर लिया गया है।

आदेश की एक प्रति संबंधित नियुक्ति विभाग व लोक सेवा आयोग उप्र को उपलब्ध कराई जाय। सभी संबंधित पक्षों को आदेश की प्रति उपलब्ध करा दी जाए। लिखा है कि श्याम बाबू को अनियमित तरीके से एसटी प्रमाण पत्र जारी करने वाले तहसीलदार व अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई कराई जाय।

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