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अखोप माइनर में पानी छोड़ने से कई एकड़ कृषी भूमि जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो बलिया।
Updated Fri, 01 Jan 2016 09:09 PM IST
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सीयर क्षेत्र के पूर्वोत्तर भूभाग को सिंचित करने वाली अखोप माइनर की नहर में अचानक पानी छोड़े जाने से पचासाें एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई।
खेत में बोए गए गेहूं के फसल पानी में डूब जाने से बर्बाद होने की संभावना बढ़ गई है। इसके चलते किसानों में खलबली मची हुई है। पानी अधिक होने से किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई है और उनकी कमर टूट सकती है।
अखोप माइनर से नहर पतनारी, तरछापार, गडे़री पुरवा आदि ग्रामों से होकर बांसपार बहोरवा की ओर जाती है। नहर में अचानक पानी छोड़ दिए जाने से ओवरफ्लो होकर बह रहा है।
नहर के आसपास गांवों के पचासों एकड़ कृषि भूमि पानी फैल गया है। किसान पूरी रात पानी को रोकने का प्रयास करते रहे। किसान कृष्णकांत दूबे, विवेक दूबे, वंशराज, विभूति, सुब्बा यादव, नंदकिशोर, जयगोविंद यादव आदि की फसलें भी पानी में डूब गई हैं। नहर का पानी किनारे स्थित संपर्क मार्ग पर फैल गया है।
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जिससे आवागमन में भी घोर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। नहर में पानी छोड़ने के संबंध में ग्रामीणों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब खेत को पानी की जरूरत होती है तो नहर सूखी रहती है।
जबकि पानी की कोई जरूरत नहीं है, नहर में आकारण पानी छोड़ ओवरफ्लो कर दिया गया है। इससे फसल की भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे है।
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खेत में बोए गए गेहूं के फसल पानी में डूब जाने से बर्बाद होने की संभावना बढ़ गई है। इसके चलते किसानों में खलबली मची हुई है। पानी अधिक होने से किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई है और उनकी कमर टूट सकती है।
अखोप माइनर से नहर पतनारी, तरछापार, गडे़री पुरवा आदि ग्रामों से होकर बांसपार बहोरवा की ओर जाती है। नहर में अचानक पानी छोड़ दिए जाने से ओवरफ्लो होकर बह रहा है।
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नहर के आसपास गांवों के पचासों एकड़ कृषि भूमि पानी फैल गया है। किसान पूरी रात पानी को रोकने का प्रयास करते रहे। किसान कृष्णकांत दूबे, विवेक दूबे, वंशराज, विभूति, सुब्बा यादव, नंदकिशोर, जयगोविंद यादव आदि की फसलें भी पानी में डूब गई हैं। नहर का पानी किनारे स्थित संपर्क मार्ग पर फैल गया है।
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जिससे आवागमन में भी घोर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। नहर में पानी छोड़ने के संबंध में ग्रामीणों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब खेत को पानी की जरूरत होती है तो नहर सूखी रहती है।
जबकि पानी की कोई जरूरत नहीं है, नहर में आकारण पानी छोड़ ओवरफ्लो कर दिया गया है। इससे फसल की भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे है।
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